झारखंड में महिलाओं को मिलनेवाले सौर उर्जा पम्प से खेती किसानी में आये नयी क्रांति

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Ranchi:“महिलाओं के लिए सौर उर्जा पम्प: उर्जा, जल और कृषि को उन्नत करने की दिशा में कदम”  विषय पर आज रांची में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई. इस बैठक में सभी संबंधित अंशधारक उपस्थित थे. इस बैठक का आयोजन झारखण्ड राज्य नवीकरणीय उर्जा विभाग (जेआरईडीए) ने स्विच ऑन फाउण्डेशन के साथ मिलकर किया था जिसे ब्रिटेन की एफसीडीओ द्वारा संचालित पीएसआर कार्यक्रम तहत समर्थन दिया गया था.  

झारखण्ड राज्य नवीकरणीय उर्जा विभाग (जेआरईडीए)

2019 में शुरु किये गये प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत राज्य में सोलर वॉटर पम्प वितरित करने का कार्यक्रम बड़ी सघनता से संचालित कर रहा है. प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत भारत सरकार ने 2019 में लक्ष्य निर्धारित किया है कि देशभर में 20 लाख आत्मनिर्भर सौर उर्जा पम्प स्थापित किये जाएंगे. भारत सरकार की योजना है कि खेती में सौर उर्जा के प्रयोग से जहां किसानों को दिन में भराई सिंचाई करने का मौका मिलेगा वहीं सरकार द्वारा उर्जा पर दी जा रही सब्सिडी में कमी भी आयेगी. इसके साथ ही खेती में कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा. 

वर्तमान में केन्द्र सरकार की योजना 2019-

20 के अंतर्गत झारखण्ड के लिए 10 हजार सोलर वाटर पम्प का कोटा दिया गया है. जेआरईडीए ने एक कदम आगे बढ़कर महिलाओं को खेती में सौरउर्जा पम्प देने का निश्चय किया. जेआरईडीए का मानना है कि सोलर वाटर पम्प योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जो योजना चलाई गयी उसने पूरी तरह से काम किया है. आज इस योजना का लाभ पाने वाली महिलाएं महसूस करती हैं कि वो अपने पुरुष साथी के साथ बराबर की भागीदार हैं. 


सम्मेलन की शुरुआत में अपना मुख्य भाषण देते हुए जेआरईडीए के निदेशक श्री के के वर्मा ने कहा कि “इस बात की तत्काल आवश्यकता है कि खेती किसानी के लिए जो उर्जा की जरूरत है उसे सौर उर्जा पर स्थानांतरित किया जाए. इस दिशा में जो क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहा है उसमें जेआरईडीए महिलाओं को राजदूत की भूमिका में प्रस्तुत कर रहा है.” अपने वक्तव्य में उन्होंने आगे कहा कि “सौर उर्जा से हम आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ ले सकते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. आज समय की मांग है कि हम सौर उर्जा की ओर खेती किसानी को अग्रसर करें. इस दिशा में आत्मनिर्भर सौर उर्जा वाटर पम्प महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रयास साबित हो रहा है. जेआरईडीए राज्य में ऐसे 4 लाख आत्मनिर्भर सौर वाटर पम्प लगाने के लिए कृतसंकल्पित है.” 

फूड एण्ड एग्रीकल्चर (एफओए) के मुताबिक वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में 7 करोड़ महिलाएं कार्यरत हैं और कुल खाद्यान्न उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत है जबकि संसाधनों पर सिर्फ 13 प्रतिशत महिलाओं का ही अधिकार है. अगर महिलाओं की संसाधन में पुरुषों के बराबर कर दिया जाए तो खाद्यान्न उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़त हो सकती है. 

झारखण्ड सरकार ने कृषि संसाधनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सोलर वाटर पम्प के आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया है. इस प्रोत्साहन का खास लाभ उन महिलाओं को मिला है जिनके नाम पर कोई जमीन नहीं है. झारखण्ड सरकार ने ऐसी महिलाओं के लिए योजना बनायी है कि वो एफिडेविट के साथ आवेदन कर सकती हैं और उनके आवेदन को प्राथमिकता के स्तर पर देखा जाएगा. 


समारोह के समापन पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए डीएफआईडी के उर्जा सलाहकार और पीएसआर कार्यक्रम को भी संचालक उदित माथुर ने कहा कि“कृषि क्षेत्र में स्वच्छ उर्जा के लिए अनंत संभावनाएं हैं. यह वक्त की मांग है कि हम इन संभावनाओं का दोहन करें. आज कृषि क्षेत्र के भीतर स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक जबरदस्त अवसर है, हमें इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाना चाहिए. योजना के बारे में महिलाओं की जागरूकता और वित्त तक पहुंच पर ध्यान केंद्रित करके हम कार्यक्रम को और अधिक समावेशी बना सकते हैं, जिससे महिला किसानों के लिए कई प्रकार के विकासात्मक लाभ को बढ़ाया जा सकता है.”  

इस अवसर पर कई चैम्पियन महिलाएं भी मौजूद थीं जिन्होंने इस सोलर वाटर पम्प का लाभ उठाया है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना के लाभार्थी किसान तथा भागीदार भी उपस्थित रहे. 

इस मौके पर बोलते हुए स्विचऑन फाउण्डेशन के एमडी श्री विनय जाजू ने कहा कि“हम झारखण्ड सरकार के नेतृत्व में सेवा नेटवर्क के जरिए काम करके बहुत प्रसन्न हैं जो कि राज्य में सोलर वाटर पम्प,  जल संरक्षण तथा  टिकाऊ खेती के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं. हम अपनी विभिन्न परियोजनाओं में जेआरईडीए के साथ मिलकर जमीन पर प्रामाणिक कार्य करना चाहते हैं. हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि झारखण्ड सरकार की योजनाओं के अनुरुप सीमांत महिला किसानों तक सतत विकास का लाभ पहुंचाया जाए.” 

सेवा नेटवर्क: कृषि, उर्जा और जल के लिए समर्पित

सेवा नेटवर्क पूर्वी भारत के तीन राज्यों में कार्यरत हैं. ये राज्य हैं झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा. इन राज्यों में सेवा नेटवर्क कृषि, जल और उर्जा संवर्धन के साथ साथ इस क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और किसान के जीवनयापन को केन्द्र में रखकर काम कर रहा है. झारखण्ड में इस समय हमारे 10 सक्रिय सिविल सोसायटी सहयोगी हैं. सेवा नेटवर्क सौर उर्जा तथा सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को केन्द्र में रखकर कृषि में सामूहिकता तथा पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहा है.

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