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खूंटी के गांवों में पत्‍थलगडी के खिलाफ हुए ग्रामीण, चितरामु गांव से पत्‍थलउखाडी शुरू

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#Khunti : खूंटी जिले की पहचान आज पत्‍थलगडी को लेकर बन गई है. अब इस पत्‍थलगडी के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है. खूंअी के चितरामु गांव में की गई पत्‍थलगडी को गांव वालों ने मिल कर गिरा दिया. यहां साल भर पहले पत्‍थलगडी की गई थी. अब यहां के लोगों को पत्‍थलगडी नहीं डेवलपमेंट चाहिये. 21 जुलाई दिन शनिवार को यहां –‘चलो विकास की ओर’ कार्यक्रम आयोजित होगा.

इस पर खूंटी के विधायक और झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने ट्वीट करके कहा है कि आज खूंटी के खूंटी प्रखंड के चितरामु गांव में संविधान की गलत व्याख्या कर जो पत्थरगढ़ी की का कार्य किया गया था, ग्रामीणों में जागरूकता एवं संविधान की जानकारी होने के उपरांत ग्रामीणों द्वारा पत्थरगढ़ी को पत्थरउखाड़ी का कार्य करसरकार के साथ कार्य करने और हम सरकार के साथ है का संकल्प लिया.

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अभी तक खूंटी जिले में कई दर्जनों गांवों में पत्‍थलगडी की गई है. इसे आदिवासी समाज के संस्‍कति के रूप में देखा जाता है. वहीं हाल के दिनों में बडे-बडे पत्‍थरों में भारतीय संविधान की धाराओं को उकेरा गया और ग्रामसभा के के अधिकारों से जोडा गया. यहां के लोगों को बताया गया कि इन कानूनों का उल्‍लंघन हुआ तो सरकार जल, जंगल और जमीन हडप ली जायेगी.

पत्‍थलगडी गांव में ग्रामीणों को बताया गया था कि वहां अपना हक और अपना शासन है. जिस इलाके में पत्‍थलगडी की जाती है वहां पुलिस और सरकारी अधिकारियों को बिना अनुमति प्रवेश नहीं थी. पत्‍थलगडी करके ग्रामीणों ने पुलिस और सरकारी अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना भी घटन चुकी है.

जिस गांव में पत्‍थलगडी होती थी वहां, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य जैसी आधारभू‍त सुविधायें उपलब्‍ध कराना सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही थी. किसी तरह का सरकारी योजना लागू करने के लिए प्रशासन को बहुत मशक्‍कत करना पडता था.

 

 

 

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