JMM, JVM & Congress को चुनौती, महागठबंधन का हिस्सा मानते हैं तो हमारे उम्मीदवारों को समर्थन दें

JMM, JVM & Congress को चुनौती, महागठबंधन का हिस्सा मानते हैं तो हमारे उम्मीदवारों को समर्थन दें

Ranchi: झारखंड आदिवासी बहुल राज्‍य है और अब यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जमीन से जुड़े जिन सामाजिक संगठनों के बदौलत जो झारखंड नामधानी पार्टी चुनावी रोटी सेंकते आ रहे हैं. अब वही संगठन आने वाले 2019 विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा और कांग्रेस जैसी पार्टियों को कड़ी चुनौती देंगे.

2019 विधानसभा चुनाव में यहां के जल, जंगल, जमीन से जुड़े स्‍थानीय मुद्दों पर आंदोलन करने वाले सामाजिक संगठन झारखंड नामधारी पार्टियों के आश्‍वासनों को दरकिनार करते हुए चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

केन्द्रीय जन संघर्ष समिति ऐसी ही एक सामाजिक संगठन है जो झारखंड के तीन सीटों पर अपने उम्‍मीदवार देगी. यह संगठन नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना  एवं वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करती रही है और अब गुमला, विशुनपुर, और मनिका से अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी.

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केंद्रीय जनसंघर्ष समिति के केंद्रीय सचिव जेरोम जेराल्‍ड कुजुर ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर महागठबंधन को चुनौती दिया है और कहा है कि हम महागठबंधन के साथ हैं. अगर घटक दल महागठबंधन का हिस्‍सा मानते हैं तो वो विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा चुने हुए हमारे संगठन के उम्‍मीदवारों का समर्थन करें.

केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति 1993 से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करती आ रही है. पिछले 26 -27 सालों से समिति अपने मुद्दे पर संघर्षरत है. जेरोम जेराल्‍ड कुजुर का कहना है कि अब तक के सरकारों ने यहां के आदिवासियों को ठगने का काम किया है, अब ऐसा नहीं होगा.

आदिवासी मामलों पर काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि झारखंड के कई इलाकों में आदिवासियों से जुड़े कई मुद्दे हैं. यहां पर कई सामाजिक संगठन अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. वहां पर भी उन संगठनों के द्वारा झारखंड विधान सभा चुनाव लड़ने का दावा किया जाएगा.

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नेतरहाट फ़ील्ड फायरिंग रेंज और  पलामू व्याघ्र परियोजना के लिए विभाग द्वारा गांव खाली करने के लिए सहमती एवं असहमति की चिट्ठी भी भेज चुकी है. वाइल्ड लाइफ कोरीडोर के नाम पर विभाग 6 कोरीडोर बनाने का प्रस्ताव बना चुकी है जिससे 770 गांव प्रभावित होंगे.

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