JBVNL ने कहा- लक्ष्‍य में फेल हुए तो क्या हुआ, फिर भी Electricity Tariff बढ़ायेंगे

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Ranchi: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) की ओर से झारखंड विद्युत राज्‍य नियामक आयोग को रांची में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में बताया गया कि दिसंबर 2018 तक राज्‍य के हर घर में बिजली पहुंच चुकी है. कृषि फीडर को मजबूत किया गया है. बीते तीन सालों में बिजली सप्‍लाई को सुदृढ़ किया गया है.

सुधार के लक्ष्‍य में फेल

JBVNL  के अधिकारी एसके ठाकुर ने नियामक आयोग को बताया गया कि बिजली का आधुनिकीकरण का काम जारी है. जो मार्च 2019 तक पूरा करा लिया जाएगा. बताया गया कि सभी ग्राहकों के लिए मीटर की व्‍यवस्‍था की गयी है. नियामक आयोग को बताया गया कि कई कारणों से मीटर लगाने का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका है.

बताया गया कि बिलिंग का काम एंड्रायड से हो रहा है. भविष्‍य में सेल्‍फ बिलिंग का काम भी होगा. इस पर आईटी विभाग के द्वारा काम किया जा रहा है. बिजली लॉस को कम करने में राष्‍ट्रीय स्‍तर के पैमाने से अभी भी दूर हैं. बिजली चोरी रोकने के लिए काम चल रहा है. पुराने सिस्‍टम से आईटी सिस्‍टम की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. इसमें हमें दिक्‍कतें भी आ रही हैं. फिर भी कर रहे हैं.

जेबीवीएनएल ने ये माना कि पूर्व में ऑडिट का काम ठीक से नहीं हो रहा था. कई सालों से ऑडिट लंबित था. इस बार नवंबर में ही ऑडिट का काम पूरा करके जमा कर दिया गया है.

पहले कई तरह के कैटगरी थे. लोगों को समझने में परेशानी होती थी. उन सभी को हटाकर सिर्फ 5 कैटेगरी तय किये गये हैं. ग्रामीण और शहरी कैटेगरी को एक कर दिया गया है और एक जैसा दर तय किया गया है.

अभी कुल मिलाकर 11 हजार 813.1 करोड़ का रेवेन्‍यू गैप है. इसे ही पूरा करने के लिए बिजली की दर बढ़ाने की जरूरत है.

वहीं दूसरी ओर झारखंड के बिजली उपभोक्ताओं ने JBVNL की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया. लोगों के सवालों का जवाब JBVNL के पास भी नहीं था. सभी ने एक सिरे से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के दावों की पोल खोल कर रख दी और दर बढ़ोतरी के प्रस्‍ताव को नकार दिया.

घरेलू से लेकर व्यावसायिक उपभोक्ताओं ने कहा कि व्यवस्था में सुधार के बाद ही नयी बिजली दर के बारे में सोचना चाहिए. यह बिजली दर नहीं, दर्द का निर्धारण हो रहा है. वितरण निगम साल दर साल दर्द देता रहेगा और हर साल दर का भी निर्धारण होता रहेगा. ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे में सिर्फ दो से चार घंटे ही बिजली रहती है. खराब बिजली व्यवस्था का खामियाजा उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ता है. अफसरों के वेतन से तो इसका पैसा कटता नहीं. बिजली वितरण निगम पहले अपनी खामियों को सुधारे.

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इंडस्ट्रीज नहीं, तो सरकार नहीं

झारखंड इंडस्ट्रीज ट्रेड एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि दो स्टील प्लांट हैं. हर माह तीन करोड़ बिजली बिल चुकाता हूं. एचटीएसएस कैटेगरी में 43 स्टील प्लांट हैं. 900 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश इन प्लांटों में हुआ है. हर माह इन प्लांटों से 50 करोड़ रुपये बिजली बिल दिया जाता है. अगर एचटीएसएस कैटेगरी को हटाया गया, तो सभी प्लांट बंद हो जायेंगे. 900 करोड़ से अधिक की पूंजी बर्बाद हो जायेगी. बिजली, इनकम टैक्स और जीएसटी से जो सरकार को लगभग 200 करोड़ रुपये मिलते हैं, वह भी बंद हो जायेंगे. 10 हजार से अधिक लोग बेरोजगार हो जायेंगे. अगर वितरण निगम अपना प्लांट लगाये, तो 2.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी. उद्योगपति वीरेंद्र राय ने भी कहा कि हर माह 2.25 करोड़ रुपये बिजली बिल देते हैं. वितरण कंपनी ने रिबेट ही खत्म कर दिया है. इंडस्ट्रीज नहीं चलेंगी, तो सरकार भी नहीं चलेगी.

JBVNL पर कोई असर नहीं

अजय भंडारी ने कहा कि बिजली वितरण निगम झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग  का आदेश भी नहीं मानता है. छह-छह महीने तक बिल नहीं मिलता है. यह दर नहीं, दर्द का निर्धारण हो रहा है. साल दर साल दर्द देते रहेंगे और दर का निर्धारण होता रहेगा. हर बार टैरिफ निर्धारण के समय वितरण निगम को कई शर्तों के साथ दिशा-निर्देश भी दिये जाते हैं, उसमें से अधिकांश का अनुपालन नहीं होता. साल दर साल जनसुनवाई होती रहेगी. आयोग निर्देश देता रहेगा, पर वितरण निगम पर कोई असर नहीं पड़नेवाला. सिक्यूरिटी डिपोजिट का भी ब्याज नहीं मिलता है. एपीडीआरपी, अंडरग्राउंड केबलिंग और न जाने कितनी योजनाएं, उम्मीद पर उम्मीद. हमलोगों का पैसा लगता है, अफसरों के वेतन से तो पैसा कटता नहीं. आयोग जो भी दर तय कर ले, लेकिन बिजली वितरण निगम पर कोई असर नहीं होनेवाला है.

दो से चार घंटे ही बिजली

चान्हो के ओम प्रकाश ने कहा कि किसान का बेटा हूं. चान्हो में छोटा-मोटा उद्योग चला रहा हूं. 24 घंटे में मुश्किल से दो से चार घंटे ही बिजली मिलती है. सारी कमाई जेनरेटर खर्च में चली जाती है. गांव में बिजली की स्थिति शहरों जैसी होनी चाहिए. ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी हाल में बिजली दर नहीं बढ़नी चाहिए. बिजली की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए. फ्यूज उड़ जाने पर 24 घंटे इंतजार करना पड़ता है. फ्यूज तार भी उपलब्ध नहीं है. लाइनमैन और ऑपरेटर भी नहीं हैं. गांव के लोगों को आगे बढ़ने दिया जाये.

रात को मिलती है बिजली

मांडर के विनोद तिग्गा ने कहा कि जब रात में सो जाते हैं, तब बिजली मिलती है. दिन में बिजली के दर्शन नहीं होते. ऐसे में खेती-बारी कैसे करेंगे. बिजली नहीं रहने के कारण शाम में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं. बिजली का रेट बढ़ेगा, तो हम ग्रामीण बिल देने में सक्षम नहीं हो पायेंगे. गांव में जैसे खेती के लिए बारिश का इंतजार करते हैं, उसी तरह हमलोग रोज बिजली का भी इंतजार करते हैं.

झुग्‍गी का दर मत बढ़ाइए

चान्हो से जिला परिषद सदस्य हेमलता उरांव ने कहा कि बिजली वितरण निगम सही तरीके से सेवा नहीं देता. झोपड़ी में रहनेवालों पर तरस खाइये. एक साल में बिल बढ़ा दिया जा रहा है. किसान खेती-बारी करना छोड़ देगा, तो शहर के लोगों को अनाज का एक दाना भी नहीं मिलेगा. अंग्रेजी में ऐसा प्रेजेंटेशन दिया गया कि ग्रामीण समझ नहीं पाये. अपनी राम कहानी कहकर निकल गये. जनता के बीच जाकर पूछना चाहिए. विभाग पहले अपना बुनियादी ढांचा मजबूत करे. जो बड़ी एजेंसी गांव में काम कर रही है, उसके कामों को भी अफसर देखने नहीं जाते. न अर्थिंग सही तरीके से हो रही है और न ही सही तरीके से तारों को जोड़ा जा रहा है. समय पर बिल देंगे, तो लॉस खुद कम हो जायेगा. इससे पहले वितरण निगम को अपनी कमियों को सुधारना होगा.

खेतीबारी मुश्‍किल

मांडर के रामू उरांव ने कहा कि बिजली नहीं होने के कारण पूरा देहात खत्म हो गया. 24 घंटे में सिर्फ दो से चार घंटे ही बिजली मिलती है. दिन में बिजली का नाम ही नहीं रहता. शाम सात बजे के बाद फिर गायब. खेती-बारी करना मुश्किल हो गया है. बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है.

पढ़ाई नहीं हो रही

विद्या कुमारी (छात्रा) ने कहा कि इतनी बार बिजली कटती है कि पढ़ाई करने का लय टूट जाता है. हमलोगों का इंस्टीट्यूट नामकुम में है. वहां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं. नामकुम में सबसे अधिक पावर कट होता है. लालटेन और मोमबत्ती जलाना पड़ता है. लैपटॉप और मोबाइल से भी काम नहीं कर पाते. इसे भी चार्ज करने के लिए बिजली चाहिए. वहीं, सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि डीपीएस (डिले पेमेंट सरचार्ज) का भार उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा.

चैरिटेबल सोसाइटी की डिमांड

योगदा सत्संग सोसाइटी के भास्करानंद ने कहा कि चैरिटेबल सोसाइटी के लिए बिजली दर का अलग से प्रावधान होना चाहिए. हमलोगों का प्रिंटिंग मशीन,  हॉस्पिटल आदि चलते हैं. 50 केवीए का लोड है. चैरिटेबल संस्थाओं के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए. इस पर नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि नेट मीटरिंग रेगुलेशन देख लें. सोलर एनर्जी स्थापित करें. ज्यादा बिजली उत्पादन होने पर चार रुपये प्रति यूनिट की दर से आपको राजस्व प्राप्त होगा.

कैग से ऑडिटेड नहीं है एकाउंट

सीए अशोक बियानी ने कहा कि वितरण निगम का 2017-18 का एकाउंट कैग से भी ऑडिटेड नहीं है. इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. एकाउंटिंग स्टैंडर्ड का उल्लंघन हुआ है. 5127 करोड़ रुपये का कैपेक्स भी बिजनेस प्लान में शामिल नहीं किया गया है. वितरण निगम पावर परचेज के अंदर डीपीएस दिखा रहा है और इसका जिम्मेदार नियामक आयोग को ठहरा रहा है.

JBVNL का दावा

बिजली वितरण निगम की ओर से पावरप्वॉइंट प्रेजेंटेशन देते हुए चीफ इंजीनियर सुनील कुमार ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण विद्युतीकरण 100 फीसदी, हर घर में बिजली 100 फीसदी, शहरी क्षेत्रों के हर घर में 100 फीसदी बिजली पहुंचा दी गयी है. प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 628 यूनिट है. एटीएंडसी लॉस 31.67 फीसदी है. कृषि फीडर अलग किया जा रहा है. 48 नये पावर स्टेशन जोड़े गये हैं. 59 पावर स्टेशनों की क्षमता बढ़ायी गयी है. 190 नये पावर स्टेशन को जोड़ने का काम हो रहा है. ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता 4912 एमवीए की गयी है. 12 हजार ट्रांसफॉर्मर बदले गये हैं. इस बार बिजली दर को सिर्फ पांच कैटेगरी में रखा गया है. रेवेन्यू गैप 11813.1 करोड़ रुपये है.

नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद और सदस्य तकनीक ने उपभोक्ताओं की बातों को सुना. वितरण निगम की ओर से चीफ इंजीनियर सुनील कुमार ठाकुर ने प्रेजेंटेशन दिया.

 

 

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