2019 Election से पहले बदले जायेंगे Jharkhand के मुख्‍य सचिव और Bihar के डीजीपी

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Subhash Shekhar

Ranchi: 2019 चुनावों के पहले झारखंड के मुख्‍य सचिव सुधीर त्रिपाठी बदले जायेंगे. साथ ही साथ बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी का बदलना भी तय माना जा रहा है. चुनाव आयोग ने एक नया निर्देश जारी किया है. दोनों अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भी सेवा विस्‍तार में योगदान दे रहे हैं.

चुनाव आयोग ने राज्‍य सरकारों को एक चिट्ठी भेजी है. चुनाव आयोग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नरेंद्र भटोलिया द्वारा जारी इस पत्र में कहा गया है. इस चिट्ठी के बाद भी बिहार के डीजीपी और झारखंड के मुख्‍य सचिव को लेकर नयी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं. चिट्ठी में स्‍पष्‍ट कहा गया है कि कोई भी ऐसा पदाधिकारी जिन्‍हें सेवा विस्‍तार मिला हो या फिर उन्‍हें फिर से बहाल किया गया हो. वे चुनाव कार्य में नहीं लगाये जायेंगे.

अब ऐसे में यह संभव तो है नहीं कि मुख्‍य सचिव और डीजीपी को चुनाव कार्यों से अलग रखा जाये. तो इस सूरत में ऐसी संभावना बढ़ गयी है कि बिहार को नया डीजीपी और झारखंड में नया मुख्‍य सचिव मिलेगा.

पहले यह बात चल रही थी कि बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में छह महीने का सेवा विस्तार दिया जाएगा. ठीक इसी तरीके से झारखंड के चीफ सेक्रेटरी सुधीर त्रिपाठी भी सेवा विस्तार में चल रहे हैं. पर चुनाव आयोग का पंगा नया फंस गया है.

16 जनवरी को भेजा निर्देश

चुनाव आयोग ने 16 जनवरी को देश के सभी मुख्य सचिवों के नाम एक दिशा-निर्देश भेजा है. चुनाव आयोग के प्रिंसिपल सेक्रेअट्री नरेन्द्र एन बुटोलिया के हस्ताक्षर से यह लेटर सभी मुख्य सचिवों को मिला है. इसके बाद से दोनों राज्यों के सरकारी महकमों में नयी चर्चा निकल पड़ी है. यह चिट्ठी पटना में प्राप्त हो चुकी है, झारखंड सरकार को भी मिली है.

इस चिट्ठी में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी ऐसा अधिकारी, जिन्हें सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) मिला हो या फिर से बहाल किये गए हों, वे चुनाव कार्य में नहीं लगाए जायेंगे. ऐसे में यह बात तो संभव नहीं है कि डीजीपी या चीफ सेक्रेटरी को चुनाव कार्यों से अलग रखा जा सकेगा. इस सूरत में अब इस बात की संभावना बढ़ गयी है कि बिहार को नया डीजीपी मिलेगा.

बिहार के वर्तमान डीजीपी केएस द्विवेदी को 31 जनवरी को ही रिटायर होना है. पर यह बात सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के आलोक में चल पड़ी थी कि उन्हें सेवा विस्तार मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में यह बात ‘बिहार पुलिस एक्ट’ के हवाले से कही गई थी कि डीजीपी का कार्यकाल दो वर्षों का होगा. पर चुनाव आयोग के इस नए निर्देश के बाद सरकार की मुश्किल बढ़ गयी है. अब जब चुनाव सामने है, और इसमें डीजीपी या चीफ सेक्रेटरी की बड़ी भूमिका होती है, तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने फैसले की घड़ी है.

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