डार्विन प्लेटफार्म ग्रुप ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी सैन्य उपकरण विकसित किया

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●             डीपीजीसी लेज़र- गाइडेड  हथियारों के विरुद्ध जैकेट, शस्त्र और प्रणालियों के लिए प्रोटोटाइप विकसित करेगा

●             डीपीजीसी ने वोक्सेन यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी की घोषणा की, जो व्यावसायिक उपयोग के लिए एडवांस एनालिटिक सिस्टम विकसित करेगी

New Delhi: कई हाई-ग्रोथ सेक्टरों में अपनी खास जगह बनाने में सफलता के बाद डार्विन प्लेटफॉर्म ग्रुप ऑफ कंपनीज (DPGC) ने आज सैन्य और वैज्ञानिक प्रगति में एक बड़े डेवलपमेंट की घोषणा की. भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को नए जमाने के सैन्य उपकरणों से लैस करने के लिए डीपीजीसी ने आज आणविक नैनो प्रौद्योगिकी (MNT) पर आधारित स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित सैन्य उपकरणों के प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया.

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए DPGC ने इन प्रोटोटाइपों को डिजाइन और विकसित करने के लिए वोक्सेन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद की रोबोटिक्स लैब के साथ सहयोग किया है. प्रोजेक्ट के तहत डीपीजीसी ने देश के रक्षा बलों को अत्याधुनिक बनाने के लिए तीन एमएनटी-आधारित उपकरण- सैन्य जैकेट, हथियार और गोला-बारूद और लेजर-गाइडेड मुनिशन और लेजर गाइडेड बम के खिलाफ गाइडेंस देने की योजना बनाई है.

मेक इन इंडिया को मिल रहा बढ़ावा

डीपीजीसी ग्रुप के सीईओ डॉ राजा रायचौधरी ने इस बड़ी उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा, “ये वैज्ञानिक और सैन्य प्रगति भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप डीपीजीसी के उद्देश्य का हिस्सा होगी. एमएनटी में शोध का नेतृत्व भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता कर रहे हैं.

उन्‍होंने कहा- हमारा लक्ष्य इस पहल के माध्यम से अपने सैनिकों को नए जमाने के सैन्य उपकरण उपलब्ध कराना है ताकि वे अपनी सुरक्षा से समझौता किए बिना हमारी सीमाओं की मजबूती से रक्षा कर सकें.”

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विशेषज्ञों के अनुसार एमएनटी एक वैज्ञानिक प्रगति है जहां डुप्लिकेट्स बनाए जाते हैं जो मूल प्रति से छोटे, अधिक कार्यात्मक, हल्के और सस्ते होते हैं. इस प्रकार की तकनीक में प्रमुख मिलिट्री एप्लिकेशन हो सकते हैं. MNT ही वह ताकत हो सकती है जो भारत को अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रही वैश्विक महाशक्तियों के खिलाफ खड़ा कर सकती है.

“एडवांस एनालिटिक सिस्टम के विकास के लिए हमने वोक्सेन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में रोबोटिक्स लैब के साथ सहयोग किया है. इन प्रणालियों को व्यावसायिक उपयोग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आरपीए सॉफ्टवेयर (RPA Software) का उपयोग करके बनाया जाएगा. वोक्सेन यूनिवर्सिटी डीपीजीसी द्वारा विकसित किए जा रहे प्रोटोटाइप के अनुसंधान एवं विकास में भी सहायता करेगी. यह परियोजना पूरी तरह से डीपीजीसी द्वारा वित्त पोषित है. यूनिवर्सिटी के साथ रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य भारत को सुरक्षित बनाना है और यह कदम सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप भी है.

डॉ राजा रायचौधरी ने कहा, “प्रोटोटाइप तैयार हैं और हम जल्द ही अपने सशस्त्र बलों को आवश्यक मंजुरियों के अधीन एडवांस मिलिट्री इक्विपमेंट की सप्लाई शुरू कर देंगे.”

भारत का रक्षा पर खर्च लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपए है. मंत्रालय ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत बनाने के लिए भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए 500 करोड़ रुपए रखे हैं. यह इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस फंड्स (iDEX) के तहत है. iDEX के तहत भारत सरकार रक्षा बलों के साथ अनुदान और संयुक्त विकास की पेशकश कर रही है. डीपीजीसी ने इस प्रोत्साहन का उपयोग करने और आत्मानिर्भर भारत के साथ-साथ मेक इन इंडिया के सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करने की योजना बनाई है.

डीपीजीसी द्वारा विकसित और डिजाइन किए जा रहे एडवांस मिलिट्री इक्विपमेंट की मुख्य विशेषताएं:

मिलिट्री जैकेट्सः  एक भारतीय सैनिक को अपनी बुलेटप्रूफ वेस्ट (3 किलो), हथियार (4 किलो), गोला-बारूद (10 किलो), पानी जैसे संसाधन (3 किलो) और अन्य प्रोटेक्टिव गियर साथ रखने होते हैं. इससे सैनिकों को अपनी ड्यूटी के लिए कम से कम 20 किलो वजन उठाना पड़ता है. यह उनके परफॉर्मंस को कम करता है और उन्हें खतरे में डाल सकता है. दूसरी ओर एमएनटी यह सुनिश्चित कर सकता है कि एक सैनिक के उपकरण का वजन 10 किलो से अधिक न हो और यह पिछले हथियारों की तुलना में काफी बेहतर अपग्रेड हो.

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एमएनटी बेस्ड सैन्य जैकेट बहुत हल्के होते हैं और इनमें समान या अधिक ताकत होती है. लाइट बेंडिंग नैनो-टेक्नोलॉजी का उपयोग कैमोफ्लेग तकनीक को युद्ध क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों में फेब्रिकेट करने में किया जा रहा है. सेंसर का उपयोग किया जा रहा है, सिस्टम-फिजिकल नैनो-सेंसर उपकरणों में फ्रैक्चर का पता लगा सकते हैं.

हथियार और गोला बारूद:  नैनो-प्रौद्योगिकी चीजों को हल्का और अधिक मजबूत बनाती है. एमएनटी मैकेनिज्म का उपयोग करके गोलियां बनाई जा रही हैं जो किसी भी वस्तु या ढाल को भेद सकती हैं. इस क्षेत्र में कार्बन नैनोट्यूब का बड़े पैमाने पर टेस्टिंग हो रही है और यह उल्लेखनीय परिणाम दे रहे हैं.

इस वजह से एमएनटी सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य हथियारों या बंदूकों की सुविधाओं में काफी सुधार कर सकता है. एमएनटी हथियार को बहुत हल्का और कार्यात्मक बना सकता है.

लेजर गाइडेड मिसाइलों के खिलाफ लेजर-गाइडेड मुनिशन एंड गाइडेंस सिस्टम:  सेना लेजर बीम (लिडार) के माध्यम से मिसाइल या अन्य प्रोजेक्टाइल या वाहन को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए लेजर गाइडेंस का उपयोग करती है, जैसे, बीम राइडिंग गाइडेंस या सेमी-एक्टिव रडार होमिंग.

एक लेज़र-गाइडेड बम (LGP) एक निर्देशित बम है जो एक बिना निर्देशित बम की तुलना में अधिक सटीकता के साथ निर्दिष्ट लक्ष्य पर हमला करने के लिए सेमी-एक्टिव लेजर गाइडेंस का उपयोग करता है. ये हथियार आमतौर पर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रम में लेजर द्वारा निर्दिष्ट लक्ष्यों को ट्रैक करने के लिए ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स का उपयोग करते हैं, और लक्ष्य को सटीक रूप से मारने के लिए अपने ग्लाइड पाथ को एडजस्ट करते हैं.

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लेजर-गाइडेड हथियार दुश्मन के लड़ाकों का पता लगा सकते हैं और उसी के अनुसार उन्हें निशाना बना सकते हैं. एमएनटी गोला बारूद को मजबूत बनाने के लिए काफी उपयोगी है. तकनीक की बात करें तो एक छोटी सी गोली अपने लक्ष्य का पता लगाकर और खुद को लक्ष्य के अनुरूप ढालकर मिसाइल का काम कर सकती है.

DPGC की पहल भारत की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने में और अधिक मूल्य जोड़ने के लिए तैयार है. परियोजना के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की तमाम महाशक्तियां लेजर गाइडेड बम (LGB) पर काम कर रही हैं. एलजीबी, जैसा कि पहले बताया गया है, एक बम है जो एक लक्ष्य पर निर्देशित लेजर बीम को फॉलो करता है.

एलजीबी के खिलाफ एक गाइडेंस सिस्टम बनाने के लिए, मुख्य कार्य लक्ष्य पर निर्देशित लेजर बीम को पकड़ना है. लेज़र वार्निंग रिसीवर सिस्टम (LWR) द्वारा लेज़रों का पता लगाया जा सकता है. एक लेजर चेतावनी रिसीवर एक प्रकार की चेतावनी प्रणाली है जिसका उपयोग पैसिव मिलिट्री डिफेंस के रूप में किया जाता है. यह लेजर गाइडेंस सिस्टम और लेजर रेंजफाइंडर से लेजर एमिशन की दिशाओं का पता लगाता है, एनालिसिस करता है और उनका पता लगाता है. लेजर-गाइडेड हथियारों के खिलाफ डीपीजीसी के सिस्टम को काउंटरमेजर्स के रूप में तैनात किया जा सकता है.

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