Bharathi College of Education के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट पहुंची आदिवासी छात्राएं

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Ranchi: झारखंड में एक ओर सरकारी शिक्षण व्‍यवस्‍था ठप्‍प है वहीं कुकुरमुत्‍ते की तरह प्राइवेट स्‍कूल और कॉलेज खूब मनमानी कर रही हैं. ये प्राइवेट स्‍कूल-कॉलेज ज्‍यादातर राजनेताओं के सह पर एजुकेशन माफिया चला रहे हैं. जहां गरीब छात्र-छात्राओं से यूनिवर्सिटी द्वारा तय गाइडलाइन के विपरित मोटी फीस वसूल की जाती है. जब इसका विरोध होता है तो स्‍टूडेंट्स को हर तरह से प्रताड़ित किया जाता है. झारखंड हाइकोर्ट के समक्ष एक ऐसा ही मामला आया है. रांची जिले के मांडर में स्थित Bharathi College of Education के खिलाफ हाईकोर्ट से ऐसी ही शिकायत की गई है. पीड़ित छात्रों ने हाईकोर्ट से कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दूसरे कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी कराने की अपील की है.  

झारखंड हाईकोर्ट के वरीय वधिवक्‍ता राजीव कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मांडर स्थित Bharathi College of Education में ट्राइबल छात्र-छात्राओं का दोहन हो रहा है. कॉलेज में धमकी देकर स्‍टूडेंट्स से ज्‍यादा से ज्‍यादा पैसे वसूल किये जाते हैं. कॉलेज में लेक्‍चरर भी नहीं हैं. पढ़ाने का तरीका सही नहीं है.

राजीव कुमार ने कहा कि यूनिवर्सिटी यदि 800 रुपये फीस तय करती है तो कॉलेज के द्वारा 7100 रुपये लिया जाता है. इसको लेकर वहां के स्‍टूडेंट्स ने विरोध किया था. इसके बाद सभी पर कार्रवाई करते हुए रस्टिकेट कर दिया गया है. ये सभी स्‍टूडेंट्स झारखंड हाईकोर्ट के शरण में आए हुए हैं. हमलोगों का कहना है कि इनका दूसरे बीएड कॉलेज में ट्रांसफर करा दिया जाये. Bharathi College of Education के द्वारा इन्‍हें फर्स्‍ट इयर का एग्‍जाम नहीं देने दिया जा रहा है, इस पर कार्रवाई की जाये. उन्‍होंने बताया कि इस तरह से प्राइवेट कॉलेज स्‍टूडेंट्स को ब्‍लैकमेल करते हैं.

हाईकोर्ट में मामला दायर करने से पहले अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्राओं ने इंसाफ के हर दरवाजे पर गुहार लगाई. स्‍थानीय थाना, पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ राज्‍यपाल तक अपनी बात पहुंचाई. लेकिन एकेडमिक परीक्षाओं को देखते हुए इनके पास इतना वक्‍त नहीं है कि ये इंसाफ के लिए इंतजार कर सकें.

Bharathi College of Education की मनमानियां

Bharathi College of Education में गड़बड़ी और अनियमितता का ये पूरा मामला क्‍या है पहले ये जानते हैं.  कॉलेज में बीएड के प्रथम वर्ष के परीक्षा फॉर्म भरने के लिए यूनिवर्सिटी से 800 रुपये फीस तय है. Bharathi College of Education यूनिवर्सिटी के गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए 7100 रुपये लेने के लिए फरमान जारी कर दिया.

कॉलेज द्वारा यह फरमान तब जारी किया गया जब पूरे देश में वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने के लिए लॉकडाउन था. जुलाई-अगस्‍त महीने में 7100 रुपये की मांग की गई. तब पैसे नहीं जमा करने पर 90 फीसदी स्‍टूडेंट्स को प्रथम वर्ष की ऑनलाइन परीक्षा से वंचित कर दिया गया.

यहां के सभी स्‍टूडेंट्स के एडमिशन के दौरान ही मैट्रिक, इंटर, ग्रेजुएशन समेत सभी तरह की डिग्रियों के ऑरिजनल सर्टिफिकेट कॉलेज ने अपने पास गिरवी रख लिया. ऐसे में ये स्‍टूडेंट्स न कहीं एडमिशन ले सकते हैं और न कोई नौकरी कर सकते हैं.

इस बीएड कॉलेज में स्‍टूडेंट्स से एजुकेशन टूर के नाम पर 16650 रुपये फीस ली गई. इस दौरान कोरोना लॉकडाउन की वजह से स्‍टूडेंट्स को कहीं भी एजुकेशनल टूर पर नहीं ले जाया गया. इसके बावजूत इस पैसे का क्‍या हुआ इसकी जानकारी स्‍टूडेंट्स को नहीं दी गई. इसकी कोई रसीद भी स्‍टूडेंट्स को नहीं दिया गया है.

कॉलेज में पढ़ने वाले सभी स्‍टूडेंट्स से यूनीफॉर्म और आईडी कार्ड के लिए 5000 रुपये लिये गए हैं. लेकिन ज्‍यादातर स्‍टूडेंट्स को न यूनिफॉर्म मिला है और न आईडी कार्ड.

इस कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी है. मान्‍यता लेने के लिए जिन शिक्षकों की सूची दी गई वो कभी यहां स्‍टूडेंट्स को पढ़ाने नहीं आते. यहां पर एक शिक्षक से दो-दो विषय पढ़वाया जाता है.

रांची यूनिवर्सिटी के कुलपति रमेश पांडेय से Bharathi College of Education के स्‍टूडेंट्स ने इस साल के अगस्‍त महीने से तीन बार मिलकर आवेदन दिया और संज्ञान लेने का आग्रह किया, लेकिन वीसी ने इस पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई.

Bharathi College of Education के 23 स्‍टूडेंट्स का एडमिशन रद्द

Bharathi College of Education में मनमाना फीस का विरोध करने के कारण 23 स्‍टूडेंट्स का एडमिशन रद्द कर दिया गया और उनके खिलाफ मांडर थाना में ऑनलाइन एफआईआर कर दिया गया. बचाव में स्‍टूडेंट्स ने भी एसटी-एससी थाना में एफआईआर कर दिया.

स्‍टूडेंट्स के लगातार गुहार के बार स्‍थानीय विधायक बंधु तिर्की और रांची यूनिवर्सिटी के छात्र कल्‍याण संकायाध्‍यक्ष पीके वर्मा ने संक्षान लेते हुए कॉलेज प्रबंधन और स्‍टूडेंट्स  के साथ बैठक कर 3000 रुपये परीक्षा शुल्‍क और नामांकन रद्द की प्रक्रिया वापस लेने और दोनों पक्षों को अपनी-अपनी प्राथमिकी वापस लेने की सहमती बनवाई.

इसके बाद कॉलेज द्वारा सिर्फ स्‍टूडेंट्स पर अपना एफआईआर वापस लेने का दबाव बना रही है. कॉलेज द्वारा कहा जा रहा है कि एफआईआर वापस लो, वरना परीक्षा फॉर्म भरने नहीं दिया जाएगा.

कॉलेज द्वारा छात्रों को परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जा रही है. स्‍टूडेंट्स ने आशंका जताई है कि इस कॉलेज में दोबारा एडमिशन के बाद भी प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठा रहे स्‍टूडेंट्स को कॉलेज इंटरनल मार्क्‍स में फेल कर सकती है. इस कॉलेज में पूर्ववर्ती छात्रों के साथ ऐसा हो चुका है.

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