बंदरों ने जगाई कोरोना वैक्सीन पर बड़ी उम्मीद

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New Delhi: बंदरों पर कोरोना वैक्सीन के ट्रायल से वैज्ञानिकों की उम्मीदें बहुत बुलंदी पर हैं. क्लीनिकल ट्रायल में जिन बंदरों पर कोरोना वायरस और वैक्सीन की डोज़ दी गई थी, उससे उनके शरीर में ऐसी इम्यूनिटी बढ़ी कि वायरस बेअसर साबित हुआ. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में बंदरों के दो अलग-अलग ग्रुप पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया गया. बंदरों पर ट्रायल कामयाब, अब इंसानों पर ट्रायल की बाकी है.

कुल 44 बंदरों को कोरोना की अलग-अलग ट्रायल वैक्सीन दी गई. 25 बंदरों को 6 तरह की कोरोना ट्रायल वैक्सीन दी गई. वैक्सीन वाले 25 बंदरों पर वायरस का असर ना के बराबर रहा. 10 बंदरों को कोरोना की नकली ट्रायल वैक्सीन दी गई. नकली वैक्सीन वाले बंदरों की नाक और फेफड़े संक्रमित हो गए. 9 बंदरों के सूमह को कोरोना की ट्रायल वैक्सीन दी गई. ट्रायल वैक्सीन वाले बंदर पहली बार संक्रमण से ठीक हो गए.

इसके बाद उन्हीं 9 बंदरों को दोबारा संक्रमित किया गया. दूसरी बार 9 बंदर कोरोना से संक्रमित ही नहीं हुए. यानी ट्रायल वैक्सीन से बंदरों की इम्यूनिटी काफ़ी बढ़ गई. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कोरोना की ट्रायल वैक्सीन के नतीजों से संतुष्ट है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अब अब कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल चाहती है. हालांकि, बंदरों पर कामयाब हुए ट्रायल के नतीजों के बाद इंसानों पर इसका क्या असर होगा, इस पर वैज्ञानिकों की टिप्पणी अहम है.

  • बंदरों में एक प्राकृतिक इम्यूनिटी पैदा हो गई
  • जिसने उन्हें दोबारा संक्रमित होने से बचाया
  • 25 बंदरों पर 6 वैक्सीन प्रोटोटाइप का प्रयोग किया
  • 25 बंदरों और 10 बिना वैक्सीन वाले बंदरों को वायरस के संपर्क में लाया गया
  • बिना वैक्सीन वाले बंदरों के शरीर में वायरस का गहरा संक्रमण देखने को मिला
  • वहीं वैक्सीन वाले बंदर काफी हद तक सुरक्षित रहे
  • वैक्सीन वाले 8 बंदर वायरस से पूरी तरह बचे रहे

अभी इन नतीजों के आधार पर इंसानों को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता. ये ट्रायल वैक्सीन मनुष्यों के शरीर में कैसी इम्यूनिटी पैदा करेगी. ये अभी देखने वाली बात है, लेकिन इन नतीजों से उम्मीदें ज़रूर बढ़ी हैं.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने जो ट्रायल किया है, उसके कई पहलू हैं. दुनिया में दर्जनों तरह के बंदरों की प्रजातियां पाई जाती हैं. वैक्सीन का असर अलग-अलग देशों के बंदरों की अलग-अलग इम्यूनिटी पर निर्भर करता है. फिलहाल मकाऊ प्रजाति के बंदरों पर ट्रायल वैक्सीन का परीक्षण किया गया है. लेकिन, बंदरों पर किए गए ट्रायल ने वैज्ञानिकों को एक ख़ास नतीजे पर पहुंचाया है.

  • वैज्ञानिकों ने वैक्सीन वाले बंदरों में इम्यूनिटी बढ़ती हुई देखी
  • वैक्सीन वाले बंदरों के शरीर में वायरस को लेकर एंटीबॉडीज़ बने
  • बंदरों के एंटीबॉडीज़ ने ही कोरोना वायरस से लड़ने में मदद की
  • बंदरों में बने एंटीबॉडीज़ ने वायरस के प्रति एक कवच तैयार किया
  • एक बार ठीक होने के बाद दूसरी बार भी एंटीबॉडीज़ ने ही बचाया

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक बंदरों पर वैक्सीन के ट्रायल को लेकर कुछ ख़ास बातों से उत्साहित हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक जिन बंदरों को वैक्सीन दी गई, उन्हें 35 दिनों बाद फिर संक्रमित किया गया. लेकिन, वैक्सीन से बंदरों के शरीर में एंटीबॉडी इस तरह विकसित हो चुके थे कि एक बार ठीक होने के 35 दिन बाद भी वायरस बेअसर रहा. कुछ बंदरों को थोड़ी सी दिक्कत ज़रूर हुई, लेकिन ज़्यादातर पर वायरस का दूसरी बार कोई असर नहीं हुआ.

वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि कोरोना की ट्रायल वैक्सीन इम्यूनिटी को काफ़ी तेज़ी से बढ़ाती है. इसकी वजह से वायरस जब भी शरीर पर हमला करता है, तो एंटीबॉडीज़ उसे ख़त्म करने में कामयाब हो जाती हैं. हार्वर्ड और बॉस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बंदरों पर वैक्सीन का ट्रायल किया है. अब सभी वैज्ञानिकों का ये मानना है कि शुरुआती नतीजों के बाद ये देखना ज़रूरी है कि बंदरों पर लंबे समय तक असरदार रहने वाली ये वैक्सीन इंसानों के शरीर में कितने दिनों तक असरदार रहेगी. क्योंकि, अगर कोई वैक्सीन लंबे समय तक असरदार नहीं रहती है तो वायरस दोबारा हमला कर सकता है और वैक्सीन लगने बावजूद संक्रमण दोबारा हो गया, तो ऐसी वैक्सीन कारगर नहीं कहलाती.

इसलिए, बंदरों के बाद इंसानों पर होने वाले ट्रायल का इंतज़ार है. क्योंकि, जानवरों और इंसानों की इम्यूनिटी में फ़र्क होता है. हालांकि, स्वभाव से लेकर तमाम चीज़ों में बंदरों को इंसानों के बहुत करीब माना गया है. उन्हें इंसानों का पूर्वज भी कहते हैं. इसीलिए, ये उम्मीद बढ़ जाती है कि जो वैक्सीन बंदरों पर असरदार है, वो इंसानों पर भी शायद उतनी ही असरदार साबित हो.

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