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 IL&FS : ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जांच की मांग की 

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Kolkata: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र लिखा है. इस पत्र में ममता बनर्जी ने भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे देश की बड़ी वित्त संस्थानों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया है.

ममता ने अपने पत्र में कहा है कि  IL&FS  जैसी कंपनी में पैसा लगाकर इन संस्थानों ने आम आदमी की मेहनत की कमाई को खतरे में डाल दिया है. वहीं नोटबंदी और आधे अधूरे तैयारी के साथ जीएसटी लागू कर भी आम जन की रोजी रोटी को छीन गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ममता ने इनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

हजारों करोड़ रुपए फंसे

बता दें कि हाल ही में एक खबर आई थी, जिसमें ये कहा गया था कि देश के 14 लाख कर्मचारियों के करोड़ों रुपये डूबने के कगार पर है. दरअसल प्रविडेंट और पेंशन फंड ट्रस्टों के  IL&FS  (Infrastructure Leasing and Financial Services) ग्रुप के बॉन्ड्स में हजारों करोड़ रुपए फंसे हैं.

इन ट्रस्टों को अब अपने पैसे डूबने की आशंका सताने लगी है. इन ट्रस्टों ने National Company Law Appellate Tribunal (NCLT) में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल कर दी हैं.

times of India में छपी खबर के मुताबिक कितनी रकम लगाई गई है. इसकी जानकारी अभी नहीं मिली हालांकि, इन्वेस्टमेंट बैंकरों के मुताबिक यह रकम हजारों करोड़ रुपये में हो सकती है. क्योंकि Retirement funds की रेटिंग अच्छी होने के कारण प्रविडेंट और पेंशन फंड ट्रस्टों ने  IL&FS में काफी पैसा लगाए. दरअसल, Retirement funds कम जोखिम उठाकर कम ब्याज दर से ही सही, लेकिन निश्चित Return पर जोर देते हैं.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, एमएमटीसी, इंडियन ऑयल, सिडको, हुडको, इडबी, एसबीआई के साथ-साथ गुजरात और हिमाचल प्रदेश के इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड्स जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों के Retirement funds मैनेज करने वाले ट्रस्टों ने NCLT में याचिका डाली है.

इनके अलावा, हिंदुस्तान यूनिलिवर और एशियन पेंट्स जैसी प्राइवेट कंपनियों के PF Funds भी  IL&FS में फंसे हैं.

आने वाले वक्त में ट्रस्टों की ओर से ऐसी याचिकाओं में और बढ़ोतरी हो सकती है. क्योंकि PF Fund 12 मार्च तक NCLT में आवदेन कर सकते हैं. माना जा रहा है कि अब तक 14 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के Retirement funds को मैनेज करने वाले 50 से ज्यादा ट्रस्टों के पैसे  IL&FS में फंसे हैं.

क्या है चिंता की असली वजह?

दरअसल  IL&FS ने अपनी ग्रुप कंपनियों को तीन वर्गों ग्रीन, ऐंबर और रेड में बांट दिया है. ग्रीन कैटेगरी की कंपनियों को अपने सारे दायित्वों का निर्वहन करना होगा. ऐंबर कैटिगरी की कंपनियां सिर्फ सिक्यॉर्ड क्रेडिटर्स के प्रति जिम्मेदार होंगी जबकि रेड कैटिगरी की कंपनियां अपने दायित्व का निर्वाह नहीं कर पाएंगी. चिंता की असली वजह भी यही है. फिलहाल  IL&FS के प्रवक्ता शरद गोयल का कहना है कि कंपनी इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी.

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