60 हजार पारा शिक्षकों की नौकरी रहेगी या छूटेगी, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो आज लेंगे बड़ा फैसला

Ranchi: झारखंड में 60 हजार पारा शिक्षकों की नौकरी रहेगी या छूट जाएगी, इस पर आज झारखंड सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है. पारा शिक्षकों के लिए प्रस्तावित सेवा शर्त नियमावली की आपत्ति पर झारखंड की नई हेमंत सरकार विचार कर रही है. इसके लिए नए शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की अध्‍यक्षता में सचिवालय में बैठक की जा रही है. झारखंड पारा शिक्षक नियमावली 2019 पर 3367 आपत्तियां दर्ज करायी गयी थीं.

परियोजना ने पारा शिक्षकों द्वारा नियमावली पर दर्ज करायी गयी आपत्तियों की रिपोर्ट तैयार की है. आज पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली व इस पर दर्ज आपत्तियों पर विचार के लिए शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की अध्यक्षता में बैठक हो रही है. शिक्षा मंत्री की इस बैठक में पारा शिक्षकों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं. इसमें भाग लेने के लिए संजय कुमार दुबे, प्रद्युमन कुमार सिंह, ऋषिकेश पाठक, बिनोद बिहारी महतो, प्रमोद कुमार, नरोत्तम सिंह मुंडा, मोहन मंडल व दशरथ ठाकुर को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

झारखंड पारा शिक्षक नियमावली 2019

पूर्व की रघुवर सरकार के नयी नियमावली के तहत वेतनमान (मानदेय के समतुल्य) के लिए पारा शिक्षकों को सीमित आकलन परीक्षा देनी होगी. परीक्षा पास करनेवाले पारा शिक्षक ‘सहायक शिक्षक’ कहलायेंगे. परीक्षा पास करनेवाले शिक्षकों को ही वेतनमान दिया जायेगा.

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पहली से पांचवीं कक्षा और छठी से आठवीं कक्षा के लिए अलग-अलग दो स्तर पर परीक्षाएं होंगी. पहली परीक्षा का प्रश्न पत्र बहुविकल्पीय होगा, जबकि दूसरी परीक्षा लिखित होगी.

दूसरी परीक्षा विषय आधारित होगी. परीक्षा का माध्यम हिंदी व अंग्रेजी होगा. परीक्षा का प्रश्न पत्र एनसीइआरटी/सीबीएसइ एवं राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम के अंतर्गत सिलेबस पर आधारित होंगे.

प्राथमिक कक्षा के प्रश्न की कठिनाई का अधिकतम स्तर माध्यमिक या समकक्ष व उच्च प्राथमिक कक्षा के प्रश्न की कठिनाई का अधिकतम स्तर टेन प्लस टू/उच्चतर माध्यमिक या समकक्ष होगा. पारा शिक्षक प्रस्तावित नियमावली पर दस नवंबर तक अपनी आपत्ति दे सकते हैं.
60 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा

सीमित आकलन परीक्षा पास करने के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग/आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग व दिव्यांग अभ्यर्थियों को अंक में पांच फीसदी की छूट दी जायेगी. किसी भी परिस्थिति में प्राप्तांक में पांच फीसदी से अधिक की छूट नहीं दी जायेगी. आदिम जनजाति के अभ्यर्थियों को दो फीसदी की अतिरिक्त छूट दी जायेगी. परीक्षा में पास होने के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति का दावा मान्य नहीं होगा.

नयी नियमावली पर िशक्षकों से 10 नवंबर तक मांगी गयी आपत्ति

सीमित परीक्षा पास करनेवाले पारा शिक्षक अब ‘सहायक शिक्षक’ कहे जायेंगे
पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं तक के लिए होगी अलग-अलग परीक्षाएं
शिक्षक की श्रेणी वर्तमान पास होने के ग्रेड पे 12वर्ष की सेवा 24 वर्ष की सेवा
मानदेय बाद वेतनमान के बाद ग्रेड पे के बाद ग्रेड पे
प्रशिक्षित एवं टेट पास 15000 5200-20200 2400 2800 4200
केवल प्रशिक्षित 13000 5200-20200 2000 2400 2800
प्रशिक्षित एवं टेट पास 14000 5200-20200 2000 2400 2800
केवल प्रशिक्षित 12000 5200-20200 1900 2000 2400

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परीक्षा पास नहीं करनेवालों का कांट्रैक्ट समाप्त होगा

परीक्षा हर साल होगी. एक पारा शिक्षक को अधिकतम दो आकलन परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जायेगा. प्रथम परीक्षा आयोजन के तीन वर्ष के अंदर दोनों अवसरों का उपयोग करना अनिवार्य होगा.

परीक्षा में असफल होने पर पारा शिक्षकों का कांट्रैक्ट समाप्त कर दिया जायेगा. परीक्षा पास करनेवालों को वेतनमान दिया जायेगा. वेतनमान पर प्रति वर्ष राज्य सरकार के कर्मियों की भांति महंगाई भत्ता देय होगा. पारा शिक्षकों के द्वारा प्रत्येक वर्ष की संतोषप्रद सेवा के आधार पर तीन प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि भी दी जायेगी.

60 साल तक दे सकेंगे सेवा

पारा शिक्षक की सेवा संतोषप्रद रहने पर वे अधिकतम 60 वर्ष तक अपनी सेवा दे सकेंगे. महिला शिक्षकों को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जायेगा. पारा शिक्षकों को वर्ष में अधिकतम 16 दिनों का आकस्मिक अवकाश मिलेगा.

परीक्षा का स्वरूप
कक्षा एक से पांच
प्रथम पाली
विषय पूर्णांक
बाल विकास 30
एवं शिक्षण पद्धति
भाषा-हिंदी 30
भाषा-अंग्रेजी 30
क्षेत्रीय भाषा 30
संस्कृत/उर्दू सहित
पर्यावरण 20
द्वितीय पाली
अंग्रेजी भाषा की समझ 50
एवं निष्कर्ष आधारित प्रश्न
गणित 50
कक्षा छह से आठ
प्रथम पाली
विषय पूर्णांक
बाल विकास एवं 50
शिक्षण पद्धति
भाषा-हिंदी 50
भाषा-अंग्रेजी 50
द्वितीय पाली
विज्ञान शिक्षक 100

गणित, विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान व वनस्पति शास्त्र में से कोई दो)
सामाजिक विज्ञान शिक्षक 100

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इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, नागरिक शास्त्र में से कोई तीन
भाषा शिक्षक 100 अंग्रेजी, हिंदी/संस्कृत/उर्दू/ अन्य भाषा

पारा शिक्षकों ने नियमावली पर दर्ज की आपत्ति

  • पारा शिक्षकों ने कहा है कि प्रस्तावित झारखंड पारा शिक्षक नियोजन सह सेवाशर्त नियमावली हूबहू लागू की जाती है तो 65 हजार पारा शिक्षकों में से 60 हजार की नौकरी चली जाएगी.
  • सीमित आकलन परीक्षा में असफल होने पर भी पारा शिक्षकों की संविदा समाप्त नहीं की जाये, उन्हें वर्तमान व्यवस्था के तहत बनाये रखा जाये.
  • विधिवत चयनित व संविदा के शर्त का उल्लंघन नहीं करने के प्रावधान के जगह राज्य में कार्यरत सभी पारा शिक्षक किया जाये.
  • प्रशिक्षण के आठ वर्ष के बदले विद्यालय में नियुक्ति से आठ वर्ष की सेवा पूर्ण होने का प्रावधान किया जाये.
  • प्रशिक्षित पारा शिक्षक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात दस वर्ष की अटूट सेवा के प्रावधान को समाप्त करना.
  • सीमित आकलन परीक्षा के स्वरूप में बदलाव करना सीमित आकलन परीक्षा दो की जगह एक चरण में लिया जाये.
  • परीक्षा मात्र सौ अंक की हो और 30 अंक लाने वाले पारा शिक्षक को पास घोषित किया जाये, वर्तमान में पास मार्क्स 60 रखा गया है.
  • सीमित आकलन परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम पांच अवसर दिये जायें.
  • विद्यालय में 90 फीसदी विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के बदले यह प्रावधान किया जाये कि अधिक से अधिक उपस्थिति हो.

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