झारखंड बजट 2019: चुनावी साल में इन वर्गों के लिए होंगे खास प्रावधान

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Ranchi: झारखंड का सालाना बजट सीएम रघुवर दास मंगलवार को सदन में पेश करेंगे. सीएम रघुवर दास विधानसभा पहुंचे, कुछ देर में झारखंड बजट 2019 पेश करेंगे. इससे पूर्व शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान बेवजह बहस करने पर स्पीकर दिनेश उरांव ने बाघमारा भाजपा विधायक ढुल्लू महतो को बाहर कर दिया.

इसके पहले मुख्‍यमंत्री ने बजट की प्रति राज्‍यपाल द्रौपदी मुर्मू, विधानसभा अध्‍यक्ष दिनेश उरांव और विपक्षी नेता हेमंत सोरेन को भेंट की.

बेवजह बहस के आरोप 

बजट पेश होने से थोड़ी देर पहले विस्थापन का मुद्दा उठाने के बाद बेवजह स्पीकर दिनेश उरांव से बहस करने के बाद बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो को सदन की कार्रवाई से मंगलवार को एक दिन के लिए बाहर कर दिया. स्पीकर ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मार्शल को बुलाया और बाघमारा विधायक को बाहर ले जाने के लिए कहा. महतो ने कहा कि 18 को उन्होंने मामला उठाया था जिसके बाद उन्हें इस मुद्दे पर बहस के लिए आज का वक्त दिया गया था. ढुल्लू महतो ने खुद को सदन से निकाले जाने पर कहा कि इस संबंध में वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. स्पीकर को जो अच्छा लगा, उन्होंने किया. ढुल्लू महतो ने कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं। वे जनता की आवाज उठाते रहेंगे. बीसीसीएल ने गरीब हरिजनों की जमीन अधिग्रहित कर ली. लेकिन न तो उन्हें मुआवजा मिला और न नौकरी. इस संबंध में उन्होंने 18 जनवरी की सदन की कार्यवाही में इस संबंध में सवाल उठाया था.

चुनावी वर्ष होने के कारण बजट जनता को राहत देने वाला और लोकलुभावन हो सकता है. रघुवर दास पांचवीं बार बजट पेश करेंगे. उनके पास ही वित्त विभाग भी है. बजट लगभग 85000 करोड़ रुपये का हो सकता है. इसमें शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, आधारभूत संरचना के विकास के अलावा स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़े आवंटन हो सकते हैं.

राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट को गरीबों व किसानों को समर्पित बजट के रूप में पेश कर सकती है. किसी भी तरह के नये टैक्स से परहेज किया जाएगा. जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दायरे को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख करने की घोषणा होगी. सरकार इस बार बाल बजट भी पेश करेगी.

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बजट में मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना, मुख्यमंत्री सुकन्या योजना, बेबी केयर किट वितरण योजना, किसानों को स्मार्ट फोन, आरोग्य कुंजी जैसी योजानाओं की घोषणा होगी. इस बार बजट आकार में वृद्धि के बजाय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर जोर रहेगा.

पिछले सात साल में राज्य में प्रति व्यक्ति आय में 32 प्रतिशत की वृद्ध दर्ज की गयी है. अर्थव्यवस्था में सबसे धीमी गति से विकास करनेवाले क्षेत्रों में कृषि, वानिकी और मत्स्य रहे. उत्पादन के क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन किया. हालांकि  बिजली, गैस और जलापूर्ति क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. विधानसभा में बजट से पूर्व पेश किये आर्थिक सर्वेक्षण में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिकूल माॅनसून सहित अन्य कारणों के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया. वर्ष 2015-16 में पड़े सूखे के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ.

पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2016-17 से 2018-19) के बीच राज्य की औसत विकास दर 8.2 प्रतिशत रही. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान स्थिर मूल्य पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2,21,587 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

इसी अवधि में ग्रास स्टेट वैल्यू एडिशन (जीएसवीए) के 1,82,893 करोड़ रुपये के होने का अनुमान है. पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति दर भी नियंत्रित रही. वर्ष 2015-16 में मुद्रास्फीति दर 5.3 प्रतिशत थी, जिसे वर्ष 2018-19 में घट कर तीन प्रतिशत होने का अनुमान है.

छह वर्षों के दौरान राज्य के कुल खर्च में ढाई गुना की वृद्धि

रिपोर्ट में राज्य की आर्थिक स्थिति और बजटीय खर्च का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पिछले छह वर्षों के दौरान राज्य के कुल खर्च में ढाई गुना की वृद्धि हुई है. वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2017-18 के बीच राज्य के कुल खर्च में कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 17.2 प्रतिशत था.

पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्थापना के बदले योजना मद में तेजी से राशि खर्च हुई है. स्थापना खर्च का सीएजीआर 12.2 प्रतिशत और योजना मद के खर्च का सीएजीआर 25.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है. वर्ष 2011-12 से 2017-18 के बीच राज्य के राजस्व में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में केंद्रीय राजस्व में राज्य का हिस्सा बढ़ा.

राज्य पर कर्ज वित्त आयोग द्वारा निर्धारित सीमा में रहा. हालांकि उदय योजना में लिये गये 5553.37 करोड़ के कर्ज की वजह से यह आयोग द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो गया.लेकिन चालू वित्तीय वर्ष में इस नियंत्रित रखा गया है. राज्य का राजकोषीय घाटा भी वित्तीय दायित्व और बजट मैनेजमेंट एक्ट(एफआरबीएम एक्ट) में निर्धारित सीमा के अंदर है.

विधानसभा में बजट से पूर्व पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण

प्रति व्यक्ति आय

32% की वृिद्ध दर्ज की गयी है सात साल में

औसत विकास दर

8.2% वर्ष 2011-12 से 2018-19 तक रही

राजस्व में वृद्धि

17% वर्ष 2011-12 से 2017-18 के बीच दर्ज

सबसे कम िवकास

कृषि, वानिकी व मत्स्य क्षेत्र

में िवकास की गति सबसे कम

कुल खर्च में वृद्धि

2.5 गुना वृद्धि दर्ज हुई छह वर्ष में

मुद्रास्फीति

03% तक रहने का अनुमान चालू वित्तीय वर्ष के दौरान

विकास योजनाओं पर दिसंबर तक 50% भी राशि खर्च नहीं

चालू वित्तीय वर्ष के दौरान विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं की गयी है. योजना विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तक सरकार के विभिन्न विभागों ने तय लक्ष्य का सिर्फ 44.05 प्रतिशत राशि ही खर्च की है.

राज्य सरकार ने 2018-19 के दौरान विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए 46503 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. हालांकि दिसंबर तक सभी विभागों ने 20482.51 करोड़ रुपये ही खर्च किये हैं. सरकारी आकड़ों के अनुसार, कृषि व संबद्ध क्षेत्र के लिए कुल 2575.00 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान है. इसमें से दिसंबर तक 375.66 करोड़ रुपये ही खर्च किये गये हैं. खर्च की गयी यह रकम बजट प्रावधान के मुकाबले सिर्फ14.04 प्रतिशत है.

वन पर्यावरण,स्वास्थ्य, विज्ञान प्रावैधिकी और उच्च शिक्षा मद में कुल 4308 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसके मुकाबले 1499.58 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.

यानी इन क्षेत्रों के लिए निर्धारित राशि में से 34.80 प्रतिशत राशि ही खर्च करने में कामयाबी मिली है.गृह,कारा और आपदा प्रबंधन विभाग ने 631 करोड़ में से 530.60 करोड़ रुपये खर्च किया है. यह संबंधित विभाग के लिए निर्धारित राशि का 84.01 प्रतिशत है. ग्रामीण विकास व संबद्ध क्षेत्र ग्रामीण कार्य और पंचायती राज के लिए 11121 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसमें से 6270.14 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कल्याण विभाग ने 41.28 प्रतिशत और समाज कल्याण ने 50.74 प्रतिशत राशि खर्च की है. नगर विकास विभाग ने 2667.85 करोड़ रुपये में से 482.48 करोड़ रुपये खर्च किये हैं, जो 17.43 प्रतिशत है. श्रम नियोजन विभाग ने 215 करोड़ में से सिर्फ 25.63 करोड़ रुपये की खर्च किये हैं. यानी श्रम विभाग ने 11.92 प्रतिशत राशि खर्च करने में कामयाबी हासिल की है.

विभाग  राशि (करोड़ में)

कृषि 1625.00 236.83

पशुपालन 265.00 7.79

भवन निर्माण 571.00 292.71

नागर विमानन 120.00 00.00

सहकारिता 345.00 55.52

ऊर्जा 3460.00 1439.98

उत्पाद 5.00 00.00

खाद्य आपूर्ति 1300.00 511.01

वन पर्यावरण 410.00 154.74

स्वास्थ्य 2600.00 580.64

उच्च शिक्षा  523 80.49

गृह  210 320.09

उद्योग  425.00 147.97

पीआरडी 70.00 38.64

श्रम नियोजन 215.00 25.63

खान भूतत्व 40.00 4.78

अल्पसंख्यक कल्याण 93.00

योजना विकास 639.00 227.93

पेयजल  2085.00 1004.90

आपदा प्रबंधन 421.00 210.51

राजस्व भू सुधार 115.00 68.80

पथ निर्माण  4000.00 2906.74

ग्रामीण विकास 6500.00 3311.57

विज्ञान प्रावैधिकी  775.00 283.71

सूचना प्रावैधिकी  190.00 84.84

पर्यटन 160.00 41.77

परिवहन 147.00 15.55

नगर विकास  2767.85 482.48

जल संसाधन 2100.00 739.49

कल्याण  1806.00 745.53

कला संस्कृति 110.00 28.54

मत्स्य  125.00 35.34

डेयरी 315.00 40.18

आरइओ 3200.00 2341.17

पंचायती राज 1421.00 617.40

आवास 32.15 00.00

शिक्षा  894.75

प्राथमिक शिक्षा 4000.00 1274.01

समाज कल्याण 3400.00 1725.09

 

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