Take a fresh look at your lifestyle.

ISRO ने छोड़े PSLV-C43 के जरिए 8 देशों के 30 सैटलाइट, 23 सेटेलाइट अमेरिका के

0 1

New Delhi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल PSLV-C43 की मदद से गुरुवार सुबह भारत के हाइपरस्‍पेक्‍ट्रल इमेजिंग सैटलाइट और 8 देशों के 30 अन्‍य सैटलाइट छोड़े, इनमें से 23 सेटेलाइट अमेरिका के हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, उल्टी गिनती बुधवार की सुबह 5.58 बजे शुरू हुई. 30 अन्य उपग्रहों का कुल वजन 261.5 किलोग्राम है.

इसरो ने बताया कि आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से गुरुवार को सुबह नौ बजकर 58 मिनट पर अंतरिक्षयान पीएसएलवी-सी43 का प्रक्षेपण हुआ. यह पीएसएलवी-सी43 अभियान का प्राथमिक उपग्रह है. पीएसएलवी इसरो का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है.

पांच साल होगी आयु

पीएसएलवी उपग्रह सूर्य की कक्षा में 97.957 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा और इसकी आयु करीब 5 साल है.

पृथ्वी का अध्ययन करेगा

हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटलाइट प्राथमिक लक्ष्य पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है. यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वर्ण पट (स्पेक्ट्रम) के समीप इन्फ्रारेड और शार्टवेव इन्फ्रारेड क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह का अध्ययन करेगा. इन उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए उसके वाणिज्यिक अंग के साथ वाणिज्यक करार किया गया है.

29 नैनो सेटेलाइट

पीएसएलवी के साथ जिन 30 अन्य सेटेलाइट का प्रक्षेपण गुरुवार को किया जाना है इसमें 1 माइक्रो और 29 नैनो सेटेलाइट होंगे. ये उपग्रह आठ देशों के हैं. इनमें अमेरिका (23 सेटेलाइट) आस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड एवं स्पेन के एक-एक उपग्रह शामिल हैं.

PSLV-C43 से जुड़ी 9 बड़ी बातें

>>इस मिशन के जरिए भारत सहित 9 देशों के 31 सैटलाइट पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) सी-43 के जरिए लॉन्च किए गए.

>>PSLV-C43 की लंबाई 44 मीटर है. इसमें कुल 11 सैटेलाइट हैं, जिनका कुल भार 261.5 किलोग्राम है. 112 मिनट में यह मिशन पूरा हो जाएगा.

>>ये रॉकेट हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी ‘ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे’ पर आधारित है, जिससे धरती के चप्पे-चप्पे पर नज़र रखा जा सकेगा.

>>यह लॉन्चिंग 4 स्टेज में हुई. पहली स्टेज में पीएसएलवी 139 सॉलिड रॉकेट मोटर इस्तेमाल करता है, जिसे 6 सॉलिड स्टूप बूस्ट करते हैं. दूसरी स्टेज में लिक्विड रॉकेट इंजन का यूज होता है, जिसे विकास नाम से पहचाना जाता है. तीसरी स्टेज में सॉलिड रॉकेट मोटर मौजूद है, जो ऊपरी स्टेज को ज्यादा ताकत से धकेलती है. चौथी और आखिरी स्टेज में पेलोड से नीचे मौजूद हिस्सा था, जिसमें दो इंजन मौजूद होते हैं.

>>हाइसिस वायुमंडलीय गतिविधियों का पता लगाने के साथ धरती की मैग्नेटिक फील्ड का भी अध्ययन करेगा. इनमें एक माइक्रो और 29 नैनो सैटलाइट हैं.

>>जिन देशों के उपग्रह भेजे गए उनमें अमेरिका के 23 जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड और स्पेन के एक-एक सैटेलाइट शामिल हैं.

>>PSLV-C43 को 636 किमी ध्रुवीय सूर्य समन्वय कक्ष (एसएसओ) में 97.957 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा. उपग्रह की अभियानगत आयु पांच साल है.

>>इन उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो के वाणिज्यिक अंग एंट्ररिक्स कॉर्पोरेशन लि. के साथ वाणिज्यक करार किया गया है.

>>पीएसएलवी इसरो का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है. इसके प्रक्षेपण के लिए 28 घंटे की उल्टी गिनती बुधवार तड़के पांच बज कर 58 मिनट पर शुरू हो गई थी.

 

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

%d bloggers like this: