झारखंड में बेअसर है एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों का भारत बंद

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#Ranchi: केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से एससी/एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ सवर्ण संगठनों की तरफ से गुरुवार को भारत बंद का ऐलान किया गया है. झारखंड में भारत बंद बेअसर है. यहां आम दिनों की तरह ही स्‍कूल, कॉलेज, और दफ्तर खुले हैं. सड़कों पर वाहनों का आवागमन भी सामान्‍य दिनों की तरह जारी है. झारखंड में कही से किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की सूचना नहीं है. जन-जीवन सामान्‍य है.

केंद्र सरकार के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट में संशोधन कर मूल स्वरूप में बहाल करने पर सवर्णों ने यह बंद बुलाया है. इसे लेकर देश के दूसरे अलग-अलग राज्यों में भारत बंद का असर दिखना शुरू हो गया है.

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इन राज्‍यों में है भारत बंद का असर

-बिहार के आरा में सवर्णों ने आरा रेलवे स्टेशन के पास लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस को रोक दिया गया है.

– भारत बंद को देखते हुए मध्यप्रदेश के दस जिलों में धारा 144 लागू की गई है. मध्यप्रदेश के भिंड, ग्वालियर, मोरेना, शिवपुरी, अशोक नगर, दतिया, श्योपुर, छत्तरपुर, सागर और नरसिंहपुर में धारा 144 लागू की गई है.

-मध्यप्रदेश में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है. इसके साथ ही पेट्रोल पंप भी दिन भर बंद रहेंगे.

– मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट को लेकर सबसे तेज विरोध देखा जा रहा है. कई केंद्रीय मंत्रियों का घेराव करने के साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर जूता फेंकने, गाड़ी पर पथराव और काले झंडे दिखाए जाने की अनेक घटनाएं हुईं.

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– बिहार में बंद का अच्छा खासा असर देखा जा रहा है. बिहार के खगड़िया में सवर्णों के समूह ने NH31 पर जाम लगा दिया है.

-उत्तर प्रदेश में कुल 11 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है. राजधानी लखनऊ सहित बिजनौर, इलाहाबाद, आजमगढ़, बरेली जैसे कई शहरों में पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है. ताकि किसी भी तरह के हालातों से निपटा जा सके.

-राजस्थान में सवर्णों ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. गुरुवार सुबह भारत बंद का असर यहां भी दिखना शुरू हुआ और जयपुर के स्कूल, कॉलेज और मॉल सब बंद दिखाई दिए.

क्या है मामला ?

यह पूरा विवाद उस एससी-एसटी एक्ट को लेकर है, जिसमें मोदी सरकार ने संशोधन करते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था. एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18A को जोड़ते हुए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा. इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए सभी प्रावधान रद्द हो जाएंगे.

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ऐसे में अब सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद इस मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है. इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिलेगी, बल्कि हाई कोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी. अब जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा और मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी करेंगे. एससी-एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी. इसके साथ ही सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत भी नहीं लेनी होगी.

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