बकोरिया कांड की एफआईआर मैंने नहीं लिखी, दबाव में करना पड़ा हस्‍ताक्षर

I did not write the FIR of the Bokoria case;

Medininagar(Palamu): बकोरिया कांड (Bakroria Kand) में एफआईआर दर्ज करने वाले पुलिस अफसर मोहम्‍मद रुस्‍तम अपने बयान से पलट गया है. बतौर एनकाउंटर इस घटना की एफआईआर दर्ज करने इस मामले में शिकायतकर्ता बने मो रुस्‍तम ने अब सीबीआई की पूछताछ (CBI inquiry) में पलामू सदर थाना के तत्‍कालीन प्रभारी हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया है.

यही नहीं मो रुस्‍तम ने सीबीआई के समक्ष ये भी कहा कि मैंने खुद एफआईआर नहीं लिखी है. मुझे अफसरों ने लिखित एफआईआर पर दबाव डालकर हस्‍ताक्षर कराया है. हस्‍ताक्षर करके मैं शिकायतकर्ता बन गया.

उल्‍लेखनीय है कि पलामू सदर के तत्‍कालीन थानेदार ने इस मुठभेड़ की एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था.

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तत्‍कालीन सतबरवा थानेदार मोहम्‍मद रुस्‍तम के बयान से पलटने की सीबीआई ने पुष्टि नहीं की है. ऐजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है. सीबीआई और सेंट्रल फोरेंसिक लैब के डायरेक्‍टर एनबी वर्द्धन की टीम गुरुवार को मौके पर घटना का नाट्य रुपांतरण करेगी.

रुस्‍तम और सीआईडी की रिपोर्ट में समय अलग-अलग

एफआईआर के मुताबिक थानेदार मोहम्‍मद रुस्‍तम ने 8 जून 2015 की रात 12:15 बजे पलामू के तत्‍कालीन एसपी कन्‍हैया मयूर पटेल को मुठभेड़ की सूचना दी. पलामू आईजी के साथ एसपी रात एक बजे वहां पहुंचे. वहीं सीआईडी ने अपने सुपरविजन रिपोर्ट में कहा कि रुस्‍तम ने एसपी को रात 1:15 बजे सूचना दी.

थानेदार से 4 घंटे पूछताछ

पलामू सर्किट हाउस में सीबीआई ने मो रुस्‍तम से 4 घंटे पूछताछ की. तत्‍कालीन मनिका थाना प्रभारी गुलाम रबानी ने सीबीआई को बताया कि सतबरवा के पड़ोस में होने के बाद भी उन्‍हें घटना की जानकारी नहीं थी. पलामू में जांच के दौरान कई वरीय पुलिस अफसरों से भी सीबीआई पूछताछ करेगी.

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