झारखंड बजट पर भाजपा ने कहा- हेमंत सरकार वित्तीय कुप्रबंधन की शिकार

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Ranchi: हेमंत सरकार में राज्य के वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव द्वारा विधानसभा में पेश किए गए बजट पर प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के माध्यम से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि इस बजट राज्य के युवाओं, किसानों, महिलाओं, गरीबो सब को निराश किया है.

इसमे कुछ उम्मीद की किरण अगर है तो वह केंद्रीय सहायता से चलने वाली योजनाएं है. जिनका इस सरकार ने बड़ी चालाकी से नाम बदलकर अपना पीठ थपथपाने की कोशिश की है. उदाहरण केलिये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,आयुष्मान भारत योजना आदि का नाम बदलकर क्रेडिट लेने का प्रयास है.

दीपक प्रकाश ने कहा कि बजट में राज्य के ज्वलंत मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, ग्रामीण विकास, विधि व्यवस्था के साथ औद्योगिक विकास, लघु कुटीर उद्योग के विकास पर कोई सार्थक पहल नहीं की गई है.

एक तरफ यह सरकार लगातार केंद्र सरकार को दोष देती है जबकि बजट में किये गए अधिकांश प्रवधान केंद्रीय सहायता से ही पूरे होने की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार में माल महाराज के मिर्जा खेले होली की कहावत ही चरितार्थ हो रही है.

बजट भाषण में सतत विकास की बात कही गई है परंतु यह सरकार इसमे विश्‍वास नहीं करती. इस सरकार में योजनाएं बंद की गई. उन्होंने कहा कि यह सरकार पुरानी घोषणाओं को भी धरातल पर नहीं उतार सकी. बेरोजगारों के भत्ते का क्या हुआ. किसानों की ऋण माफी, एमएसपी पर धान खरीद सभी योजनाएं धरी रह गई.

आज पूरा विश्व भारत के वैज्ञानिकों की सराहना कर रहा है. कोविड महामारी नियंत्रण में भारत की सफलता बड़ी उपलब्धि है, परंतु सरकार ने अपनी कुव्यवस्था के बावजूद  पूरा श्रेय वित्त मंत्री जी ने राज्य के मुख्यमंत्री एवम स्वास्थ्य मंत्री को दिया है.

दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य की जनता जानती है कि 9 महीने तक गरीबों को मुफ्त चावल प्रति व्यक्ति 5 किलो केंद्र सरकार ने भेजे. यह सरकार तो इसे वितरण की जिम्मेवारी भी सही ढंग से नहीं निभा सकी. गरीबों, विधवा बहनों, किसानों के खाते में कोरोना काल मे नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने ही पैसे भेजे.

झारखंड सरकार वित्‍तीय कुप्रबंधन की शिकार

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय कुप्रबंधन की शिकार है. बजट राशि खर्च करने में अक्षम सरकार केंद्र को दोष देने में ही समय गवां दिया. युवाओं केलिये पिछले बजट में घोषित बेरोजगारी भत्ता नहीं मिला. किसानों की धान खरीद सरकारी दर पर नही हुए. कहा कि यह सरकार प्रवासी भाइयों का भी मजदूर कह कर अपमानित कर रही. ये प्रवासी भाई बहन राज्य केलिये महत्वपूर्ण हैं।जिनके हुनर कौशल का उपयोग राज्य सरकार नही कर सकी और ये फिर से और अधिक संख्या में राज्य से बाहर पलायन को मजबूर हुए.

उन्होंने कहा कि कोविड केलिये केंद्र सरकार ने जो 200 करोड़ की सहायता दी उसका सरकार ने बंदरबांट कर दिया.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के विकास दर को कम दिखा रही जबकि कोरोना काल मे अपनी सरकार का विकास ज्यादा. यह अपने आप मे विरोधाभासी है. पैसे खर्च हुए नहीं, बेरोजगारी बढ़ती गई बुनियादी सुविधाओं का विकास हुआ नहीं फिर कौन दी जादू की छड़ी ने करामात किया.

उन्होंने कहा कि इस बजट में भी अधिकांश आय केंद्रीय सहायता और केंद्रीय करों से ही दिखाया गया है फिर जनता के बीच केंद्र को कोसने में यह सरकार कोई कसर नहीं छोड़ती.

बजट भाषण में मिनिरल कॉरिडोर की बात पर बोलते हुए श्री प्रकाश ने कहा कि हेमंत सरकार अपने गठन के साथ ही अवैध मिनिरल कॉरिडोर चला रही.

इस सरकार में अवैध उत्खनन की बात सत्तापक्ष के विधायक ही लगा रहे. पत्थरों के अवैध उत्खनन में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि संलिप्त हैं और मुख्यमंत्री मौन साधे हुए हैं. मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिये और इसकी सीबीआई से जांच की अनुशंसा करनी चाहिये. क्योंकि यह कारोबार अंतरराज्यीय नही बल्कि अंतर राष्ट्रीय भी है.

दीपक प्रकाश ने कहा कि यह सरकार पिछले बजट की राशि भी नही खर्च कर सकी फिर नए बजट से क्या उम्मीद किया जाए. मुख्यमंत्री दाल भात योजना की लूट क्या गुरुजी योजना में बंद हो जाएगी.

उन्‍होंने कहा कि बजट में कुल मिलाकर गोल गोल बातों से जलेबी बनाई गई है जिससे राज्य की जनता का कुछ भी भला नहीं होने वाला. यह सरकार जनता का भरोसा खो चुकी है.

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