RSS प्रचारक इंद्रेश कुमार बोले- जनसंख्‍या विस्‍फोट रोकने के लिए भारत में बने कड़ा कानून

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Ranchi: राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि बढ़ती आबादी भारत के साथ साथ पूरे विश्व की समस्या है. भारत में बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए दो बच्चों का कानून बनना ही चाहिए. इसे किसी धर्म, जाति व संप्रदाय से नहीं जोड़ना चाहिए. जनसंख्या में वृद्धि होने से परेशानी सभी को होती है.

उन्‍होंने कहा आरएसएस का भी मानना है कि पूरे देश को एक मत होकर इससे संबंधित कानून बनाने पर विचार करना चाहिए. जहां तक वर्तमान सरकार की बात है तो वर्ष 2019 में 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि छोटा परिवार भी देश प्रेम है.

इंद्रेश कुमार रविवार को रांची प्रेस क्लब में जनसंख्या समाधान फाउंडेशन की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे.

इंद्रेश कुमार ने कहा कि 1857 में 83 लाख वर्ग किलोमीटर का भारत था और जनसंख्या 35 करोड़ थी. 1950 में 31.5 किमी का भारत रह गया और जनसंख्या 34 करोड़ थी. आज भूमि उतनी ही है, लेकिन जनसंख्या 130 करोड़ से अधिक हो गई है. जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि होने से परेशानी सबको हो रही है. वह चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, सिख हो या ईसाई.

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इस अवसर पर हिंदू जागरण मंच के झारखंड बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन कुमार, फाउंडेशन की झारखंड संयोजक सुचिता सिंह, शिवधारी राम, राष्ट्रीय संयोजक सहगल सहित बड़ी संख्या में हिंदू जागरण मंच, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के लोग उपस्थित थे.

इंद्रेश कुमार ने कहा कि जमीन चली गई, पानी का रिसोर्स कम हो गया, वायु कम हो गई. लोगों को चश्मा लगने लगा. सांस की परेशानी होने लगी है. मानसिक तनाव बढ़ गया है. रोजगार की कमी हो गई है. इससे लोगों की सुविधाओं पर असर पड़ा है. स्टेटस मेंटेन करने के लिए भ्रष्टाचार और अपराध में वृद्धि हुई है.

जनसंख्या नियंत्रण को मजहब से न जोड़ें

इंद्रेश कुमार ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण काननू को मजहब से कभी नहीं जोड़े. वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग इसे मजहब से जोड़ कर देखते हैं. मैंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के 25 लाख मुसलमानों से मिलकर बात की है. ईसाइयों से मिला. उनके साथ बैठकर वार्ता की. बौद्ध, अनुसूचित जाति, जनजाति से इस विषय पर वार्ता की. सभी लोगों का कहना है कि जनसंख्या बढ़ने से सभी लोग परेशान हैं.

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अतिरिक्त सुविधाओं के बाद भी क्यों नहीं सुधरी मुसलमानों की स्थिति

इंद्रेश कुमार ने कहा कि जहां तक मुसलमानों की बात है तो 74 साल में उनकी स्थिति क्यों नहीं सुधरी है. जबकि उनको अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं. इस कानून को मजहब से वही लोग जोड़ने की बात कर रहे हैं जो उन्हें अब तक वोट बैंक समझते आ रहे हैं. वोट बैंक समझने वाले लोगों ने उस समाज की स्थिति को नर्क बनाने का काम किया है. उन्हें केवल अपनी सत्ता से मतलब है. समाज से कुछ भी लेना देना नहीं है.

उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि इसी रफ्तार से जनसंख्या बढ़ी तो आदमी आदमी को खाने पर मजबूर हो जाएंगे. इसी जनसंख्या वृद्धि के कारण विश्व की कितनी सभ्यताएं समाप्त हो गई. शक, हूण, कुषाण का अस्तित्व नहीं है. यह समस्या वैश्विक है. 200 करोड़ की धरती पर जब 1000 करोड़ लोग हो जाएंगे तब क्या स्थिति होगी, समझ सकते हैं.

तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकार के समय ही दो बच्चे की नीति बनी

इंद्रेश कुमार ने कहा कि दो बच्चे की नीति तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकार के समय ही बनी. आज भी बोर्ड पर दिखाई देता है, परंतु वैसा हो नहीं सका. कहा कि जब धारा 370 और 35 ए कानून को समाप्त किया जा सकता है तो जनसंख्या नियंत्रण कानून क्यों नहीं बनाया जा सकता है. जनता की जब मांग तेज होगी तो सरकार भी कानून बनाने पर विवश होगी. पहले कई सरकारें आईं और गई, जनता की आवाज जब तेज हुई तब सरकार ने धारा 370 हटाने का काम किया.

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मुसलमानों को खलनायक बनाने का काम उन्हीं के लोग करते हैं

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी द्वारा यह कहना कि मुसलमानों को खलनायक बनाने का काम किया जा रहा है, के सवाल पर इंद्रेश ने कहा कि उन्हीं के लोग यह काम कर रहे हैं. उन्हें खलनायक बनाने का काम वर्तमान सरकार नहीं कर रही है. बिहार में ओवैसी की पार्टी को पांच सीट तो मिल गई परंतु विधानसभा में उनकी संख्या घट गई. इसलिए हमलोगों को हिंदू और मुसलमान कहने के बजाय हिंदुस्तानी कहना चाहिए.

वोट देने का अधिकार समाप्‍त और जेल की सजा की मांग

जनसंख्या समाधान फाउंडेशन की मांग है कि जाति, धर्म, भाषाई बंधनों से ऊपर उठकर यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो. तीसरी संतान की उत्पत्ति पर सरकारी सुविधाओं के साथ-साथ वोट देने का अधिकार समाप्त हो और चौथी संतान पर 10 वर्ष जेल.

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