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how to invest in stock market (Share Market जानिये हिंदी में step by step)

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how to invest in stock market : हर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करता हैं और पैसे कमाता हैं. वह अपनी कमाई का कुछ हिस्सा saving (बचत) के रूप में रखता हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

लेकिन Money Saving का कार्य तब तक अधूरा होता हैं जब तक की बचत किये हुए पैसे को सही तरीके से Invest न किया जाए. वैसे तो Investment के कई सारे विकल्प होते हैं, लेकिन Share Market या Stock Market भी Investment का एक मुख्य विकल्प हैं.

कई लोग Share Market में Invest करना चाहते हैं लेकिन Stock Market के बारे में सही ज्ञान न होने के कारण या तो वे Share Market में Invest नहीं करते या फिर वे अपने पैसे खो देते हैं.इसी बात को ध्यान में रखकर आज हम Stock Market Investment से सम्बंधित Basic जानकारी यहाँ पर शेयर कर रहे हैं:

What is Stock Market – शेयर बाज़ार क्या हैं : how to invest in stock market

Stock Market वह जगह होती हैं जहाँ पर Shares, Debentures, Mutual Funds, Derivatives और अन्य Securities (प्रतिभूतियों) को ख़रीदा और बेचा जाता हैं. Shares को मुख्य रूप से Stock Exchange के माध्यम से ख़रीदा और बेचा जाता हैं और भारत में BSE (Bombay Stock Exchange) और NSE (National Stock Exchange) दो मुख्य Stock Exchange हैं.

hare का अर्थ होता हैं -“हिस्सा” और स्टॉक मार्केट की भाषा में “शेयर” का मतलब हैं – “कंपनियों में हिस्सा”. जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी ने कुल 1 लाख शेयर Issue किये हैं और आपने उसमें से 10 हजार Shares खरीद लिए हैं तो आप उस कंपनी के 10% हिस्सेदार बन जाते हैं. आप जब चाहें तब इन शेयर्स को स्टॉक मार्केट में बेच सकते हैं.

  • शेयर मार्केट कैसे काम करता हैं ? How Share Market Works
  • कंपनियां शेयर्स कैसे जारी (Issue) करती हैं ?

सर्वप्रथम कंपनियां अपने शेयर्स की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग करवाकर IPO (Initial Public Offering) लाती है और अपने शेयर्स स्वंय द्वारा निर्धारित किये हुए मूल्य पर Public को Issue करती हैं. एक बार IPO पूरा हो जाने के बाद Shares, Market में आ जाते हैं और स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकर्स के माध्यम से निवेशकों द्वारा आपस में ख़रीदे और बेचे जाते हैं.

Shares के Prices कैसे बदलते हैं? How Stock Prices are Set?

सर्वप्रथम आईपीओ लाते वक्त शेयर्स के Price कंपनी निर्धारित करती हैं लेकिन एक बार आईपीओ पूरा हो जाने के बाद Shares का मूल्य निर्धारित करने में कंपनी का कोई Role नहीं होता और Shares के मूल्य स्वतन्त्र रूप से shares की Deemand और Supply के आधार पर Stock एक्सचेंज द्वारा निर्धारित किये जाते हैं.

अगर ख़रीदे जाने वाले Shares की तुलना में बेचे जाने वाले shares की संख्या कम होगी तो Shares के Price बढ़ेंगे और अगर बेचे जाने वाले Shares की तुलना में ख़रीदे जाने वाले Shares की संख्या कम होगी तो Share Price कम होगी.

शेयर मार्केट में रजिस्टर्ड होने के बाद कंपनियों को समय-समय पर सभी महत्वपूर्ण जानकारियां निवेशकों के साथ साझा करनी होती हैं और इसी जानकारियों के आधार पर निवेशक कंपनियों का मूल्यंकन करते हैं. इस मूल्यांकन के आधार पर शेयर्स की Deemand और Supply घटने-बढ़ने से Shares के Price Change होते हैं.

Sensex और Nifty क्या हैं ?

Sensex बोम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक (Index) हैं और Sensex का निर्धारण BSE में लिस्टेड टॉप 30 कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन (कंपनीयों का कुल मूल्य) के आधार पर किया जाता हैं.Sensex BSE की टॉप 30 कंपनियों के प्रदर्शन को प्रदर्शित करता हैं.अगर सेंसेक्स बढ़ता हैं तो इसका मतलब हैं कि BSE में रजिस्टर्ड अधिकांश कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया हैं और इसी तरह अगर सेंसेक्स गिरता हैं तो इसका मतलब यह हैं कि अधिकांश कंपनियों का प्रदर्शन ख़राब रहा हैं.

Nifty नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक (Index) हैं और इसका निर्धारण NSE में लिस्टेड टॉप 50 कंपनियों के के मार्केट कैपिटलाइजेशन (कंपनीयों का कुल मूल्य) आधार पर किया जाता हैं. अगर Nifty बढ़ता हैं तो इसका मतलब यह हैं कि NSE में रजिस्टर्ड कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया हैं और अगर Nifty घटता हैं तो इसका अर्थ यह हैं कि NSE की कंपनियों ने बुरा प्रदर्शन किया हैं.

Stock Market में Trade होने वाली अन्य Securities

ज्यादातर लोगों को लगता हैं कि स्टॉक मार्केट में केवल शेयर्स ही ख़रीदे और बेचे जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है शेयर्स की तरह अन्य कई सिक्योरिटीज होती हैं जिसे स्टॉक मार्केट में ख़रीदा और बेचा जाता हैं :

Bond/Debentures

Bond/Debenture एक तरह से loan की तरह होता हैं. कंपनी को जब किसी प्रोजेक्ट के लिए पैसे की आवश्यकता होती हैं तो या वे बैंक से लोन ले सकते हैं या फिर वे जनता/investors से लोन लेते हैंऔर जनता को Bonds/Debentures Issue कर देते हैं जिसका Repayment उन्हें तय समय में करना होता हैं.कंपनियां Bonds/Debentures पर निर्धारित Rate से Interest payment करती हैं और Bond की अवधि पूरी हो जाने पर वापस बांड्स के बदले Repayment कर देती हैं.

Bonds/Debenture किसी भी निवेशक के लिए Shares की तुलना में एक Secure Investment Option होता हैं क्योंकि इसमें कंपनी द्वारा निर्धारित दर से समय समय पर ब्याज दिया जाता हैं और Maturity (बांड की अवधि पूरी होने) पर Repayment कर दिया जाता हैं.

Mutual Funds

Mutual funds एक तरह का Shares और Bonds में अप्रत्यक्ष निवेश होता है. Mutual Fund एक प्रकार की संस्था या ट्रस्ट होती है जो अपनी यूनिट्स (Shares की तरह) जारी करती है जिसे खरीदकर लोग म्यूच्यूअल फण्ड में Invest करते है. Mutual Fund में इन्वेस्ट की गयी रकम को म्यूच्यूअल फंड्स के प्रोफेशनल मेनेजर अपने ज्ञान, अनुभव, सूझबूझ और एनालिसिस के आधार पर विभिन्न प्रकार के Shares एंव अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करते है .

म्यूच्यूअल फण्ड में Investment का यह Benefit यह होता कि म्यूच्यूअल फण्ड के Professional Fund Manager सभी एकत्रित धनराशी को अपने ज्ञान के आधार पर सबसे अच्छे तरह से निवेश करने की कोशिश करते है जिसके बदले में वे कुछ फीस चार्ज करते है.

Mutual Fund में Investment उन लोगों के लिए फायदेमंद होता हैं जिनको Stock Market का ज्यादा ज्ञान नहीं होता या फिर उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे शेयर में निवेश से पहले पूरी जानकारी देखें इसलिए वे म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है और म्यूच्यूअल फण्ड उन्हें अपनी दक्षता के अनुसार आगे शेयर मार्किट एंव अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करते है. Mutual Fund को जो भी Dividend प्राप्त होता है वह निवेशकों में उनके ख़रीदे गए यूनिट्स के आधार पर बाँट दिया जाता है

SIP – Systematic Investment Plan

एसआईपी का मतलब हैं – सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान. SIP म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का ही एक तरीका हैं. इसमें एकमुश्त (Lump Sum) निवेश की जगह हर महीने एक निश्चित राशी को Mutual Fund में निवेश किया जाता हैं. निवेशक के Bank Account को SIP Scheme से लिंक कर दिया जाता हैं जिससे हर महीने एक निश्चित राशि बैंक अकाउंट से म्यूच्यूअल फण्ड में ट्रान्सफर हो जाती हैं और उतनी राशि के बराबर म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स निवेशक के अकाउंट में आ जाती हैं. सरल और आटोमेटिक होने के कारण SIP आजकल बहुत प्रचलित हैं.

Derivatives (वायदा)

Derivatives का अर्थ भविष्य के लेन देन को आज निर्धारित करना होता हैं जिन्हें Stock Market में Options एंव Futures के द्वारा अंजाम दिया जाता हैं.वायदा कारोबार तहत आप भविष्य के लेन देनों को आज एक निर्धारित मूल्य (Future Price) पर अंजाम दे सकते हैं.Derivatives में सामान्यत: Actual Delivery नहीं दी जाती और मूल्य के अंतर के आधार पर Settlement किया जाता हैं.

Shares कैसे खरीदें – Trading Account और Demat Account

इन सभी नियमों को ध्यान में रखकर जब आप Stock Market में Invest करने का निर्णय ले लेते हैं तो आपका अगला कदम शेयर बाज़ार में निवेश प्रक्रिया को शुरू करना हो सकता है. इसके लिए सबसे पहले आपको किसी Stock Broker के साथ Trading और Demat Account खोलना होता है.

Demat Account क्या हैं

जिस तरह बैंक अकाउंट में रूपये जमा कर सकते हैं उसी तरह Demat Account में आपके निवेश से संबंधी सभी Securities जैसे Share, Bonds, Government Securities, Mutual Funds आदि को Electronic Form में Store किया जाता हैं.

Trading Account क्या हैं

Trading Account का उपयोग आपके शेयर व्यवसाय में Share Sell and Purchase करने के काम आता है. यह Account आप किसी अच्छे Broker के पास खोल सकते हैं और ऑनलाइन सुविधा होने के कारण आप इस अकाउंट की सहायता से कभी भी शेयर्स खरीद और बेच सकते हैं.

How to Open Demat Account and Trading Account

Demat Account और Trading Account को खोलने के लिए आपको अपने बैंक से KYC करवाने की जरूरत होती है. एक प्रकार से यह खाता आपके फंडस को मेनेज करता है जिसमें शेयर्स और फंड यूनिट आदि की खरीद से संबन्धित सारी जानकारी होती है. इस Account को आप बैंक से उसी प्रकार खोल सकते हैं जैसे आप किसी बैंक से सामान्य खाता खोलते हैं. Demat और Trading Account खोलने के लिए आपको जिन डोक्यूमेंट्स की जरूरत होगी, वो इस प्रकार हैं:

पैन कार्ड: किसी भी डीमैट या ट्रेडिंग एकाउंट खोलने के लिए आपको इसकी बहुत जरूरत है क्यूंकी इसके बिना आप कोई भी एकाउंट नहीं खोल सकते हैं. इसलिए एक Attested Photocopy of Pan Card सबसे पहला और जरूरी दस्तावेज़ है.

फोटो: आपकी दो लेटेस्ट पासपोर्ट साइज़ की फोटो आपके पास होनी चाहिएँ.

एड्रेस प्रूफ: आपके निवास स्थान का प्रूफ देने के लिए आप आधार कार्ड का प्रयोग कर सकते हैं.

कैंसल चैक: आपके पास आपका नाम लिखा हुए कैंसल चेक होना चाहिए. यदि आपके पास यह नहीं है तो घबराएँ नहीं, पिछले छह माह की Bank Statement भी आपकी समस्या का हल कर सकती है.

आय का प्रमाण पत्र: अपनी Income Proof देने के लिए आप या तो अपनी Latest Salary Slip लगा सकते हैं या फिर 6 महीने की बैंक स्टेटमेंट भी लगा सकते हैं. इसके अतिरिक्त आप यहाँ पर Latest Form 16 या Income Tax Return की कॉपी भी लगा सकते हैं.

इन सभी दस्तावेज़ों को जमा करते समय इस बात का ध्यान रखें इन सभी प्रमाण पत्रों में आपका नाम सही और स्पष्ट लिखा हो और एक ही तरीके से लिखा हो. इसके अलावा आप Account खुलवाते समय इन सभी दस्तावेजों की Photostat Copy लगाते हैं, लेकिन अपने पास इनकी Original Copy भी रखें जो किसी भी समय वेरिफिकेशन के लिए मांगी जा सकती है. Demat Account या Trading Account को खोलते समय आप जिन कागजों पर हस्ताक्षर करते हैं उन पर लिखे गए नियमों और निर्देशों को आप ध्यान से पढ़ जरूर लें.

Demat Account Guide (Hindi)

Demat Account open हो जाने के बाद आप शेयर मार्केट में व्यवसाय करने के लिए तैयार होते हैं.

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