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आईआईटी व इंजीनियरिंग के मास्‍टरमाइंड झारखंड में क्‍यों बन रहे दारोगा

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#Ranchi: झारखंड पुलिस में पहली बार 2645 सेलेक्‍टेड कंडीडेट में तीन आईआईटीयन और 1000 इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के हैं. राज्य में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है जब आईआईटी जैसे संस्थान से इंजीनियरिंग करने के बाद दरोगा के तौर पर युवा पुलिस सेवा में बहाली किया गया हैं.

इंजीनियर्स की पुलिस में बहाली क्‍यों

एक जमाना था जब पुलिस की बहाली के लिए हाईस्‍कूल पास कंडीडेट को कठिन फिजिकल टेस्‍ट से गुजरना पड़ता था. इसके लिए वो रोजाना मीलों दौड़ने, लंबी कूद व ऊंची छलांक की प्रैक्टिस करते थे. इसके पीछे वजह यह होता था कि चोर, डकैत और दूसरे अपराधियों को दबोचने के लिए पुलिस के जवान को शारीरिक रूप से मजबूत और फुर्तीला होना जरूरी होता था. इसी आधार पर पुलिस की बहाली के लिए जवानों का सेलेक्‍शन होता था.

अब समय बदल गया है. अपराध का स्‍वरूप भी बदल गया है. अपराधी हाईटेक हो गये हैं. झारखंड में साइबर क्राईम बढ़े हैं. झारखंड के जामताड़ा जिला ऐसा है जहां के साइबर अपराधियों से देश के 22 राज्‍यों की पुलिस परेशान है. साइबर अपराध के मामले में झारखंड अव्‍वल है. जामताड़ा के कालाझरिया, झिलुवा, कांसीटांड़, सियांटांड़, शीतलपुर, मोहनपुर, सिकरपुसनी सहित दर्जनों गांव. अब देवघर जिले का करौं, आसनबनी, चितरा घोरमारा, गिरिडीह जिले का बेंगाबाद, गांडेय, धनबाद जिले का निरसा, गोविंदपुर व टुंडी में फैल रहा है. दूसरे राज्‍यों की पुलिस यहां से 50 से अधिक मामलों में कई साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर ले गई है. कालाझरिया, झिलुवा, कांसीटांड़, सियांटांड़, शीतलपुर, मोहनपुर, सिकरपुसनी सहित दर्जनों गांव. अब देवघर जिले का करौं, आसनबनी, चितरा घोरमारा, गिरिडीह जिले का बेंगाबाद, गांडेय, धनबाद जिले का निरसा, गोविंदपुर व टुंडी में फैल रहा है.

झारखंड की पुलिस इस बात से भी परेशान है कि यहां साइबर अपराध पनपने और बढ़ने की वजह क्‍या है. अक्सर साइबर अपराध की जांच करने के लिए किसी न किसी प्रदेश की पुलिस जामताड़ा में होती है. एक टीम यहां जांच कर रवाना नहीं होती कि उससे पहले दूसरी टीम आ धमकती है.

गृह सचिव एसकेजी रहाटे ने एक वेब मीडिया को बताया कि हाल के दिनों में झारखंड में साइबर क्राइम बड़ी चुनौती बन कर उभरी है. एक साल की बेसिक ट्रेनिंग के बाद राज्यभर के थानों में इन अफसरों की पोस्टिंग होगी. इंजीनियरिंग व साइंस बैकग्राउंड के छात्रों के पुलिसिंग से जुड़ने से साइबर क्राइम के मामलों का अनुसंधान बेहतर तरीके से हो पाएगा. तकनीकी अनुसंधान में भी ये अफसर बेहतर कर पाएंगे. गृह सचिव ने बताया कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के पुलिसिंग में जुड़ने से पुलिसिंग का स्तर बदलेगा.

झारखंड में पुलिस रिफार्म की हुई शुरूआत

गृह सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि झारखंड पुलिस को रिफार्म किए जाने की शुरूआत हो गई है. पुलिसिंग को पीपल फ्रेंडली बनाने के लिए अफसर ओरियेंटेड पुलिसिंग की शुरूआत की जा रही है. एसकेजी रहाटे ने बताया कि झारखंड में अफसर ओरियेंटेड पुलिसिंग की कवायद के तहत 6000 आरक्षियों के पोस्ट खत्म कर दारोगा के छह हजार पद बढ़ाए गए हैं. गृह सचिव ने कहा कि आरक्षियों की तुलना में अफसरों की संख्या बढ़ाने से आम लोग व पुलिस के बीच बेहतर रिश्ते बनेंगे, पढ़े लिखे व सुलझे युवाओं को अधिक मौका मिलेगा.

गृह सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि झारखंड में कानून व्यवस्था और अनुसंधान के लिए अलग अलग विंग बनेगी. गृह सचिव ने बताया कि पुलिस में खाली पदों को जल्द भरा जाएगा. 2645 दारोगा की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद बड़े शहरों मसलन रांची, जमशेदपुर, धनबाद में पहले चरण में अनुसंधान और कानून व्यवस्था को अलग अगल किया जाएगा. यहां कानून व्यवस्था की ड्यूटी में अलग अफसर लगेंगे, जबकि अनुसंधान की जिम्मेदारी अलग अफसरों पर होगी. वर्तमान में पुलिस अधिकारियों को कानून व्यवस्था, ट्रैफिक, नक्सल अभियान की नौकरी के साथ-साथ अपने केस का अनुसंधान भी करना होता है. अनुसंधान के लिए अलग विंग बनने से अधिक से अधिक अपराधियों को सजा दिलायी जा सकेगी.

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