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सेकंड वर्ल्ड वॉर कब हुआ था | द्वितीय विश्व युद्ध का कारण | World war 2 history, Reason, Result in hindi

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प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के कारण यूरोप में जो अस्थिरता बन गयी थी, वहीं से दुसरे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की शुरुआत हो गयी थी और इस संघर्ष को ही इतिहास में द्वितीय विश्व युद्ध कहा गया. वास्तव में प्रथम विश्व युद्ध के समय कुछ देशों को मिली पराजय उनके बीच हुई सन्धियाँ और परिस्थिति के अनुसार बने नियम ज्यादा समय तक नहीं चल सके और दो दशक में ही टूट गये. जिसके पूर्व से भी अधिक विनाशकारी परिणाम सामने आये. आर्थिक और राजनीतिक रूप से अस्थिर जर्मनी में सत्ता बढ़ाने के लिए, एडॉल्फ हिटलर और उनके राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी ने देश को फिर से स्थायी किया और विश्व में अपना प्रभुत्व बढ़ाने जैसे अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इटली और जापान के साथ रणनीतिक संधि पर हस्ताक्षर किए. ग्रेट ब्रिटेन को जर्मनी पर आक्रमण करने की तब प्रेरणा मिली, जब हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण किया (1 सितंबर 1939 ) और इस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध की औपचारिक शुरुआत हो गई . लेकिन तब ये किसी को पता नहीं था, कि अगले छह वर्षों में ये संघर्ष किसी भी पिछले युद्ध की तुलना में बहुत ही ज्यादा विनाशकारी होगा और दुनिया की बहुत बड़ी भूमि और संपत्ति को नष्ट कर देगा.

द्वितीय विश्व युद्ध कब शुरू हुआ था? (When did World War II begin?)

कुछ का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध की भूमिका पहले विश्व युद्ध के समापन के साथ ही बन गयी थी, लेकिन कुछ मतों के अनुसार इसकी वास्तविक शुरुआत 1931 में हुयी थी, जब जापान ने चाइना से मंचुरिया छीन लिया था. इधर इटली ने 1935 में एबीसनिया में घुसकर उसे हरा दिया था. 1936 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के राइनलैंड में री-मिलीट्राईजेशन का काम किया था. 1936 से लेकर 1939 तक स्पेन में सिविल वॉर हुआ था, 1938 में जर्मनी ने चेकोसलावाकिया पर अधिकार कर लिया था. लेकिन फिर भी इसके लिए 2 दिनांक विशेष रूप से याद रखी जाती हैं, जिसमें 7 जुलाई 1937 जिसे दुसरे विश्व युद्ध के शुरुआत का दिन माना जाता हैं, जब मार्को पोलो पुल हादसा हुआ था, जिससे जापान और चाइना के बीच सबसे लम्बा युद्ध शुरू हुआ था और 1 सितम्बर 1939 का दिन जब जर्मनी ने पोलैंड में घुसपैठ की थी, जिसके कारण ब्रिटेन और फ़्रांस ने हिटलर के नाजी राज्य से प्रतिशोध लेने की घोषणा की थी और युद्ध छिड गया था. पोलैंड की घुसपैठ से लेकर युद्ध तब खत्म हुआ, जब जापान ने सितम्बर 1945 को सरेंडर कर दिया, लेकिन इतने सारे वर्षों में दुनिया के ज्यादातर देश युद्ध में ही व्यस्त रहे.

दूसरे विश्व युद्ध की उत्पत्ति (Origins of World War II)

दूसरा विश्व युद्ध कोई एक घटना का परिणाम नहीं थी, इसलिए इस विनाश के लिए किसी भी एक ऐतिहासिक घटना को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता हैं. जापान की रूस-जापान युद्ध में सिजरिस्ट (czarist) पर अनपेक्षित जीत ने जापान के लिए एशिया और पसिफिक में आगे बढ़ने के रास्ते खोल दिए थे. वैसे भी यूनाइटेड स्टेट्स के यूएस नेवी ने 1890 में समुंद्री युद्ध की तैयारी शुरू कर दी थी, इसे “वॉरप्लान ऑरेंज” कहा जाता था और दूसरे विश्व युद्ध तक इस प्लान को नई-नई तकनीकों से अपडेट किया जाता रहा था.

वास्तव में प्रथम विश्व युद्ध से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक का समय बहुत  ही अस्थायी समय था. 1929 के “काले मंगलवार (ब्लैक ट्युसडे)”  से ही विश्वभर में मंदी का समय शुरू हो गया था. 1933 में हिटलर के हाथ में सत्ता आने पर उसने 1918 की वरसाइल की संधि को तोड़ दिया, जिससे आर्थिक गिरावट आ गयी, और यह घोषणा की “जर्मनी को लिविंग स्पेस या लेबेंसेरौम (Lebensraum ) की आवश्यकता हैं” हिटलर ने पश्चिमी देशों की शक्तियों का परीक्षण शुरू कर दिया और समस्त संधियों को समझकर उनसे मिलने वाले पश्चिमी देशों के लाभ को समझना शुरू किया. 1936 में राहीनलैंड में रिमिलीटराइजेशन करने के लिए वेर्सलीएस (Versaille) और लोकार्नो (Locarno) की संधि एक बार फिर से तोड़ी गयी, जो की यूरोप का बॉर्डर कहलाता था.

ऑस्ट्रिया के अंचलस (Anschluss) और चेकोस्लोवाकिया के रैंप पर कब्जे का कारण लेबनेंसम तक हड़पना हिटलर की महत्वकांक्षा थी. तीसरा रोम बनाने की इटली की इच्छा ने देश को नाजी जर्मनी के साथ घनिष्ठ संबंधों में धकेल दिया. इसी तरह, जापान ने 1919 में पेरिस में अपने बहिष्कार से नाराज होकर, आत्मनिर्भर राज्य बनने के लिए जापान के साथ एक पेन-एशियाई क्षेत्र (Pan-Asian sphere ) बनाने की मांग की.

और इस तरह प्रतिस्पर्धी विचारधाराओं ने अंतर्राष्ट्रीय तनाव की आग को और अधिक बढा दिया. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस में हुयी बोल्शेविक क्रान्ति और गृहयुद्ध के बाद सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यूएसएसआर) की स्थापना हुयी थी, जो इससे पहले तक व्यापक कम्युनिस्ट राज्य कहलाया जाता था. लेकिन पश्चिमी गणराज्य और पूंजीपति बोल्शेविज़्म के प्रसार से डर गये थे. साथ ही इटली, जर्मनी और रोमानिया जैसे कुछ देशों में, साम्यवाद की प्रतिक्रिया में कुछ हद तक रूढ़िवादी समूह सत्ता में आ गए.

जर्मनी, इटली और जापान ने पारस्परिक समर्थन के समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन इस डर से कि सहयोगी राष्ट्रों से उनका सामना होगा, उन्होंने कभी भी कार्रवाई की एक व्यापक या समन्वित योजना विकसित नहीं की.

इतने सारे घटनाक्रमों में दूसरे विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि कब तैयार हुई, दुनिया समझ ही नहीं सकी, लेकिन ये तय है कि ये युद्ध किसी भी एक देश की महत्वकांक्षा या एक जगह हुई क्रान्ति का परिणाम नहीं था, बल्कि बहुत सारे कारण थे, जो इस विध्वंसकारी युद्ध  के लिए जिम्मेदार थे.

द्वितीय विश्व युद्ध के कारण (Causes of World War II)

पेरिस की शांति वार्ता  (The Peace of Paris) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत में हुई समस्त संधियों में कुछ सन्धियाँ ही ऐसी थी, जो सभी देशों को संतुष्ट करती. जर्मनी ऑस्ट्रिया और कई अन्य देश भी पेरिस की संधि से खुश नहीं थे, क्योंकि इसके अनुसार उन्हें हथियारों का उपयोग बंद करना था. जर्मनी ने आक्रमण के डर से वर्सेली की संधि पर हस्ताक्षर कर दिए.

आर्थिक मुद्दे (Economic Issues) – प्रथम विश्व युद्ध ने कई देशों की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव डाला था, हालांकि यूरोपियन आर्थिक अवस्था 1920 तक बहुत ही अच्छी स्थिति में थी, लेकिन यूनाइटेड स्टेट में आये परिवर्तन ने यूरोप में भी मंदी का दौर ला दिया था. और ऐसी खराब आर्थिक स्थिति में कम्युनिज्म और फासिज्म में अपनी शक्तियाँ बढा ली थी.

नेशनलिज्म (Nationalism) – प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप में देशभक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा था, वो भी विशेषकर उन देशों में जो युद्ध में हार गये थे.

डिक्टेटरशिप (Dictatorships) – राजनीतिक अस्थिरता और प्रतिकूल आर्थिक स्थिति के कारण कुछ देशों में  डिक्टेटरशिप बढने लगा. जिनमें भी जर्मनी, इटली, जापान और सोवियत संघ मुख्य थे.

विफल अपीलें और संधि वार्ता (Failure of Appeasement) – पहले विश्व युद्ध के पश्चात चेकोस्लोवाकिया एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था, लेकिन 1938 तक, जर्मन क्षेत्र से घिरा हुआ था. हिटलर पश्चिमी चेकोस्लोवाकिया के एक क्षेत्र सुडेनेटलैंड को भी जर्मनी में जोड़ना चाहता था, जहां कई जर्मन रहते थे. ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन हिटलर को प्रसन्न करना चाहते थे और हिटलर के वादे के बाद सुडेनलैंड के लिए अपनी मांगों पर सहमत हुए थे, कि वह अधिक क्षेत्र की मांग नहीं करेंगे. मार्च 1939 के दौरान ही बचे हुए चेकोस्लोवाकिया पर भी हिटलर ने कब्जा कर लिया.

दो पक्षों का बनना और विभिन्न देशों की स्थिति

इस तरह पूरी दुनिया के देश दो प्रतिध्वन्धियों में बंट गये, जिनमें भी कुछ देश ऐसे थे, जो उदासीन थे और जिनका ना प्रथम विश्व युद्ध और ना ही द्वितीय विश्व युद्ध में कोई योगदान था, लेकिन साथ ही भारत जैसे कई ऐसे देश भी थे, जिन पर किसी यूरोपीय राष्ट्र का शासन था, इस कारण उन्हें उसके पक्ष में ही रहने का दबाव था. लेकिन फिर भी दूसरे विश्व युद्ध के मुख्य खिलाड़ियों में जर्मनी, जापान और इटली के लोगों के नाम सामने आते हैं, जिनमें एडोल्फ हिटलर, डेर फर्दर (Der Furher), जापान के प्रधानमंत्री एड्माईरल हिडेकी तोजो, इटली के प्रधानमंत्री बेंटो मुस्सोलीनी बड़े नाम थे. इस तरह जर्मनी, जापान और इटली ने एक्सिस पावर नामक एक गठबंधन बनाया. बुल्गारिया, हंगरी, रोमानिया और दो जर्मन निर्मित राज्य – क्रोएशिया और स्लोवाकिया – अंत में शामिल हो गए.

इनके सामने यूनाइटेड स्टेट्स, ग्रेट ब्रिटेन, चाइना और सोवियत संघ ने गठबंधन बनाया था, और ये ग्रुप ध्रुवीय शक्तियों के सामने खड़ा हुआ था. 1939 से लेकर 1944 तक लगभग 50 देश आपस में कोई ना कोई कारण से लड़ चुके थे. और 1945 में 13 और देश इस युद्ध में शामिल हो गये थे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, ब्रिटिश कामनवेल्थ ऑफ़ नेशनस, कनाडा, भारत, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, चेकोस्लोवाकिया, डेनमार्क, फ्रांस, ग्रीस, नीदरलैंड, नोर्वे, पोलैंड, फिलिपिन्स और यूगोस्लाविया बड़े नाम हैं. जिनमें भी  यूनाइटेड स्टेट्स के प्रेसिडेंट फ्रेंक्लिन.डी.रूजवेल्ट, ग्रेट ब्रिटेन के प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल,चाइना के जनरल चिआंग काई-शेक,सोवियत यूनियन के जनरल  जोसफ स्टॅलिन मुख्य नाम हैं.

इस तरह पूरे युद्ध में गठबंधन वाले राष्ट्र और ध्रुवीय देशों को मिलाकर कुल 70 मिलियन लोगों की फ़ौज लड़ी थी. फीनलैंड ने किसी भी पक्ष को आधिकारिक रूप से जॉइन नही किया था, लेकिन इसके और सोवियत संघ के युद्ध ने विश्व युद्ध द्वितीय की शुरुआत कर दी थी. 1940 में जरूरत को देखते हुए फिनिश ने सोवियत रूस को पछाड़ने के लिए नाजी जर्मनी को जॉइन कर लिया था. 1944 में जब फीनलैंड और सोवियत के मध्य शांति की घोषणा हो गयी, तो फीनलैंड ने सोवियत को हटाने के लिए जर्मनी के साथ मिल गया था.

स्विट्जरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और स्वीडन ने युद्ध के समय उदासीन रहने की घोषणा की थी.

युद्ध का कार्यकाल (War period)

1 सितम्बर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड में घुसपैठ की, डेनमार्क, लक्सेम्बर्ग, नीदरलैंड, नोर्वे, बेल्जियम और फ्रांस जल्द ही जर्मनी के नियंत्रण में आ गये और केवल यूनाइटेड किंगडम पीछे जर्मनी का सामना करने के लिए बच गया.

10 जून 1940 को इटली ने ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध में जर्मनी के साथ देने की घोषणा की और ये युद्ध ग्रीस और उत्तरी अफ्रीका तक फ़ैल गया. 14 जून  1940 को जर्मनी की फौजों ने पेरिस पर आक्रमण किया.

जुलाई 1940 से सितम्बर 1940  तक जर्मनी और ग्रेट इंग्लिश कॉस्ट लाइन पर  ब्रिटेन ने युद्ध लड़ा. 7 सितम्बर 1940 से मई 1941 तक लंदन में रात के समय में जर्मनी का हवा में बमबारी अभियान चला, जिसे ब्लिट्ज के नाम से जाना जाता है.

22 जनवरी 1941 को ब्रिटिश और कॉमनवेल्थ की फौजों ने लीबिया के टोब्रुक के पोर्ट सिटी पर कब्जा कर लिया था, 22 जून 1941 को जर्मनी ने सोवियत यूनियन में घुसपैठ की थी.

सितम्बर 1941 में जापान की फौजें इंडो चाइना बॉर्डर में भीतर तक आ गयी थी. 7 दिसम्बर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर पर अटैक कर दिया था और आधे से ज्यादा एयरक्राफ्ट के बेड़े को खत्म कर दिया था और 8 युद्धपोतों को तबाह कर दिया था. जापान ने फिलीपींस में क्लार्क और इबा एयरफील्ड पर भी हमला किया , जिसमें अमेरिकी सेना के आधे से ज्यादा विमान नष्ट हो गए .

8 दिसम्बर 1941 को रूजवेल्ट ने कांग्रेस में दिए भाषण में ये कहा था “एक तारीख जो बदनाम में रह जाएगी” और इसके साथ ही अमेरिका ने जापान से युद्ध की घोषणा कर दी. इसी दौरान जापान हांगकांग, गुआम, वेक द्वीप समूह, सिंगापुर और ब्रिटिश मलाया पर हमला कर दिया.

11 दिसम्बर 1941 को जर्मनी और इटली ने यूनाइटेड स्टेट्स से युद्ध की घोषणा कर दी, क्रिसमस 1941 तक जापान ने थाईलैंड, गुआम, हांगकांग और वेक आइलैंड पर कब्जा कर लिया.

1942 में गठबंधन वाले देशों ने ध्रुवीय शक्तियों को नार्थ अफ्रीका और सोवियत संघ में आगे बढने से रोका. फरवरी 1942 को जापान ने मलय पेनिसुएला में घुसपैठ की, सिंगापूर ने एक सप्ताह के भीतर ही सरेंडर कर दिया.

4 जून से 6 जून 1942 को जापान के प्लेन हवाइयन आइलैंड में घुस गए और और मिडवे आइलैंड में ही यूनाइटेड स्टेट ने मिशन का कोड क्रैक कर लिया, इस तरह जब जापान ने मिडवे पर अटैक किया तो ना केवल अपने  4 एयरक्राफ्टस खोये बल्कि 200 प्लेन और पायलट भी गवाए और यूनाइटेड स्टेट को एक ही बार में जीत में हासिल हो गई.

19 अगस्त 1942 को जैसे ही जर्मनी ने रशिया में घुसने की कोशिश की स्टालिनग्राड का युद्ध शुरू हो गया. अगस्त 1942 से लेकर फरवरी 1943 तक यूएस मरीन ने गुडालकेनाल (Guadalcanal) के पैसीफ़िक द्वीप पर कब्जा कर लिया.

23 अक्टूबर 1942 को ब्रिटिश सेना ने ध्रुवीय शक्ति की सेना को ईआई अलामिन (El Alamein) के दुसरे युद्ध में टूनिसिया (Tunisia) की संधि में पीछे धकेल दिया.

1 फरवरी 1943 को जर्मन फौजों ने स्टाइलनग्रेड में सरेंडर कर दिया, और बहुत बड़े हिस्से में रूस से हार गया. इस हार से जर्मनी पूर्व में आगे बढने से रुक गया. 10 जुलाई 1943 को गठबंधन के देशों ने इटली में लैंड किया.

25 जुलाई 1943 को इटली के राजा की पूरी शक्ति लौट आई और मुसोलिनी को परास्त करके गिरफ्तार कर लिया गया. 1943 नवम्बर से लेकर मार्च 1944 तक यूएस मरीन ने बौगैन्विली (Bougainville) में सोलोमन आइलैंड में घुसपैठ की और इसे जापानियों से वापिस छुडवाया.

6 जून 1944 को गठबंधन की शक्तियों ने एक साथ नोर्मंडी के 5 समुंद्री किनारों पर लैंड किया, जिनमे नाम थे उताह (Utah) ओमाहा (Omaha) गोल्ड (Gold) जूनो( Juno) और  स्वोर्ड( Sword) शामिल थे. इस लैंडिंग में 5000 जहाज , 1100 एयरप्लेन और 15000 सर्विस मैन शामिल थे.

25 अगस्त 1944 को अमेरिकन और फ्री फ्रेंच फ़ोर्स ने पेरिस को मुक्त करवाया.27 जनवरी 1945 को सोवियत की फौजों ने क्राकोव (पोलैंड) के पास स्थित ऑस्चविच कैंप कॉम्प्लेक्स को मुक्त करवा लिया,.

19 फरवरी से 26 मार्च 1945 तक के बीच में यूएस ने जापान से इवो जिमा (Iwo Jima) आइलैंड के लिए  समुंद्री युद्ध किया. 12 अप्रैल 1945 को जोर्जिया (Georgia) में रूसवेल्ट की मृत्यु हो गयी और वहाँ पर हैरी ट्रूमैन ने प्रेसिडेंट के रूप में शपथ ली.

25 अप्रैल 1945 को सोवियत ने बर्लिन को घेर लिया, और 28 अप्रैल 1945 को स्विटजरलैंड से भागते हुए मुसोलिनी को मार दिया गया. 29 अप्रैल 1945 को यूएस के सैनिकों ने जर्मनी में म्युनिक के बाहर दचाऊ को मुक्त करवाया.

1945 में 30 अप्रैल के दिन ईवा ब्राउन (जो कि हिटलर की पत्नी थी) और हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी . 7 मई 1945 जर्मनी ने रिम्स में रेड स्कूल हाउस में एइसेनहोवएर के हेडक्वार्टर में आत्म समपर्ण कर दिया. 8 मई को वी-ई डे (V-E Day) मनाया जाता हैं, क्योंकि उसी दिन युद्धविराम हुआ था.

1945 से 8 मई को यूरोप में वी-ई डे के रूप में मनाया जाता हैं. इस दिन यूरोप में युद्ध समाप्त हुआ था. 16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको के अलामो गोरड़े (Alamogordo) पर एटोमिक बम गिराया गया था.

29 जुलाई 1945 को ट्रूमैन ने जापान को चेतावनी दी, की यदि उसने सरेंडर नहीं किया, तो देश को तबाह कर दिया जायेगा, लेकिन जापान ने युद्ध ज़ारी रखा.

अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 के दिन लिटल बॉय  नाम का पहला परमाणु बम गिराया था, जिसमें लगभग 140,000 लोग मारे गये. जापान की सरकार से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर 9 अगस्त 1945 को एक दूसरा बम जिसका नाम फैटमैन था, उसे नागासाकी पर गिराया गया, जिसमें 80,000 लोग मारे गये.

14 अगस्त 1945 को जापान ने अमेरिका की सभी शर्तें मान ली और युद्ध बंद कर दिया. और इस दिन जापान पर जीत का वी-जे डे घोषित किया गया. 2 सितम्बर 1945 के दिन टोक्यो की खाड़ी में जापान ने यूएसएस मिसौरी को आत्मसमपर्ण करते हुए औपचारिक कागजों पर हस्ताक्षर किया.

1947 के मार्च में, एक जापानी सैनिक हीरू ओनोडा जो तब भी युद्ध लड़ रहा था, फिलीपींस में लुबांग द्वीप पर एक खोजी दल द्वारा खोजा गया था. जब वह अपने पूर्व कमांडिंग अधिकारी द्वारा आश्वस्त हो गया, कि युद्ध खत्म हो गया है, तो उसने मनीला जाकर औपचारिक रूप से राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस को आत्मसमर्पण कर दिया. हीरू ओनोडा की मृत्यु 16 जनवरी, 2014 को 91 वर्ष की आयु में हुई.

द्वितीय विश्व युद्ध के दुष्परिणाम

इस युद्ध की जो सबसे बड़ी हानि सामने आई वो थी जन-हानि. अमेरिका का नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराने को मानव सभ्यता के  इतिहास सबसे क्रूर, विनाशकारी और दर्दनाक घटना माना गया हैं. जिसका परिणाम कई पीढ़िया भुगत चुकी हैं और कई भुगतने वाली हैं, इस कारण इसके बाद इस पर पूरी तरह रोक लगाई गयी. लेकिन फिर भी युद्ध के दौरान कुल  12 मिलियन जवानों को मार गिराया गया, जबकि 25 मिलियन नागरिक भूख, बिमारी इत्यादि कारणों से मारे गये. 24 ,मिलियन लोग इस युद्ध में घायल और विकलांग हुए. यूएस द्वारा जापान में बम गिराने के कारण 160,000 जन-हानि हुयी.  इस तरह दूसरा विश्व युद्ध हर दृष्टि से  मानव जाति के लिए भयंकर विनाशकारी युद्ध सिद्ध हुआ.

हालांकि दूसरे विश्व युद्ध के समय हताहत आम-जनों की वास्तविक संख्या कभी नहीं जानी जा सकती. इनमें बहुत सी मौतें तो बम ब्लास्ट, नर-संहार, भूख और युद्ध से जुडी अन्य गतिविधियों के कारण हुयी थी. हिटलर के दैविक “अंतिम समाधान” के हिस्से के रूप में नाजी एकाग्रता शिविरों में अनुमानित 45-60 मिलियन लोगों की हत्या में 6 मिलियन यहूदी मारे गए थे, जिन्हें अब होलोकॉस्ट के नाम से जाना जाता है. जबकि सोवियत यूनियन के 7 मिलियन सैनिक घायल हुए थे.

ये माना जाता हैं कि युद्ध के दौरान लगभग 6 मिलीयन यहूदी तो नाज़ी कंसंट्रेशन कैंप में ही मारे गये थे. और रोम के हजारों लोगों की हत्या कर दी गयी थी, जिनमें मानसिक और शारीरिक रूप से असक्षम लोग भी शामिल थे.

केवल 1939 से लेकर 1945 तक हुआ विनाश और जनहानि.

देश का नाम मृतकों की संख्या घायलों की संख्या
ऑस्ट्रेलिया 23,365 39803
ऑस्ट्रिया 380,000 350,117
बेल्जियम 7760 14500
बुल्गेरिया 10,000 21878
कनाडा 37476 53174
चाइना 2,200000 1,762000
फ्रांस 210,671 390,000
जर्मनी 3500000 7,250,000
ग्रेट ब्रिटेन 329,208 348,403
हंगरी 140,000 89,313
इटली 77,494 120,000
जापान 1219000 295247
पोलैंड 320,000 530000
रोमानिया 300,000
सोवियत यूनियन 75,00000 5,000000
यूनाइटेड स्टेट्स 405,399 670,846

इस युद्ध में बहुत भारी मात्रा में जमीन  की हानि  हुई थी, एक अनुमान के  अनुसार लगभग 1000 बिलियन डॉलर इस युद्ध में खर्च हुए थे, जिसमें केवल अमेरिका ने 350 बिलियन डॉलर खर्च किये थे. इस युद्ध में बहुत सी बिल्डिंगस, रोडस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, युद्धपोत और फाइटर प्लेन ध्वस्त हुए थे.

दुसरे विश्व युद्ध के परीणामस्वरूप दुनिया के समस्त देश पूँजीपति और साम्यावादी  दो भागों में बंट गये, जिसमे यूएसए पूंजीपतियों का नेतृत्व कर रहा था, जबकि रशिया साम्यवादी का नेतृत्व कर रहा था. उन्होंने विश्व पटल पर एक दूसरे की आलोचना करना शुरू कर दिया, जिसका परिणाम शीत युद्ध हैं. और इस शीत युद्ध के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने परमाणु हथियार तैयार कर लिए जिसका घातक परिणाम जल्द ही दुनिया को भुगतने होंगे.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद का परिदृश्य  

दूसरे विश्व युद्ध के बाद डेमोक्रेटिक लहर भी चली और बहुत से देशों के लोग अपनी स्वतंत्रता और डेमोक्रेसी के लिए जागरूक हो गये, जिसके अंतर्गत बहुत से उपनिवेशों को स्वतंत्रता मिली, जिनमें भारत का नाम भी शामिल हैं. इसके कारण उपनिवेशवाद का समापन हुआ उपनिवेशवाद के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत एशिया और अफ्रीका में हुयी, जिसके कारण भारत,पाकिस्तान ,श्रीलंका और इजिप्ट जैसे देशों को ब्रिटिश एमपायर से मुक्ति मिली. वियतनाम,कम्बोडिया और लाओस को फ्रेंच एम्पायर से मुक्ति मिली.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूएसए के प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमैन ने युद्ध के विक्टिम देशों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और कम्युनिज्म के प्रभाव को रोका. इस घोषणा को ट्रूमैन की घोषणा कहा जाता हैं.

मार्शल प्लान (The Marshall Plan)

इस घोषणा के बाद यूएस के विदेश मंत्री जॉर्ज मार्शल ने विक्टिम देशों को सपोर्ट करने के लिए प्लान बनाया. जिसे मार्शल प्लान कहां जाता हैं, इस योजना के अंतर्गत यूएस ने यूरोपियन देशों को क्षति-पूर्ति के लिए 12.5 बिलियन डॉलर दिए थे. 17 से ज्यादा देशों में खाद्य सामग्री,कृषि और ट्रांसपोर्ट इत्यादि के लिए पुनर्निर्माण किया गया. इस योजना से 18 देशों को खाद्य, मशीनरी और अन्य सामानों में 13 अरब डॉलर की राशि मिली.

दुसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में यूएसएसआर ने काउंसिल ऑफ़ म्यूच्यूअल असिस्टेंस की स्थापना की, जिससे यूरोपियन देशों को आर्थिक सहायता मिल सके. इस प्लान का यूएसएसआर (USSR) के विदेश मंत्री मोलोटोव ने प्रस्ताव दिया था, जिससे उनका व्यापार और आर्थिक स्थिति का स्तर सुधर सके.

द्वितीय विश्व युद्ध के एक महीने के बाद 24 अक्टूबर 1945 के दिन यूनाइटेड नेशन की स्थापना की गयी थी. नेशन के इस लीग की स्थापना वर्ल्ड वॉर को रोकने के लिए की गयी थी, लेकिन ये असफल रही. इसलिए 4 साल बाद फ्रेंक्लिन रूजवेल्ट और विन्सन चर्चिल ने अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर किये, और यूएन की स्थापना की इस संस्था का मुख्य उद्देश्य विश्व शान्ति कायम करना था और तबाही से बचाना था.

 

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