भारत में शामिल होगा पीओके, कश्मीर के बड़े नेता ने दिया बड़ा बयान

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New Delhi: गुलाम कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान का टिके रहना अब मुश्किल है. गुलाम कश्मीर (पीओके) को पाकिस्तान से आजादी दिलाने और वापस भारत के साथ जाने की बात अब गुलाम कश्मीर (पीओके) के आंदोलनकारी भी उठाने लगे हैं. यही बात इमरान खान की परेशानी का बड़ा सबब बन रही है। इमरान सरकार और पाक फौज ने गुलाम कश्मीर (पीओके) को डंपिंग ग्राउंड बना दिया है.

कोरोना महामारी के बीच यहां के लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है. गुलाम कश्मीर (पीओके) में न रोटी-रोजगार न अस्पताल और स्कूल. यही बड़ी वजह है कि एक बार फिर गुलाम कश्मीर को पाक के नापाक पंजे से निकाल कर भारत में विलय की मांग लंदन से उठी है.

इसका आगाज लंदन से हुआ है. कश्मीर पर भारत के रुख का इंग्लैण्ड की लेबर पार्टी लंबे समय से करती रही है. कुछ दिन पहले लेबर पार्टी के नेता किएर स्टारमर्स ने कहा था कि भारत के संवैधानिक मामलों पर केवल भारत की संसद ही फैसला ले सकती है. अगर कश्मीर पर पाकिस्तान को कोई आपत्ति है तो वो भारत के साथ बैठकर बातचीत से सुलझाने की कोशिश करे.

किएर स्टारमर्स के इस बयान का यूनाईटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी ने समर्थन किया है. यूनाईटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) की विदेश मामलों की कमेटी के प्रेसिडेंट उसमान कयानी ने लेबर पार्टी के साथ एक साझा बयान भी जारी किया है.

यूकेपीएनपी नेता कयानी ने कहा है कि किसी एक वर्ग को इस बयान से आपत्ति हो सकती है लेकिन कश्मीर के बाकी मुसलमानों और हिंदुओं ने व्यापक तौर पर इसका समर्थन किया है और उनमें खुशी भी है.

कयानी ने कहा है कि हम लोगों को उनकी सियासी राय जाहिर करने पर रोक नहीं लगा सकते. लेकिन हम किसी भी तरह के आतंकवाद, अतिवाद धार्मिक विद्वेष के खिलाफ हैं.

कयानी ने कहा है कि हम किसके साथ रहना चाहते हैं यह सभी जानते हैं. हम पाकिस्तान के हाथ बिके हुए नहीं हैं. हमें पाकिस्तान की गुलामी मंजूर नहीं है.

ध्यान रहे, गिलगिट बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान अवैध कब्जा करके बैठा हुआ है. पाकिस्तान इन इलाकों का उपयोग भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए करता है. भारत सरकार ने पाकिस्तान को कई बार चेतावनी दी है कि वो इन इलाकों को शीघ्र ही खाली करें ताकि वहां की जनता को उनके जीवन के मूल अधिकार और सुख सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें.

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