1 से 5 करोड़ तक की योजना के अप्रूवल का अधिकार सचिवों से छीनकर मंत्रियों को मिलेगा

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Ranchi: झारखंड सरकार अपने मंत्रियों का अधिकार बढ़ाने जा रही है. मीडिया में छपी खबरों के अनुसार हेमंत सोरेन की सरकार विभागीय सचिवों का अधिकार घटाने जा रही है.

योजनाओं की स्वीकृति को लेकर पूर्व में तय वित्तीय अधिकारों को बदलने की कवायद शुरू हो गई है. इसके तहत अब विभागीय सचिव एक करोड रुपए तक की योजनाओं की ही स्वीकृति देंगे. एक करोड़ से ऊपर और ₹15 करोड़ तक की योजनाओं की स्वीकृति का अधिकार मंत्री के जिम्मे होगा.

उल्लेखनीय है कि मंत्री इसे लेकर काफी दिनों से मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभागीय सचिव और मंत्रियों की योजना स्वीकृति संबंधी अधिकार को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

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मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा भेजे गए पीत पत्र के आधार पर कैबिनेट द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सहमति के लिए बिल वित्त विभाग को भेजा गया है. मुख्यमंत्री सचिवालय सूत्रों के अनुसार सचिवों के अधिकार घटाने संबंधित प्रस्ताव पर अगली कैबिनेट में स्वीकृति मिल जाने की संभावना है.

रघुवर सरकार ने बढ़ाया था सचिवों का अधिकार

5 करोड़ रुपए तक की योजनाओं की स्वीकृति की फाइल विभागीय सचिव तक की जाती है. वित्तीय अधिकार के तहत सचिव ही योजना स्वीकृत करते हैं. 5 करोड़ से लेकर 15 करोड़ तक की योजना स्वीकृत करने की फाइल ही मंत्री के पास जाती है. ₹15 करोड़ से अधिक की योजना को स्वीकृति देने का अधिकार मंत्री परिषद के पास है. पूर्व सीएम रघुवर दास के कार्यकाल में सचिवों का अधिकार एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ किया गया था.

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जनता के बीच 5 करोड़ों रुपए तक की योजनाओं का क्रेडिट नहीं ले पाते मंत्री

वर्तमान व्यवस्था के तहत ₹5 करोड़ तक की योजनाओं की स्वीकृति सचिव स्तर से देने का प्रावधान है. इस कारण सचिव अपने विभागीय मंत्री के पास संबंधित योजना से जुड़ी फाइल अवलोकन करने के लिए भेजते हैं. कभी-कभी साथ करोड़ों रुपए की योजनाओं को टुकड़े में बांट दिया जाता है, ताकि वह ₹5 करोड़ से कम की योजना हो जाए. ऐसा करने के बाद सचिव अपने स्तर से ही उस योजनाओं को स्वीकृत कर देते हैं. इस कारण मंत्री संबंधित योजनाओं को स्वीकृति देकर किसी को उपकृत करने की स्थिति में नहीं रह जाते. ऐसी व्यवस्था के कारण मंत्रियों की अपने विभाग पर पकड़ भी कमजोर पड़ जाती है.

11 विभागों पर पड़ेगा ज्यादा असर

वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में राज्य को योजना बजट 53334 करोड़ है. इस फैसले का 11 प्रमुख विभागों पर अधिक असर पड़ेगा. इस योजना का बजट इस प्रकार है:

  • स्वास्थ्य विभाग: 2984 करोड़
  • भवन निर्माण: 565 करोड़
  • पेयजल स्वच्छता: 3176 करोड़
  • फॉरेस्ट: 595 करोड़
  • पथ निर्माण: 3480 करोड़
  • ग्रामीण विकास: 7388 करोड़
  • ग्रामीण कार्य: 2485 करोड़
  • पंचायती राज: 2169 करोड़
  • नगर विकास: 2702 करोड़
  • जल संसाधन: 1126 करोड़
  • कल्याण विभाग: 1818 करोड़
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समय-समय पर सरकार को वित्तीय अधिकार कंट्रोल करना पड़ता है: रामेश्वर

सचिव का वित्तीय अधिकार कम किए जाने के कितने पक्षधर हैं यह पूछे जाने पर वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि समय-समय पर सरकार को वित्तीय अधिकार कंट्रोल करना पड़ता है. अगर किसी को 5 करोड़ रुपए तक का अधिकार दिया गया है और उसमें कुछ दुरुपयोग हुआ है तो निश्चित रूप से कंट्रोल किया जाना चाहिए. हालांकि ऐसी कोई फाइल उनके पास नहीं आई है.

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