झारखंड: कोरोना रिपोर्ट के अभाव में इलाज के लिए अस्‍पतालों ने भटकाया, मौत के बाद आई जांच रिपोर्ट

झारखंड: कोरोना रिपोर्ट के अभाव में इलाज के लिए अस्‍पतालों ने भटकाया, मौत के बाद आई जांच रिपोर्ट

Ranchi: लॉकडाउन के अनलॉकिंग के साथ ही सब कुछ अनलॉक हो रहा है. झारखंड में हर रोज कोरोना संक्रमण अनलॉक हो गया है. अस्‍पतालों की बदइंतजामी अनलॉक हो गया है. मंत्री जी की जुबान भी अनलॉक हो गई हैं. बड़ी-बड़ी बातें कहकर निकल जाते हैं. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि निजी अस्पताल कोरोना मरीजों का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकते. ऐसा किया तो उनका निबंधन रद्द कर दिया जाएगा. लेकिन अब एक ऐसा ही वाक्‍या सामने आया है. सवाल है कि क्‍या मंत्री जी उन जिम्‍मेदार अस्‍पतालों का निबंधन सही में रद्द करा देंगे.

दैनिक भाष्‍कर की रिपोर्ट के अनुसार 30 जुलाई को रांची के पिस्का मोड़ के रहने वाले 50 साल के कोरोना मरीज की इलाज के अभाव में मौत हो गई. इसके पहले परिजन उसे लेकर पांच दिन तक कई निजी अस्पतालों का चक्कर लगाते रहे.

लेकिन निजी अस्‍पतालों ने यह कहकर भर्ती लेने से मना कर दिया क्योंकि उसकी रिपोर्ट नहीं आई थी. आखिरकार बुधवार रात उसकी मौत हो गई. गुरुवार सुबह उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई.

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परिजनों ने ने इस मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को दोषी बताया है. अब बड़ा सवाल है यह कि अगर रिपोर्ट नहीं आई तो मरीज कहां जाए. क्या उसका इलाज नहीं होगा.

परिजनों ने कहा कि मरीज में कोरोना लक्षण दिखने पर 27 जुलाई को गुरुनानक अस्पताल में सैंपल दिया. इसके बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी तो उसे लेकर देवकमल अस्पताल, गुरुनानक अस्पताल और राज अस्पताल सहित कई अस्पतालों के चक्कर काटते रहे. लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया. प्रशासन को भी कई बार फोन लगाया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया.

मजबूरन परिजनों ने घर पर ही ऑक्सीजन की व्यवस्था की. बुधवार रात तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसे पल्स हॉस्पिटल ले गए, जहां उसने दम तोड़ दिया. परिजनों का आरोप है कि जब शव लेकर रिम्स गए तो वहां एंबुलेंस से निकालने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ. कर्मचारियों को जब 3000 रुपए दिए तो उन्होने शव को एंबुलेंस से शीतगृह में पहुंचाया.

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निजी अस्पताल ने इलाज से इनकार किया तो निबंधन रद्द : स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीजों के साथ ही हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों का भी घर पर ही इलाज होगा. आईसीएमआर के दिशा-निर्देश के बाद सरकार इस पर विचार कर रही है. मंत्री गुरुवार को कोल्हान के डीसी-एसपी और सिविल सर्जन के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे. उन्‍होंने कहा कि आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों ने अगर चिह्नित बीमारियों की एवज में लाभुक से पैसे लिए तो उससे चार गुना रकम वसूली जाएगी. उस अस्पताल का निबंधन भी रद्द कर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी एनजीओ को सौंपी पी जा सकती है. सरकार इसपर विचार कर रही है. उन्होंने माना कि डॉक्‍टरों के साथ पारा मेडिकल स्टाफ की भी कमी है, इसलिए एनजीओ की मदद लेनी पड़ रही है. इस कमी को दूर करने के लिए सरकार रिटायर्ड डॉक्‍टर और पारा मेडिकल स्टाफ की अनुबंध पर नियुक्ति करना चाहती है.

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कोरोना इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रबंधन से मांगे 80 करोड़

कोरोना के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच धनबाद, एमजीएम जमशेदपुर और पलामू, हजारीबाग व दुमका मेडिकल कॉलेज में मशीन व उपकरणों की खरीद के लिए 80 करोड़ रुपए की मांग की है. स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने गृह एवं आपदा प्रबंधन सचिव को पत्र लिखकर कोविड कोष से यह राशि आवंटित करने को कहा है.

पत्र में पांचों मेडिकल कॉलेजों के लिए खरीदे जाने वाले उपकरणों की सूची भी भेजी गई है. इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रोटोकॉल निर्धारित किया है. इसके तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में 15.83 करोड़ के उपकरण खरीदे जाएंगे. इनमें सीसीयू यूनिट, वेंटिलेटर, सीसीयू बेड, सिरिंज इनफ्यूजन पंप, बाई-पैप वेंटिलेटर शामिल हैं. राज्य में अभी 215 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं. सरकार ने 300 वेंटिलेटेर की खरीद का ऑर्डर दिया है.

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