विक्रम साराभाई की 100वीं जयंती पर गूगल ने बनाया डूडल

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New Delhi: चंद्रयान-2, जहां 20 अगस्त तक चंद्रमा पर पहुंचने और 7 सितंबर को पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह पर ‘विक्रम’ नामक एक लैंडर को छोड़ने के लिए तैयार है, वहीं सोमवार को डॉ विक्रम साराभाई की 100 वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक को याद किया.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी जिसने आने वाले दिनों में कई वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ दिए.

इसरो की वेबसाइट के अनुसार, 12 अगस्त, 1919 को अहमदाबाद में जन्मे साराभाई अंबालाल और सरला देवी के आठ बच्चों में से एक थे.

इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने अहमदाबाद में गुजरात कॉलेज से मैट्रिक किया.

उसके बाद, वह इंग्लैंड चले गए और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट जॉन कॉलेज में दाखिला लिया. साराभाई तब 1940 में कैम्ब्रिज से नैचुरल साइंसेज में ट्राइपॉस प्राप्त करने गए.

द्वितीय विश्व युद्ध के आगे बढ़ने के साथ, साराभाई भारत लौट आए और बैंगलोर में भारतीय विज्ञान संस्थान से जुड़ गए और नोबेल विजेता सी.वी. रमन के मार्गदर्शन में ब्रह्मांडीय किरणों में अनुसंधान शुरू किया.

भारत में परमाणु विज्ञान कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ होमी जहांगीर भाभा ने साराभाई को भारत में पहला रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन स्थापित करने में सहयोग दिया.

यह सेंटर अरब सागर के तट पर तिरुवनंतपुरम के पास थुंबा में स्थापित किया गया क्योंकि यह भूमध्य रेखा के निकट है.

तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) आज इसरो का बड़ा केंद्र है, जहां सैटेलाइट लॉन्च वाहनों और साउंडिंग रॉकेटों की डिजाइन और विकास गतिविधियां होती हैं और लॉन्च ऑपरेशन के लिए तैयार किया जाता है.

विज्ञान शिक्षा में रुचि रखने वाले, साराभाई ने 1966 में अहमदाबाद में एक सामुदायिक विज्ञान केंद्र की स्थापना की. आज, केंद्र को विक्रम ए. साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र कहा जाता है.

साराभाई को 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक को श्रद्धांजलि देने के लिए, इसरो ने उनकी 100वीं जयंती पर उनके नाम पर एक पुरस्कार की घोषणा की है.

मृणालिनी साराभाई से शादी करने वाले और प्रसिद्ध नृत्यांगना मल्लिका साराभाई के पिता विक्रम साराभाई का 30 दिसंबर, 1971 को कोवलम, तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया.

उनके बेटे कार्तिकेय साराभाई दुनिया के अग्रणी पर्यावरण शिक्षकों में से एक हैं.

कहने की जरूरत नहीं है कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरा है.

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