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हेमंत सोरेन बनाम निशिकांत दूबे: लगा रहे संगीन आरोप, भरोसा नहीं जांच एजेंसी पर

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Ranchi: झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन और गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे के बीच जंग तीखी हो चली है. जनता के दोनों जिम्‍मेदार जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. सोशल मीडिया पर यह जंग सरेआम लड़ी जा रही है. हेमंत सोरेन ने सांसद के डिग्री को फर्जी बताया. तो पलटवार करते हुए निशकांत दूबे ने सीएम हेमंत सोरेन का नाम मुंबई के एक रेपकांड से जोड़ दिया है. अब दोनों नेता अपने आरोपों को साबित करने के लिए अपनी पसंद की एजेंसी से जांच कराने की बात कह रहे हैं.  

हेमंत सोरेन का निशकांत दूबे पर आरोप

गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे की एमबीए की डिग्री फर्जी निकली है. इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय ने बिजेंद्र कुमार पांडेय नामक एक व्यक्ति की ओर से आरटीआइ के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से 1993 में निशिकांत दुबे नाम के किसी भी व्यक्ति ने पार्ट टाइम एमबीए की डिग्री हासिल नहीं की है. दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस संबंध में झारखंड पुलिस को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है.

ज्ञात हो कि झामुमो समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से निशिकांत दुबे की एमबीए की डिग्री को फर्जी बताते हुए सवाल उठाते रहे हैं. झामुमो पिछले कई दिनों से यह मामला उठा रहा है. देवघर में इस संबंध में मामला दर्ज करने के लिए एक व्यक्ति ने थाने में आवेदन भी दिया था. झामुमो ने दुबे पर चुनाव आयोग को भी गलत जानकारी देने का दोषी बताया है. सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा के नेता झूठे आडंबरों से लदे हैं. यह बात समय-समय पर प्रमाणित हो रही है.

निशिकांत दूबे ने कहा- मुंबई में रेप पिडि़ता की हत्‍या करा सकते हैं हेमंत सोरेन

इधर, दुमका उपचुनाव का समय नजदीक आते ही निशिकांत दुबे और सीएम हेमंत सोरेन में भी ट्वीटर पर जुबानी जंग तेज हो गई है. निशिकांत दुबे ने भी 2013 में महाराष्ट्र में दर्ज एक दुष्कर्म के आरोप का मामला उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरा है.

उस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी कहा है कि सीएम हेमंत सोरेन पद का दुरुपयोग करते हुए पुलिस और गुंडा तत्वों का इस्तेमाल कर पीडि़ता की हत्या करा सकते हैं.

अलग-अलग जांच एजेंसी पर भरोसा

हेमंत सोरेन और निशिकांत दूबे ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने के साथ-साथ इसे साबित करने के लिए जांच की मांग भी की है. दोनों नेताओं ने अलग-अलग एजेंसी से जांच कराने की मांग की है.

निशिकांत ने मुंबई मामले में सीबीआइ जांच की मांग की है. साथ ही महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया है कि पीड़िता द्वारा शिकायत वापस लिए जाने की वजहों की जांच करते हुए उस फाइल को फिर से खोला जाना चाहिए.

एक दिन पहले ही इस मामले को उठाते हुए निशिकांत दुबे ने ट्वीट किया था कि 2013 में महाराष्ट्र में एक महिला ने झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दुष्कर्म और इससे संबंधित विभिन्न धाराओं में बयान दर्ज कराया था.

पीड़िता ने बयान दर्ज कराने के 7 दिन बाद ही आरोप वापस ले लिया गया था. निशिकांत का आरोप है कि पीडि़ता को डरा-धमका कर मामला वापस लेने के लिए बाध्य किया गया था. निशिकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पीड़िता द्वारा बयान वापस लिए जाने के बावजूद ऐसे गंभीर मामलों को रफा-दफा नहीं किया जा सकता.

मंगलवार रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसपर री-ट्वीट करते हुए निशिकांत दुबे पर गलत आरोप लगाने के लिए मामला दर्ज कराने की बात कही थी. माना जा रहा है कि निशिकांत दुबे के खिलाफ झामुमो की ओर से शीघ्र मामला दर्ज कराया जा सकता है.

झामुमो ने कहा- सीबीआई पर भरोसा नहीं, राज्‍य सरकार की एसीबी करे जांच

इधर, झामुमो की ओर से पार्टी महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा है कि हमें केंद्र सरकार की जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है. इसलिए निशिकांत दूबे के फर्जी डिग्री मामले की जांच राज्‍य सरकार की जांच एजेंसी एसीबी से होना चाहिए.

नेताओं के बीच क्‍यों हो रहा है ट्विटर वॉर चर्चा यह भी है कि ट्विटर वार के पीछे कहीं न कहीं दुमका विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव भी है। कुछ दिन पहले सांसद निशिकांत दुबे की एमबीए की डिग्री को भी फर्जी बताते हुए झामुमों ने जांच की बात कही थी. इसके पहले सांसद पर देवघर में कागजों में हेराफेरी कर गलत तरीके से जमीन खरीदने का मामला दर्ज कराया गया था.

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