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जुर्माना भरते-भरते दिवालिया न हो जाये झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड

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Ranchi: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का घाटा साल वित्‍तीय साल 2019-20 में बहुत ज्‍यादा बढ़ सकता है. कंपनी अपने उपभोक्‍ताओं को मुआवजा और जुर्माना देते-देते दिवालिया हो सकता है. जी हां, इसकी संभावना बढ़ गयी है. अभी (2018-19) 11 हजार 813.1 करोड़ का रेवेन्‍यू गैप है. साल 2017-18 का रेवन्यू गैप 766.34 करोड़ रुपए था. पिछली बार सरकार के द्वारा 2000 करोड़ का रिसोर्स गैप देने के बावजूद जेबीवीएनल का रेवेन्‍यू गैप बढ़ा.

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हिंदी अखबार हिंदुस्‍तान में छपी खबर के मुताबिक पहली अप्रैल 2019 से 24 घंटे बिजली उलब्‍ध रहेगी. केंद्र सरकार और राज्‍य सरकार मिलकर इसे अमलीजामा पहना रहे हैं. केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह ने कहा है कि अगर उस वक्‍त कोई बिजली वितरण कंपनी बिना किसी कारण बिजली कटौती करती है तो उसे जुर्माना देना होगा. कोई तकनीकी और प्राकृतिक आपदा इसमें शामिल नहीं है.

96 ग्रिड की कमी

कुछ दिन पहले 13 फरवरी को झारखंड के मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने सिदगोड़ा में पावर सब स्‍टेशन का शिलान्‍यास किया था. तब उन्‍होंने कहा था कि राज्‍य में 96 ग्रिड की कमी है. बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अक्‍टूबर तक सभी ग्रिड बन जाएंगी. लेकिन, सरकार ने दिसंबर 2019 तक का समय दिया है.

झारखंड सरकार की इन तैयारियों पर गौर करें तो पहली अप्रैल से राज्‍य के हर घर में 24 घंटे बिजली मुहैया करा पाना मुमकिन नहीं है. यानी 9 महीने तक झारखंड बिजली वितरण निगम को अपने उपभोक्‍ताओं को जुर्माना देना होगा. अभी जेबीवीएनल का रेवेन्‍यू गैप 12 हजार करोड़ के करीब है. जुर्माना देना पड़ा तो यह आंकड़ा कहां जाएगा, यह बड़ा सवाल है. जबकि, झारखंड में बिजली विभाग के सभी कामगाज मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के अधीन है.

सौभाग्य योजना के तहत झारखंड के गांवों में बिजली पहुंचाने की बातें कही जा रही हैं. जिसकी शुरुआत सितंबर 2017 में हुई थी.  राज्य के ग्रामीण इलाकों में सरकार की तरफ से 5151.2 मिलियन यूनिट की बिजली अक्तूबर 2018 तक दी जाती थी. अब बिजली की खपत 5591.2 मिलियन यूनिट हो गयी है.

38 दिन में 5291 मेगावाट बिजली की कटौती

कम बिजली मिलने का खामियाजा भी झारखंड के लोगों को आये दिन भुगतना पड़ता है. एक ताजा आंकड़ा के मुताबिक 9 दिसंबर 2018 से 18 जनवरी 2019 तक 5291 मेगावाट बिजली की कटौती की गयी. इस कारण 38 दिनों तक पूरे प्रदेश में औसतन तीन से चार घंटे बिजली की आपूर्ति बाधित रही. वहीं निजी कंपनियों इंलैंड, सीपीपी, आधुनिक सहित सेंट्रल एलोकेशन से अधिकतम 756 मेगावाट तक बिजली ली गयी.

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