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पत्‍थलगड़ी के स्‍वयंभू नेता ग्रामीणों के खलनायक कैसे बन गये

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#Khunti : पत्थलगड़ी के कट्टर समर्थक भी हैरान हैं कि आखिर दो-चार दिन में ही उनका कथित साम्राज्य खूंटी के चितरामू में कैसे ध्वस्त हो गये. जो ग्रामीण कल तक युसूफ पूर्ति, बलराम समद, जॉन जुनास तिड़ू सहित अन्य पत्थलगड़ी से उपजे स्वयंभू नेताओं को अपना हीरो मान रहे थे, अचानक वे उनकी नजरों में वे कैसे खलनायक बन गये. एक ओर प्रशासन का भय, वहीं दूसरी ओर अब ग्रामीणों से भी मुंह छिपाने की मजबूरी. यही कारण हैं कि सभी नेता चंपत हो गये.

गांव में विकास का रोडमैप तैयार

अब पत्थलगड़ी के आतंक से मुक्त हुए गांवों के विकास की बयार बहेगी. हर व्यक्ति को नल से पानी मिलेगा. हर घर बिजली से रोशन होगा. ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराये जायेंगे. गांव में पीसीसी सड़कें बनायी जायेंगी. इसके अलावा इन गांवों को लोगों को हर सहयोग जिला प्रशासन करेगा. शनिवार को खूंटी प्रखंड की सिलादोन पंचायत के चितरामू गांव से इसकी शुरुआत होगी.

ज्ञात को कि गुरुवार को चितरामू की ग्रामसभा ने गैर पंरपरागत पत्थ्लगड़ी को उखाड़ दिया था. एसडीओ प्रणव कुमार पाल ने बताया कि चितरामू में शनिवार को चलें विकास की ओर कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सभी विभागों के स्टाल लगाये जायेंगे. गांव के सभी घरों में जलापूर्ति के पाइप कनेक्शन, रासोई गैस कनेक्शन, राशन कार्ड, सभी प्रकार की पेंशन सहित अन्य जनोपयोगी योजनाओं की शुरुआत की जायेगी.

पत्थलगड़ी से ग्रामीणों को काफी नुकसान हुआ

डीसी डीसी सूरज कुमार ने पत्थलगड़ी के चंगुल में फंसे ग्रामीणों के मुख्यधारा में लौट आने पर हर्ष व्यक्त किया और कहा कि गांव के लोगों में आयी जागरुकता का परिणाम है. डीसी कुमार ने कहा कि पत्थलगड़ी के स्वयंभू नेताओं ने ग्रामीणों को गुमराह कर दिया था. उनके बहकावे में आकर सरकारी योजनाओं के बहिष्कार किये जाने से ग्रामीणों को काफी नुकसान हुआ, लेकिन जब ग्रामीणों को अनुभव हुआ कि पत्थलगड़ी वाले नेताओं के साथ रहने में बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है, जबकि प्रशासन से मिल कर रहने से वे हर तरह से सुरक्षित हैं.

डीसी ने कहा कि चितरामू के ग्राम प्रधान अशोक मुंडा ने पत्थलगड़ी से नुकसान पर भावुक होते हुए कहा कि पत्थलगड़ी से गांव वालों को काफी परेशानी हुई. ग्रामसभा की बात नहीं मानने पर सैकड़ों लोग तीर-धनुष और अन्य पारंपरिक हथियार लेकर घरों में आ धमकते थे. डर से गांव वालों को उनका साथ देना पड़ता था. अब जिला प्रशासन के प्रयास से गांव वालों के मन से पत्थलगड़ी नेताओं का खौफ कम हुआ है.

ग्राम प्रधान ने कहा कि भय से कोई बाहरी व्यक्ति गांव में नहीं आता था. बाहर के लोग हमलोगों पर हमला न कर दें, इस भय से गांव वाले भी कम ही कहीं आते-जाते थे. पत्थलगड़ी के नेताओं का भय दूर होने के बाद अब गांवों का सर्वांगीण विकास होगा और ग्रामसभा उसमें पूर्ण सहयोग करेगी. कल तक थे हीरो, अब बन गये विलेन जिस तेजी से गैर पारंपरिक पत्थलगड़ी का आतंक जिले में फैला, उसी रफ्तार से इसका पतन भी हो गया.

नेताओं के हश्र को देख ग्रामीणों को समझा में आने लगी की सही क्या है और गलत क्या, जो भी हो पर प्रशासन ने जिस ढंग से मामले को शांत किया और पूरे जिले को भयमुक्त बनाया, उसकी तारीफ आम जनता भी करती है. शहर के अधिकतर बुद्धिजीवियों का मानना है कि प्रशासन का कार्य काफी साहसिक और सफल है.

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