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दिवाली कब है | दिवाली पर निबंध | How Diwali is Celebrated | Diwali Kab hai [2019]

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दिवाली कब है | दिवाली पर निबंध | How Diwali is Celebrated | Diwali Kab hai [2019]

दिवाली कब है, दिवाली पर निबंध कैसे लिखें, दिवाली का इतिहास और महत्‍व ऐसे न जाने कितने सवाल दिवाली त्‍योहार के करीब पहुंचते ही पूछे जाते हैं. आप भी ऐसे ही कई सवालों को लेकर गूगल की खाक छान रहे हैं तो आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं.

लोकल खबर आपको दिवाली से जुड़ी हर जानकारी देने जा रहा है. यह पूरा दिवाली पर निबंध में आपको सभी जानकारी पढ़ने को मिलेगी. आप शुरू से आखिर तक करीब 5000 शब्‍दों में इस दिवाली आर्टिकल को पढ़ें.

इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि 2019 में दिवाली कब है. दिवाली पर पूरे आर्टिकल में दिवाली की तारीख जानने को मिलेगी. साथ ही साथ किस दिन किस समय किस देवी देवता की पूजा की जाएगी यह भी आपको विस्‍तार ने समझने का मौका यहां मिल रहा है.

दिवाली के मौके पर श्री लक्ष्‍मी-गणेश और दूसरे ईष्‍ट देवी देवताओं को कैसे पूजा करें और उन्‍हें प्रसन्‍न कर सकते हैं यह भी यहां जानने को मिल रहा है. साथी पूरे पूजा-विधि और मंत्र के साथ हर दिवाली की हर जानकारी यहां मिल रही है.

दिवाली का बड़ा त्‍योहार हो और आप अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश न भेजें, यह भी नहीं हो सकता. 2019 दिवाली में सबसे बेहतर दिवाली मैसेज भी आपको इसी पोस्‍ट में देखने और पढ़ने को मिल रहे हैं. आप अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को अभी से दिवाली के शुभकामना संदेश भेज सकते हैं.

दिवाली का त्योहार हमारे देश के लोगों के जीवन में काफी महत्व रखता है और ये त्योहार हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है. इस दिन लोग अपने घरों को रोशन करतें हैं और धन कि देवी माता लक्ष्मी और गौरी पुत्र भगवान गणेश की पूजा करते हैं. इस त्योहार का अवकाश भारत के अलावा भी कई राष्ट्रों में घोषित किया गया है.

यह पाँच दिन का त्यौहार बड़े जोर शोर से देश में मनाया जाता हैं. इस साल भी दिवाली 25 अक्टूबर से शुरू हो कर 29 अक्टूबर तक मनाई जाएगी. दिवाली 2019 में कब है व शुभ मुहूर्त क्या है विस्तार से जानने के लिए पढ़े.

Contents

दीपावली या दिवाली क्यों मनाई जाती है, इसके क्या कारण है?  (12 Reasons To Celebrate Diwali) –

ये त्योहार हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या के दिन आने वाला हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों का त्योहार है और हर धर्म का इस दिन के साथ खास महत्व जुड़ा हुआ है. साथ में ही दीपावली को मनाने के पीछे कई सारी कथाएं भी हैं:

  • लक्ष्मी मां का जन्मदिन- इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था और उनका विवाह भी भगवान विष्णु से इसी दिन हुआ था. कहाँ जाता है कि हर साल इन दोनों की शादी का जश्न हर कोई अपने घरों को रोशन करके मनाता है.
  • लक्ष्मी मां को करवाया था रिहा- भगवान विष्णु के पांचवें अवतार ने कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी को राजा बाली की जेल से छुड़वाया था और इसके चलते ही इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है.
  • जैन धर्म के लोगों के लिए विशेष दिन- जैन धर्म में पूजनीय और आधुनिक जैन धर्म के संस्थापक जिन्होने दीपावली के दिवस पर ही निर्वाण प्राप्त किया था और अपने धर्म के लिए इस दिन को महत्वपूर्ण बनाया.
  • सिक्खों के लिए विशेष दिन- इस दिन को सिक्ख धर्म के गुरु अमर दास ने रेड-लेटर डे के रूप में संस्थागत किया था, जिसके बाद से सभी सिख्क, अपने गुरु का आशीर्वाद इस दिन प्राप्त करते हैं. सन् 1577 में दीपावली के दिन ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की आधारशिला भी रखी गई थी.
  • पांडवों का वनवास हुआ था पूरा – महाभारत के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन ही पांडवों का वनवास पूरा हुआ था और इनका बाराह साल का वनवास पूरा होने की खुशी में इनसे प्रेम करने वाले लोगों ने अपने घरों में दीये जलाए थे.
  • विक्रमादित्य का राज तिलक हुआ था- हमारे देश के महाराजा विक्रमादित्य जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य पर राज किया था, उनका राज तिलक भी इसी दिन किया गया था.
  • कृष्ण जी ने नरकासुर को मारा था- देवकी नंदन श्री कृष्ण ने नरकासूर राक्षस का वध भी दीपावली से एक दिन पूर्व किया था. जिसके बाद इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया था.
  • राम भगवान की घर वापसी की खुशी में  – इस दिन भगवान राम जी अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपना 14 साल का वनवास सफलता पूर्वक करके, अपने जन्म स्थान अयोध्या में लौटे थे. और इनके आने की खुशी में अयोध्या के निवासियों ने दीपावली अपने राज्य में मनाई थी. वहीं जब से लेकर अब तक हमारे देश में इस त्योहार को हर वर्ष मनाया जाता है.
  • फसलों का त्योहार – खरीफ फसल के समय ही ये त्योहार आता है और किसानों के लिए ये त्योहार समृद्धी का संकेत होता है और इस त्योहार को किसान उत्साह के साथ मनाते हैं.
  • हिंदू नव वर्ष का दिन – दीपावली के साथ ही हिंदू व्यवसायी का नया साल शुरू हो जाता है और व्यवसायी इस दिन अपने खातों की नई किताबें शुरू करते हैं, और नए साल को शुरू करने के पहले अपने सभी ऋणों का भुगतान करते हैं.

दीपावली का महत्व (Significance of Diwali)

  • दीपावली त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. और ये दिन लोगों को याद दिलाता है कि सच्चाई और भलाई की हमेशा ही जीत होती है.
  • धारणाओं के मुताबिक, इस दिन पटाखे फोड़ना शुभ होता है और इनकी आवाज पृथ्वी पर रहने वाले लोगों की खुशी को दर्शाती है, जिससे की देवताओं को उनकी भरपूर स्थिति के बारे में पता चलता है.
  • इस दिन लक्ष्मी मां की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण होता है और ऐसा माना जाता है कि अगर सच्चे मन से इस दिन मां की पूजा की जाए तो घर में पैसों की कमी नहीं होती है.
  • इस अवसर पर लोग उपहारों का आदान प्रदान करते हैं और मिठाई से एक दूसरे का मुंह मीठा करवाते हैं और ऐसा करने से उनके बीच में प्यार बना रहता है. ये त्योहार लोगों को आपस में जोड़कर रखने का भी कार्य करता है.

दिवाली 2019 में कब है व शुभ मुहूर्त क्या है (Deepawali Or Diwali Puja Shubh Muhurat Date In Hindi)

दीपावली का त्यौहार देश के बड़े त्यौहारों में से एक हैं. जीवन को अंधकार से प्रकाश में जाने का संकेत देने वाला यह त्यौहार जितने उत्साह से मनाया जाता हैं, उतने ही उत्साह से इसकी पूजा विधि संपन्न की जाती हैं . पुरे महीने लोग दीपावली के त्यौहार की तैयारी करते हैं, जिसकी शुरुवात साफ़ सफाई से की जाती हैं, क्यूंकि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का महत्व होता हैं, और लक्ष्मी वहीँ निवास करती हैं जहाँ स्वच्छता होती हैं .

लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र : ॐ हिम् महालक्ष्मै च विदमहै, विष्णु पत्नये च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात

कोई भी त्यौहार उसकी पौराणिक कथा के कारण अधिक लोक प्रिय होता हैं, ऐसे ही दीपावली क्यों मनाई जाती है, इस पर बहुत सी कथाएं प्रचलित है. हिन्दू संस्कृति में पंचाग का विशेष महत्व है, बिना शुभ समय देखे कोई कार्य नहीं किये जाते हैं, किसी भी पूजन का शुभ मुहूर्त देखकर ही शुभारम्भ किया जाता हैं .

दीपावली 2019 में कब से शुरू है (Diwali/ Deepawali Festival Dates)

क्र. दिनांक दीपावली के दिन विवरण
1 25 अक्टूबर  धन तेरस कुबेर देवता की पूजा की जाती हैं . घर में नयी वस्तु खरीदी जाती हैं . इस दिन बर्तन, सोने चांदी की खरीद का बहुत महत्व होता है. एक झाड़ू खरीदने का भी प्रावधान है, कहते है इससे लक्ष्मी घर में आती है.
2 26 अक्टूबर  नरक चौदस सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान का महत्व हैं . तिल से स्नान का महत्व हैं . कहते है सूर्योदय से पहले चिकसा, तिल लगाकर नहाते है तो स्वर्ग की प्राप्ति होती है.
3 27 अक्टूबर  दीपावली लक्ष्मी जी की पूजा की जाती हैं, दीप दान किया जाता हैं. व्यपारियों के लिए यह नव वर्ष होता हैं . नए बहीखाते इस दिन से शुरू किये जाते है.
4 28 अक्टूबर  गोवर्धन पूजा गोबर्धन की पूजा की जाती हैं . 56 भोग बनाकर अन्नकूट किया जाता हैं .
5 29 अक्टूबर  भाई दूज भाई बहन का त्यौहार होता हैं बहन भाई को तिलक करती हैं एवम भोजन के लिए घर पर आमंत्रित करती हैं .

साल 2019 में  दीपावली का शुभ मुहूर्त ( Diwali/ Deepawali Festival Dates and Muhurt )

साल 2019 में कब है दीपावली 27 अक्टूबर 
किस दिन रविवार
किसके द्वारा मनाया जाता है ये त्योहार हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा
लक्ष्मी पूजा मुहूर्ता का समय 17:57 लेकर 19:53 (5.57 से लेकर 7:53 तक)
प्रदोष काल 17:30 से 20:11 (5:30 से लेकर 8:11 तक)
वृषभ काल 17:57 लेकर 19:53 (5.57 से लेकर 7:53 तक)

 साल 2019 की दीपावली का शुभ मुहूर्त

इस दिन माँ धन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और हर कोई अपने परिवार की सुख और समृद्धि की कामना माँ से करतें हैं. इस शुभ दिन लोग अपने घरों की अच्छे से साफ सफाई करते हैं और अपने पूरे घर को दीयों और लाइटों की रोशीन से रोशन करते है. वहीं इस दिन केवल शुभ मुहूर्त के दौरान ही रात के समय भगवान की पूजा की जाती है. 

दिवाली में लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है. महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है. आम इन्सान लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में ही करते है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है. कहते है, स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी घर में ही स्थिर रहती है, कहीं नहीं जाती है. इसलिए ये लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा समय है. वृषभ काल ही स्थिर लग्न होता है, जो दिवाली के त्यौहार में प्रदोष काल में ही आता है. अगर किसी कारणवश वृषभ काल में पूजा नहीं कर पाते है, तो इस दिन के किसी भी लग्न काल में पूजा कर सकते है.

दिवाली की पूजा के लिए चार मुहूर्त होते है –

  1. वृश्चिक लग्न – यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.
  2. कुम्भ लग्न – यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है, जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.
  3. वृषभ लग्न – यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.
  4. सिम्हा लग्न – यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

दीवाली या दीपावली का महत्व, लाभ एवम नुकसान (Diwali Festival importance, Benefits and Loss In Hindi)

दीपावली और दिवाली हिन्दू धर्मं का सबसे महान पर्व माना जाता हैं, जिसे हर भारतवासी प्रति वर्ष हर्षोल्लास से मनाता हैं. प्रत्येक त्यौहार के पीछे एक कहानी जुड़ी होती हैं, जो हर व्यक्ति को उस पर्व का महत्व समझाती हैं. दीपावली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता हैं. यह रोशनी का त्यौहार है, जो अंधकार में रोशनी का विजय प्रतीक है. भारत देश का यह अकेला ऐसा त्यौहार है, जो 5 दिनों तक चलता है, और इस त्यौहार के आने से 1 महीने पहले लोगों पर इसका नशा छा जाता है. हर तरफ त्यौहार की रोनक दिखाई देती है, बाजार, हाट, घर सब सज जाते है. इस त्यौहार का नशा ऐसा होता है कि इसके ख़त्म होने के बाद भी लोग इससे बाहर नहीं आ पाते है. त्यौहार के बाद किसी का काम काज में मन ही नहीं लगता है.

दीवाली महत्व लाभ एवम नुकसान ( Diwali Mahatav Labh Nuksaan In Hindi)

14 वर्ष के वनवास के बाद जब राजा राम अयोध्या वापस लौटे, तब अपने राजा के वापसी की ख़ुशी में सभी प्रजाजन ने दीपक जलाकर उनका अपनी श्रध्दाभरी भावना से ऐसा भव्य स्वागत किया, जिससे उस दिन की काली रात्रि अर्थात अमावस प्रकाशित हो उठी. जब से ही यह पर्व पांच दिन तक मनाया जाता है, सभी दिनों के साथ कुछ धार्मिक कथायें जुड़ी हुई हैं.

धन तेरस   इस दिन धन की देवी लक्ष्मी तथा देवता कुबेर की पूजा की जाती हैं. इस दिन से दीपावली का यह महा पर्व शुरू हो जाता हैं. घर में रंगोली बनाई जाती है, शुभ मुहूर्त में सोने, चांदी के बर्तन, गहने ख़रीदे जाते है. इसके साथ ही घर के लिए नया नया समान ख़रीदा जाता है.
नरक चौदस   यह दूसरा दिन होता हैं इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठ कर स्नान करके सूर्य देवता की पूजा की जाती हैं  और माना जाता हैं ऐसा करने से मरणोपरांत स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं.
दीवाली   दीपावली तीसरे दिन मनाई जाती हैं घर में कई पकवानों के साथ सभी परिवार जन देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और घर के हर एक कोने को दीप प्रज्वलित कर प्रकाशित किया जाता हैं और फटाको की आवाज के साथ इसे मनाया जाता हैं. घर को तरह तरह की लाइट से सजाया जाता है, रंगोली बनाई जाती है.
गोवर्धन पूजा   यह दीपावली का चौथा दिन होता हैं जिसमे छप्पन भोग बनाकर गोवर्धन की पूजा की जाती हैं विशेषकर यह दिन खेती किसानी वाले लोग मनाते हैं. कई परिवार इस दिन अन्नकूट करते हैं और सभी साथी संगी को भोजन करवाते हैं.
भाई दूज   यह सबसे आखरी दिन होता हैं, जिसमे बहन भाई को तिलक करती हैं और शादीशुदा बहन भाई को भोजन पर आमंत्रित कर हर्षौल्लास से भाई दूज मनाती हैं.

दीपावली वास्तव में एक मिलन का त्यौहार है, जिसमे सभी अपनों से मिलते हैं, खुशियाँ बाटते हैं.

आज की व्यस्त जिन्दगी में त्यौहार का महत्व बढ़ गया है, त्यौहार के कारण सभी अपने परिवारजनो से मिलते हैं दो पल ख़ुशी के बिताते हैं जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं साथी छोटे- छोटे मन मुटाव दूर होते हैं.

त्यौहार रिश्तों में आई दूरियों को कम करने में विशेष भूमिका निभाते हैं और आज के वक्त में इसका महत्व सबसे ज्यादा वृद्ध व्यक्ति समझते हैं जिन्होंने परिवार को एक माला में पिरो रखने का सपना देखा था.

दीपावली व्यापारियों का विशेष पर्व मानी जाती हैं इससे उनका नव वर्ष प्रारंभ होता हैं और साल भर का लेखा जोखा ख़त्म कर नए खाताबही तैयार किये जाते हैं. दीपावली तक सभी पुराने लेन देन का निपटारा कर नयें वर्ष का प्रारंभ किया जाता हैं.

दीवाली सेलिब्रेशन (Deepawali or Diwali Celebration) :

  1. दीपावली की तैयारी कई दिनों से शुरू कर दी जाती हैं, जिसकी शुरुवात घर की साफ़ सफाई से की जाती हैं. त्यौहार की ख़ुशी में साल भर का कूड़ा घर से बाहर कर दिया जाता हैं. कहते है लक्ष्मी साफ सुथरे स्थान में ही रहती है, इसलिए लोग अपने पुरे घर की विशेष सफाई करवाते है.
  2. घरो का रंग रोगन किया जाता हैं और तरह- तरह से घर की सजावट की जाती हैं.
  3. दीपावली में पकवानों का विशेष महत्त्व हैं विशेष तरह के मीठे तथा नमकीन पकवान बनाये जाते हैं. जिसका विचार कई दिनों से कर लिया जाता हैं.
  4. दीपावली में नयें वस्त्रों का महत्व हैं परिवार का हर व्यक्ति नये कपडे पहनकर पूजा करता हैं.
  5. कई उपहार ख़रीदे जाते हैं जिन्हें दोस्तों, रिश्तेदारों में प्रेम के साथ दिया जाता हैं जिससे रिश्ते की डोर मजबूत होती हैं.
  6. घर तथा अन्य जगह काम करने वाले कर्मचारियों को भी उपहार दिए जाते हैं.
  7. आज के आधुनिक वक्त में दीपावली भी आधुनिक तरीके से मनाई जाती हैं उच्च परिवार कई दिनों तक विशेष पार्टी करता हैं जिसमे वे सभी से मुलाकात करते हैं जिनसे पारिवारिक, व्यापारिक एवम अन्य संबंध बेहतर बनते हैं.
  8. दीपावली के बाद सभी अपने खास सम्बंधी एवम दोस्तों के घर जाते हैं बढ़ो का आशीर्वाद लिया एवम छोटो को आशीष दिया जाता हैं.

दीपावली के लाभ (Diwali Benefits):

  1. छोटे बड़े सभी व्यापारियों के लिए यह वक्त खास कमाई का होता हैं.
  2. दीपावली से सभी तरह के व्यापार में तेजी आती हैं क्यूंकि यह त्यौहार में हर चीज नयी आती है. लोग घर की सज्जा सज्जा, अपने कपड़ो, गहनों, खाने पीने सभी चीजों पर खर्च करते है.
  3. दीपावली से आपसी प्रेम बढता है जिससे सम्बंधों में मिठास आती हैं.
  4. साफ सफाई का बहुत महत्व हैं जिससे घरो तथा आस पास के परिवेश स्वच्छ होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी हैं. इस त्यौहार के बहाने साल में एक बार पुरे घर की सफाई हो जाती है, उनमे नया रंग करा दिया जाता है. यह त्यौहार न हो तो ऐसा होना मुश्किल है.
  5. कुटीर उद्योगों के लिए भी दीपावली का त्यौहार खुशियाँ लाता हैं. मिट्टी का समान, साज सज्जा का समान कुटीर उद्योग द्वारा बनाये जाते है, जिनसे उनकी जीविका चलती है.

दीपावली की हानियाँ (Diwali Nuksaan):

  1. फटाखों के कारण प्रदूषण फैलता हैं.
  2. दीपकों में फिजूल तेल जलता हैं
  3. अत्यधिक मिष्ठान और पकवान से स्वास्थ्य बिगड़ता हैं.
  4. लाइट्स की सजावट के कारण विद्युत् उर्जा की बरबादी होती हैं.
  5. फिजूल पानी बहाया जाता हैं.
  6. दिखावा के चक्कर में लोग फिजूल खर्च करते है.

जहाँ लाभ होते हैं वही हानियाँ भी होती हैं  . दीपावली एक बड़ा त्यौहार हैं जो अपने साथ अपार ख़ुशी और प्रेम लेकर आता हैं पर सावधानी और विचार के साथ इसे मनाये तो यह हानि नहीं देता अपितु खुशहाली देता हैं.

दिवाली त्यौहार पूजा विधि एवम शायरी 2019 (Diwali Festival Puja Vidhi, story, Shayari In Hindi)

भारत में त्यौहारो का अत्यधिक महत्व हैं. इन में चौमासा या चातुर्मास में आने वाले ये त्यौहार अधिक पूजा पाठ एवम मान्यताओं से भरे पुरे होते हैं. सभी त्यौहार की अपनी अलग विशेष बात एवम धार्मिक मान्यता होती हैं जिसके अनुसार हर धर्म जाति का व्यक्ति इसे मनाता हैं. इन्ही त्यौहारों में विशेष त्यौहार हैं दिवाली.

सभी अपनी मान्यतानुसार दिवाली का यह त्यौहार मनाते हैं. देश की आर्थिक स्थिती में इन त्यौहारों का विशेष महत्व होता हैं. इन दिनों बाजारी का माहौल बढ़ जाता हैं जिससे धन की आवाजाही होती हैं जिससे आर्थिक विकास होता हैं. धन तिजौरी से बाहर निकल कर व्यक्तिगत एवम सार्वजनिक विकास में लगता हैं. इस प्रकार केवल हँसी ख़ुशी की दृष्टि से नहीं बल्कि आर्थिक विकास की दृष्टि से भी त्यौहारों का महत्व होता हैं.

दीपावली शब्द में ही इसका अर्थ हैं दीपो की आवली अर्थात जगमग दीपो की माला. प्रकाश का त्यौहार जो हमें अन्धकार से दूर प्रकाश की तरफ जाने का संकेत देता हैं.इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं. यह पर्व व्यापारियों के लिए नए वर्ष का दिन होता हैं. इस दिन सभी व्यापारी वर्ग अपने लेखा जोखा को बदलते हैं.

यह भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक हैं. इस त्यौहार में जितनी रौनक होती हैं उतना ही व्यापार बढ़ता हैं. त्यौहारों का मुख्य उद्देश खुशियाँ लाना तो हैं ही लेकिन व्यापार की दृष्टि से भी त्यौहार अहम् होते हैं. इन दिनों बाजारी में जोश आता हैं जिससे हर एक छोटे बड़े व्यापारी को व्यापार का मौका मिलता हैं. छोटा व्यापारी तो केवल इन्ही दिनों की आजीविका पर पूरा वर्ष निर्भर करता हैं.यही कारण हैं कि देश के नागरिको से गुजारिश की जाती हैं कि त्यौहार में स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करें. इससे व्यापार बढ़ता हैं. देश का पैसा देश में ही रहता हैं और कुटीर उद्योगों को मुनाफा होता हैं इससे देश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत होती हैं.

  • दिवाली का महत्व ( Diwali Ka Mahtva)

दीपावली प्रकाश का त्यौहार हैं जो यह सीख देता हैं कि व्यक्ति के जीवन में सुख दुःख सदैव आता हैं लेकिन टिकता नहीं हैं इसलिए मनुष्य को वक्त की दिशा में आगे बढ़ते रहना चाहिए. न दुःख से टूटना चाहिए और ना ही सुख का घमंड करना चाहिए. दिवाली का महत्व ही यही हैं जो उसकी पौराणिक कथाओं में छिपा हुआ हैं कैसे भगवान का स्वरूप होते हुए भी राम, लक्ष्मण एवम सीता को जीवन में कष्ट सहना पड़ा क्यूंकि इसका अहम् उद्देश्य था जन कल्याण को जीवन के कर्मो का सन्देश देना साथ ही रावन जैसे ज्ञानी परन्तु अहंकारी का उद्धार करना. इस त्यौहार के पीछे जिस राम के चरित्र का वर्णन हैं वो मनुष्य जीवन का आधार हैं और रावण का चरित्र भी मनुष्य को यही सीख देता हैं कि कोई कितना भी ज्ञानवान क्यूँ न हो अगर घमंड के बिछौने पर सोयेगा तो उसका अंत निश्चित हैं. इस प्रकार यह प्रकाश पर्व मनुष्य को अन्धकार से प्रकाश की तरफ जाने का संकेत देता हैं.

दिवाली की कथा या कहानी (Diwali Story )

  • क्यूँ की जाती हैं दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा ?

पौराणिक कथाओ के अनुसार राक्षस राज बलि ने अपने शौर्य के बल पर देवी लक्ष्मी एवम अन्य कई देवी देताओ को बंधक बना लिया था. कई दिनों तक वे सभी राजा बलि के बंधक थे, जिसके बाद इसी कार्तिक माह की अमावस्या को भगवान विष्णु ने सभी देवी देवताओं एवम लक्ष्मी जी को स्वतंत्र करवाया. वहाँ से निकल कर सभी देवी देवता एवम लक्ष्मी जी क्षीरसागर पहुँचे एवम गहरी निद्रा में सो गए. इसलिए पुराणों में यह कहा गया हैं कि दिवाली उत्सव में घरों में साफ़ सफाई होना चाहिये, ताकि देवी लक्ष्मी उस दिन क्षीरसागर ना जाकर भक्तो के घरो में ही सो जाये. जहाँ भगवान का वास होता हैं वहाँ दरिद्रता नहीं होती हैं और वही धन का आगमन होता हैं और आज के समय में खुशियों का दूसरा नाम धन प्राप्ति ही हैं.

  • इस सन्दर्भ में एक और कथा कही जाती हैं

राजा बलि ने तीनो लोको में अपना अधिपत्य करने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करने का निर्णय लिया जिससे परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु से सहायता मांगने गये. तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के पास भिक्षा की इच्छा से पहुँचे. राजा बलि ने बोला आपको जो चाहिये मैं देने का वचन देता हूँ. वामन देव ने कहा मुझे तीन पग भूमि चाहिये. राजा बलि ने दान दे दिया. वामन देवता ने अपना विशाल रूप धर कर एक पग में पृथ्वी, दुसरे में स्वर्ग को माप लिया एवम तीसरा पग कहा रखु ऐसा प्रश्न किया. तब बलि ने कहा आप अपना तीसरा पग मेरे मस्तक पर रखे. राजा बलि की दान प्रियता को देख भगवान प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान माँगने को कहा. तब राजा बलि ने कहा कि वे अगले तीन दिनों तक तीनो लोको में अपना अधिपत्य चाहते हैं और इन तीन दिनों में सभी जगह जश्न हो एवम माता लक्ष्मी की पूजा की जाये और इन तीनो दिन तक माता लक्ष्मी अपने भक्तो के घर में निवास करें.

इस प्रकार उस दिन से प्रति वर्ष दीपावली का यह त्यौहार मनाते हैं इसलिए माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व पुराणों में मिलता हैं.

  • दीपावली को प्रकाश का त्यौहार क्यूँ कहते हैं ?

माता कैकई के हठ के कारण भगवान राम, देवी सीता एवम भाई लक्ष्मण को चौदह वर्षो के वनवास के लिए जाना पड़ा. उस दौरान लंका पति रावण ने देवी सीता का अपहरण कर लिया. अपनी अशोक वाटिका में बंधी बना लिया. भगवान राम ने रावण से युद्ध किया. देवी सीता को सह सम्मान वापस अपने साथ अयोध्या लेकर गए. इस तरह वनवास जीवन में कई कठिनाईयों का सामना करने के चौदह वर्ष बाद जब वे अपनी नगरी अयोध्या पहुँचे. उस दिन अमावस्या की काली रात थी. उस अन्धकार को मिटाने के लिए सभी प्रजा जनों ने दीप प्रज्ज्वलित कर अपने राजा राम, रानी सीता एवम लक्ष्मण का स्वागत किया.

इस प्रकार इसे प्रकाश का पर्व कहा जाता हैं.

मनुष्य जीवन में कई कठिनाइयाँ एवम दुःख आते हैं जिनसे बाहर निकल उसे कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना होता हैं. दीपावली का यह पर्व इसी बात का सन्देश देता हैं कि जीवन सुख दुःख से घिरा हुआ हैं लेकिन यह दोनों ही जीवन भर नहीं होते बल्कि आते जाते रहते हैं इसलिए मनुष्य को अडिगता से इसका स्वीकार करना चाहिये और आगे बढ़ते रहना चाहिये.

  • दिवाली पूजन विधि ( Diwali puja vidhi)

दिवाली में देवी लक्ष्मी की पूजा का महत्व निकलता हैं. लक्ष्मी जी स्वच्छ स्थानों पर ही वास करती हैं इसलिए दिवाली का उत्सव घर की सफाई से ही शुरू हो जाना चाहिये :

अगर आप घर में परिवारजनों के साथ बिना पंडित के पूजा कर रहे हैं तो केवल इस लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं :

ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥

लक्ष्मी पूजा विधि

  1. स्वच्छ पूजा योग्य स्थान अथवा घर का मंदिर स्थान, अगर इशान कोण में हो तो अति उत्तम स्थान माना जाता हैं का चयन करे.
  2. स्थान को पवित्र करे एवम पवित्र आसान बिछाये.
  3. सबसे पहले लक्ष्मी जी की प्रतिमा अथवा नवीनतम चित्र को पूजा स्थान पर रखे.
  4. पूजा के लिए सभी सामग्री एकत्र करे जैसे कमल फुल, अबीर, गुलाल, कुमकुम, सिंदूर, कलश, नारियल, अक्षत, नैवेद्य, दीपक, पंचामृत, जल , गंगा जल आदि.
  5. सबसे पहले गणपति जी एवम कलश की पूजा करें.
  6. माता लक्ष्मी को कमल पुष्प पर आसीत करें.
  7. माता लक्ष्मी का आव्हान करे.
  8. जल से शुद्ध करें. माता लक्ष्मी के चरणों को जल से धोयें.
  9. पंचामृत से शुद्ध करें. गुलाबजल एवम गंगा जल से स्नान करें.स्वच्छ जल से शुद्ध करें.
  10. वस्त्र चढायें.
  11. आभूषण चढायें.
  12. चन्दन, सिंदूर, कुमकुम, अबीर, गुलाल, इत्र, अक्षत/ चावल एवम पुष्प जिसमे, कमल एवम गुलाब के पुष्प हो तो ज्यादा अच्छा अर्पित करें.
  13. माता लक्ष्मी की पूजा के बाद घर की तिजौरी, दुकान के गल्ले एवम भोजन कक्ष आदि की पूजा भी करें.
  14. पूजा के बाद दीप प्रज्ज्वलित करें.
  15. नेवेद्य अर्पित करें.
  16. दीपक एवम नैवेद्य को आचमनी में जल लेकर तीन बार उसके चारो तरफ घुमाये इस प्रकार जल अर्पित करें.
  17. इसके बाद सभी परिवार जनों के साथ आरती करें.
  18. भगवान के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले. अपनी गलतियों की क्षमा मांगे. अपनी मनोकामना कहे.
  19. पूजा एवम आरती के बाद घर के सभी बड़ो का आशीर्वाद ले.
  20. सभी को प्रशाद दे.

इस प्रकार अपने परिवार जनों के साथ दिवाली की पूजा करें.दिवाली के दिन कई लोग अपने घरो में सत्यनारायण की कथा भी करवाते हैं. 

Diwali Festival Celebration :

वर्तमान समय में सभी त्यौहारों का रूप बदलता जा रहा हैं. समय की व्यस्तता एवम आधुनिकता के कारण त्यौहार का रूप बदल रहा हैं. इस प्रकार कई हर त्यौहार के लाभ एवम हानि के बिंदु भी सामने आने लगे हैं.

दिवाली के शुभ लाभ ( Diwali Shubh Labh):

  • दीपावली एक बड़ा त्यौहार माना जाता हैं. हिन्दू परिवारों में इसका बहुत अधिक महत्व होता हैं इस कारण पुरे परिवार जन इस त्यौहार को मिलकर मनाते हैं. इस कारण नौकरी अथवा पढाई के कारण दूर गए घर के सदस्य त्यौहार के लिए घरआते हैं. इससे बढ़ती दूरियाँ कम होती हैं.
  • नौकरी पढाई एवम कई निजी समस्याओं के कारण लोगो में मानसिक तनाव बढ़ रहा हैं ऐसे में दिवाली जैसे त्यौहार हमेशा सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं.
  • व्यापार में तेजी आती हैं बड़े- बड़े व्यापारियों के साथ- साथ छोटे-छोटे व्यापार भी तेजी से चलते हैं और ये छोटे- छोटे व्यापारी इन त्यौहारों के दिनों में ही साल भर की कमाई कर पाते हैं. इसलिए कहा जाता हैं दीपावली में चाइनिस माल लेने की बजाय इन छोटे व्यापारियों से स्वदेशी माल लेना चाहिये. इससे देश का पैसा देश में रहता हैं और गरीब परिवारों की आजीविका बढ़ती हैं. मिट्टी के दीपक लेना चाहिये.
  • सबसे अच्छी परंपरा सफाई की हैं. दिवाली के समय सफाई का बहुत महत्व होता हैं. इससे घरो का साल भर का कचरा घर से बाहर निकलता हैं. घरो की सफाई के साथ- साथ रिसाइकिलिंग के लिए रद्दी एवम अन्य सामान घरो से बाहर आता हैं. इससे बीमारी भी दूर होती हैं.
  • दीपावली के कारण आपसी मेल मिलाप बढ़ता हैं इससे समाज में एकता आती हैं.

दीपावली की हानियाँ :

  • दीपावली में लंबी छुट्टी दी जाती हैं इसका गलत प्रभाव पड़ता हैं.
  • आज के समय में पूजा पाठ एवम आस्था का स्थान दिखावे ने ले लिया हैं जिस कारण अनावश्यक खर्च होते हैं, बिजली एवम पानी जैसे मूल्यवान चीजो का दुरपयोग बढ़ गया हैं.
  • फ़िज़ूल खर्ची के कारण परिवारों के बीच मतभेद उत्पन्न होता हैं क्यूंकि सभी की सोच अलग-अलग होती हैं.
  • फटाखो को जलाने की परंपरा बढ़ती जा रही हैं जिसके कारण व्यय, दिखावा हो बढ़ ही रहा हैं लेकिन सबसे ज्यादा प्रदुषण एवम हादसे बढ़ गए हैं.
  • हर घरों में दीपो के अलावा लाइटिंग से प्रकाश करने का फैशन बढ़ता जा रहा हैं. दीपक भी आवश्यक्ता से अधिक जलाकर तेल का एवम लाइटिंग के कारण बिजली का नुकसान हो रहा हैं.
  • अधिक पकवान बनने के कारण स्वास्थ्य ख़राब होता जा रहा हैं.

इस प्रकार हर त्यौहार के कई लाभ हैं तो हानियाँ भी हैं. किसी भी चीज में अगर अधिकता होने लगती हैं तो वह हानि ही पहुँचाती हैं. आज के वक्त में हम सभी पढ़े लिखे हैं हमें हर त्यौहार सादगी से मनाना चाहिये इसका मतलब यह नहीं कि हम त्यौहार मनाना ही बंद कर दे क्यूंकि त्यौहार प्रेम के साथ- साथ देश के आर्थिक स्तर को बढ़ाने  में मदद करते हैं. समान्यतः एकता एवम आर्थिक विकास इन दोनों बिन्दुओं को ध्यान में रखकर ही हर धर्म में त्यौहारों की रचना की गई हैं. दीपावली के महत्व, लाभ एवं नुकसान को विस्तार से यहाँ पढ़ें.

इस प्रकार हम सभी को दिवाली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ एक सीमा में रहकर मनाना चाहिये.

दिवाली पर शायरी ( Diwali Shayari )

  • जगमग दीपो की माला
    चारो और हैं निर्मल उजाला
    देहलीज पर सजी हैं सुंदर रंगौली
    मीठे पकवानों सी हैं सबकी बोली
    चलो भूले मत भेद दिल के
    दीपावली मनाये आज फिर मिल के

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  • दोस्तों की मची हैं धूम
    कर रहे हैं बूमाबुम
    मस्त सजेगी ये दिवाली
    साथ में हैं नयी नवेली घरवाली

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  • मंगल बेला आई
    करो देवी का सत्कार
    धन धान मिलेगा अपार
    निर्मल मन से करो नमस्कार

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  • आया हैं दीपो का त्यौहार
    तैयारी करी हैं बेशुमार
    बस अब हैं यारों का इन्तजार
    आयेंगे अपने तब ही सजेगी बहार

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  • दीपक की ज्वाला सा तेज हो
    घर में सुख समृद्धि का समावेश हो
    करते हैं भगवान से दुआ
    हर कष्ट जीवन के दूर हो

दिवाली बधाई सन्देश (Deepawali  Wishes)

दूर बैठे किसी कौने से,
अपनों को याद करते हैं .
छुट्टी नहीं मिली तो क्या हुआ,
यहीं से हैप्पी दिवाली कह देते हैं .

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  • बचपन की उस दीवाली में अपनों का मैला था आज कैसा ये दिन आया मैं अकेला बैठा दिवाली मनाया

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  • पहली दीपावली का आनंद हैं मेरी प्यारी बेटी मेरे संग हैं उसकी किलकारी में हैं जादू समझ नहीं आता आज ज़माने से क्या कह दू

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  • यारों का यारना था वो दिवाली का जमाना आज बैठे हैं दफ्तर की कुर्सी पर कभी नुक्ड़ पर बैठ पटाखे फोड़ा करते थे माँ की बनाई गुजिया लेकर घर से भागा करते थे आतिशबाजी का नजारा देखने छत पर बैठा करते थे

कैसे बीत गये वो पल एक झपक में

जब पड़ौसी के घर बम गिराने पर वो हमे घुरा करते थे

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  • दिवाली की मिठाई खाये जमाना बीत गया माँ के साथ रंगौली बनाये जमाना बीत गया हर पल याद आते हैं वो लम्हे जब दिवाली में नये कपड़े लाती थी खूब सुंदर सजकर दीपक जलाती थी पापा के साथ फुलजड़ी जलाकर

भाई से लड़ फोड़ना सीखती थी

याद आती हैं वो दिवाली

जो बरसो पहले मैं मनाया करती थी

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