झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन कितना ताकतवर

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Ranchi: झारखंड के गठन के बाद से अब तक गठबंधन की सरकार ही बनी है. अब एक बार फिर से विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनाव लड़ने के लिए एनडीए तैयार है. वहीं विपक्षियों का महागठबंधन बिखरा पड़ा है. कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्‍व नामंजूर कर चुका है. झारखंड विकास मोर्चा सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा वामदलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटा हुआ है.

कुछ महीने पहले लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान विपक्षी एकजुट हुए और महागठबंधन का स्‍वरूप तय हुआ. इसमें वामपंथी दलों को छोड़ झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा मुख्‍य रूप से शामिल हुए. कांग्रेस के तत्‍कालीन प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ अजय कुमार और झामुमो के कार्यकारी अध्‍यक्ष हेमंत सोरेन के कीच तय हुआ कि लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ा जाएगा और विधानसभा चुनाव झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ा जाएगा. इसी डील के तहत झारखंड में ज्‍यादा सीट पर चुनाव लड़ा गया.  

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे जब आए तब महागठबंधन का अनुभव बहुत बुरा रहा. कांग्रेस सिर्फ एक सीट पर ही जीत सकी.

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद डॉ अजय कुमार पर उन्‍हीं के पार्टी वालों ने कई आरोप लगाये गये. उस पूरे प्रकरण के बाद उन्‍होंने आम आदमी पार्टी ज्‍वाइन कर ली. अब हेमंत सोरेन वह डील राहुल गांधी को याद दिलाना चाहते हैं जो डॉ अजय के समय हुआ था. इधर राहुल गांधी खुद कांग्रेस की अध्‍यक्ष पद छोड़ चुके हैं.

झारखंड में बीजेपी के खिलाफ लड़ने वाली महागठबंधन एकजुट होता नहीं दिख रहा है. राहुल गांधी को झारखंड के विधानसभा चुनाव या राजनीति से कोई मतलब रह नहीं गया है. कांग्रेस और झामुमो के बीच जिसके साथ डील हुआ वो अजय कुमार दूसरे पार्टी में चले गये हैं. कांग्रेस के मौजूदा नेता डॉ अजय कुमार के डील को मानने को तैयार नहीं हैं.

झारखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल मरांडी राज्‍य के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं. वह घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी प्रदेश के सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ऐसे में लोकसभा चुनाव 2019 में जिस तरह महागठबंधन बीजेपी के खिलाफ तैयार हुई थी. वैसे ही झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के लिए महागठबंधन का पुनर्गठन की राह आसान नहीं दिख रहा है.  

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