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Independence Day celebration : क्‍या यही आजादी है?

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क्‍या हम इसीलिए आजाद हुए थे? क्‍या यही असली आजादी है? हम संसद नहीं चलने देते, विधानसभा में नीतियां बनाने की जगह आरोप-प्रत्‍यारोप करते हैं.

यह तो हुई बड़े लोगों की बातें, मगर हम समाज स्‍तर पर, व्‍यक्ति स्‍तर पर क्‍या कर रहे हैं? क्‍या हमारा आचरण उनसे अलग है? हम अनुशासन नहीं मानते. हम इनकम टैक्‍स जमा नहीं करते है. हम बिजली-पानी का बिल जमा नहीं करते हैं. ट्रैफिक नियमों का उल्‍लंघन करते हैं. अपने घरों का कचड़ा डस्‍टबिन में न डाल कर बीच सड़क पर फेंक देते हैं.

मोबाईल से बात करते हुए गाड़ी चलाते हैं. तेज गाड़ी चलाकर दूसरों की जान भी लेते हैं. बीच सड़क पर गाड़ी पार्क कर देते हैं. सरकारी दफ्तरों में समय पर नहीं आते. वेतन लेते हैं, लेकिन काम नहीं करते हैं. बिना टिकट यात्रा करते हैं, प्‍लेटफार्म का टिकट नहीं खरीदते.

Independence day of India के लिए क्‍या यह सही है ?

सड़क पर चल रही युवतियों को घुरते हैं. सरकारी जमीन पर कब्‍जा कर लेते हैं. जहां मन किया वहां पान और गुटखा का पीक थूक देते हैं.

कोई भी विकसित देश देख लिजिये, स्‍वतंत्रता के नाम पर इतनी अराजकता नहीं है. हमारे स्‍कूल कॉलेजों में लाखों बच्‍चे पढ़ते हैं. क्‍या वह सप्‍ताह में एक दिन श्रमदान कर के अपना परिसर साफ-सुथरा नहीं बना सकते? आज ये चीजें छोटी और तुच्‍छ लग सकती है.

अगर हम नहीं चेते तो आने वाले दिनों में बड़ी और मुश्किल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. महात्‍मा गांधी कहा करते थे कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़ी सफलता संभव होते हैं. सकंल्‍प लें, आपका एक छोटा प्रयास जरूर रंग लायेगा.

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