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स्‍थानीय नीति नहीं बदलेगी हेमंत सरकार, चुनाव में किये वादे पर यूटर्न

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Ranchi: सत्‍ता में आने के बाद झामुमो गठबंधन वाली हेमंत सोरेन सरकार अपने सबसे बड़े वादे से मुकर गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनाव के वक्‍त अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि स्‍थानीय नीति में बदला जाएगा. झामुमो ने अपने निश्‍चय पत्र में कहा था कि स्‍थानीयता एवं रोजगार नीति को स्‍थानीय लोगों के हितों के अनुसार बनाया जाएगा. सरकारी नौकरी में झारखंड के पिछड़ों को 27 प्रतिशत, आदिवासियों को 28 प्रतिशत दलित को 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा.

माले विधायक ने पूछा था तारांकित प्रश्‍न

सत्‍ता में आने के बाद अब हेमंत सोरेन की सरकार का कहना है कि अब स्‍थानीय नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. यह बात सरकार की ओर से माले विधायक विनोद सिंह को एक सवाल के जवाब में लिखित दिया गया है. विधायक ने तारांकित प्रश्‍न के द्वारा यह मामला उठाया था. उन्‍होंने अपने सवाल में लिखा था कि राम्‍य में लागू स्‍थानीय नीति में राज्‍य के खतियानी-रैयती युवाओं को नियोजन में संपूर्ण लाभ नहीं मिल रहा है. इसके बाद उन्‍होने इस प्रश्‍न में सरकार से पूछा था कि क्‍या सरकार स्‍थानीय नीति में आश्‍यक सुधार करने का विचार कर रखती है. हां तो कब तक? नहीं तो क्‍यों नहीं?

स्‍थानीय नीति में आवश्‍यक सुधार का कोई औचित्‍य नहीं

सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रभारी मंत्री की ओर से इसका जवाब दिया गया. लिखित जवाब में कहा गया कि खतियानी-रैयती युवाओं को नियोजन में संपूर्ण लाभ नहीं मिलने की बात अस्‍वीकारात्‍मक है. इस आलोक में स्‍थानीय नीति में आवश्‍यक सुधार का कोई औचित्‍य नहीं है. कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग खुद सीएम के पास है.

सरकार गठब के बाद शिबू सोरेन ने भी उठाया मामला

स्‍थानीय नीति में बदलाव और आरक्षण में संशोधन चुनाव के समय झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रमुख मुद्दा था. हर चुनावी भाषण में हेमंत सोरेन ने इसे प्रमुखता से कहते थे. इधर सरकार बनने के बाद 15 जनवरी को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कहा था कि स्‍थानीय नीति के लिए कट ऑफ डेट 1932 किया जाना चाहिए. तब इस पर मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर सीएम हेमंत सोरेन ने जवाब देने से इनकार कर दिया था.

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