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Jharkhand: 24 घंटे बिजली का था वादा, मिल रही 12 घंटे

मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के ड्रीम प्रोजेक्‍ट पर अफसर-एजेंसी की लापरवाही से झारखंड में अंधेरा

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Ranchi: झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में 24 घंटे क्‍वालिटीयुक्‍त बिजली (24 Hrs Electricity) उपलब्‍ध कराने के लिए साल 2017 में बिजली अपग्रेडेशन का काम शुरू किया गया. लेकिन इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंड के अफसर और इस स्‍कीम को पूरा करने वाली एजेंसी पॉलीकैब बर्बाद करने मे जुटी है.

मुख्‍यमंत्री रघुवर दास (Raghubar Das) का स्‍पष्‍ट निर्देश है कि राज्‍य के हर घर में 24 घंटे बिजली बहाल किया जाये. इसके बावजूद इस पर बिजली से जुड़ अफसर और एजेंसी नाकाम रहे हैं. फुल प्रुफ प्‍लान के अभाव में राजधानी रांची में 12 घंटे ही बिजली बहाल हो पा रहा है. बाकी 12 घंटे लोकल फॉल्‍ट और ओवरलोड के कारण बिजली काटी जा रही है.

24 घंटे बिजली की योजना

योजना साल 2013 की है. 2013 में केंद्र सरकार ने इस योजना को अप्रूव किया. सारी फॉर्मलिटीज पूरी करते-करते तीन साल गुजर गये. कहने का मतलब की शुरू के तीन सालों में काम शुरू भी नहीं हो सका.

आखिरकार सभी फॉर्मलिटीज अप्रैल 2016 को पूरा कर लिया गया और वर्क ऑर्डर पॉलीकैब कंपनी (Polycab Wire ltd) को एलॉट कर दिया गया. इसके बाद अगस्‍त 2017 में काम जमीनी स्‍तर पर शुरू हुआ. अक्‍टूबर 2018 तक काम को पूरा कर लेने का टारगेट दिया गया.

समय पर काम पूरा नहीं हुआ. बिजली का काम पूरा करने का टारगेट बढ़ाकर फरवरी 2019 कर दिया गया. अब भी काम अधूरा रह गया. बिजली विभाग में बहुत सारे काम अधूरा होने का हवाला देकर फिर एक मौका मार्च 2019 तक दिया गया.

पेपर पर काम पूरा

पेपर में पॉलीकैब कंपनी अपना काम पूरा दिखा रहा है. पर अभी भी जमीन पर कई काम अधूरे हैं. जिसकी वजह से लोकल फॉल्‍ट और ओवरलोड की समस्‍या बनी हुई है. लोगों को 12 घंटे तक पावर कट की समस्‍या से जूझना पड़ रहा है.

ऑन पेपर में कंपनी का दावा है कि 11 केवी और 33 केवी अंडर केबल बिछाने का काम पूरा कर लिया गया. जबकि हकीकत यह है कि 11 केवी को ट्रांसफार्मर से और 33 केवी को फीडर से कनेक्‍ट नहीं किया गया.

पॉलीकैब कंपनी का यह भी दावा है कि 17 सौ से अधिक ट्रांसफॉर्मर लगाये गये. लेकिन हकीकत में उसे चार्ज करके शुरू नहीं किया जा सका है.

कंपनी का कहना है कि लोड कंभर्ट करने के लिए कई अलग फीडर से जोड़ने का काम किया गया.  लेकिन पहाड़ी फीडर को मधुकम से अलग करने का काम अब तक पूरा नहीं किया गया.

कंपनी का दावा है कि 9 नये सब स्‍टेशन बनाये गये. हकीकत यह है अब तक इन्‍हें शुरू नहीं किया गया.

इस तरह कई और छोटे-छोटे काम इस योजना के तहत किये गये. लेकिन, अब तक फिनिशिंग टच नहीं दिये जाने के कारण फेज उड़ना, जंफर जलना, तार गिरना, ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने जैसे  लोकल फॉल्‍ट के कारण घंटों बिजली कट रही है.

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