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जनरल केटेगरी रिजर्वेशन | सवर्ण जाति आरक्षण | General Category Reservation | Swarn Caste Reservation in India in Hindi

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हमारे देश में कई जाति के लोग जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़े वर्ग एवं जनरल आदि रहते हैं. किन्तु देश में अधिकतर देखा जाता है कि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को हमेशा एवं हर जगह पर प्राथमिकता दी जाती हैं, फिर चाहे वह रोजगार के लिए हो या शिक्षा के लिए. किन्तु कमजोर आय वाले सामान्य या सवर्ण वर्ग के लोगों को इससे बहुत नुकसान होता है, क्योंकि उनके पास शिक्षा के लिए पैसे नहीं होते हैं और जाति के कारण उन्हें न तो शिक्षा के एवं न ही रोजगार के अवसर मिल पाते हैं. किन्तु अब उन लोगों को भी चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योकि सरकार अब उनके लिए ऐसा बिल लेकर आई हैं, जिससे उनकी शिक्षा एवं रोजगार से सम्बंधित सारी मुश्किलें कम हो सकती हैं. आइये जानते हैं सवर्ण या सामान्य वर्ग के लोगों के लिए पास किये गए बिल के बारे में.

महत्वपूर्ण जानकारी (Important Information about General Category Reservation)

क्र. म. (s.No.) जानकारी बिंदु (Information Points) जानकारी (Information)
1. बिल का नाम (Bill Name) जनरल केटेगरी या सवर्ण जाति आरक्षण
2. केटेगरी (Category) केन्द्रीय सरकार की योजना
3. लांच किया गया (Launched By) नरेंद्र मोदी जी द्वारा
4. लांच की तारीख (Launched Date) 7 जनवरी 2019
5. लाभार्थी (Beneficiary) सवर्ण वर्ग यानि जनरल केटेगरी के लोग
6. उद्देश्य (Objective) 10 % कोटा प्रदान करना
7. स्थिति (Status) लोकसभा एवं राज्यसभा द्वारा पारित किया जा चूका है

सवर्ण जाति आरक्षण बिल की विशेषताएं (Swarn Category Reservation Bill Features)

  • आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए :- वे लोग जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है, किन्तु सामान्य या सवर्ण वर्ग से संबंध रखते हैं, उनके लिए यह बिल बहुत ही मददगार साबित होगा, क्योंकि उन्हें इसके तहत 10% आरक्षण प्रदान किया जा रहा है. इसके साथ ही यह सामान्य वर्गों के बीच गरीबी को भी कम करेगा.
  • सरकारी नौकरी के अवसर :- अब जनरल केटेगरी के लोगों को इस बिल के पास होने के बाद सरकारी नौकरी प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर मिल सकेंगे. जिससे उनकी रोजगार संबंधित कुछ परेशानी कम हो सकती है.
  • उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश :- इस आर्थिक आरक्षण के माध्यम से समान्य वर्ग के यानि उच्च जाति के लोगों को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश करने के भी अवसर प्राप्त हो सकेंगे. अब तक इस वर्ग के लोगों को इसके लिए कोई लाभ प्रदान नहीं किया गया था.

पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)

  • आय सीमा :- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सामान्य या सवर्ण जाति के सभी लोग जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रूपये से कम हैं, उन्हें सरकार द्वारा 10 % आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा. हालाँकि बिल के मुताबिक अलग – अलग राज्यों में आय की सीमा में कमी एवं वृद्धि की जा सकती है.
  • कृषि भूमि :- सवर्ण जाति के वे लोग जिन्हें इस आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा, उनके परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए.
  • शहरी क्षेत्र में घर :- इस बिल के लिए यह भी पात्रता मापदंड रखा गया है, कि यदि आवेदक के परिवार के पास शहरी क्षेत्र में कोई फ्लैट या घर हैं, तो उसका एरिया 100 वर्ग फुट से कम होना चाहिए.
  • ग्रामीण क्षेत्र में घर :- यदि आवेदक ग्रामीण क्षेत्र में रह रहा है और उसके परिवार के पास वहां घर हैं तो उसके घर का एरिया 200 वर्ग फुट से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

बिल के पारित होने की प्रक्रिया (Bill Passed Process)  

सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10% आरक्षण दिए जाने के लिए सरकार द्वारा बिल की घोषणा की गई. इसके बाद इसे संसद के दोनों सदनों में पास कराया जाना था. लोकसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन में यानि 8 जनवरी 2019 को इस बिल को पेश किया गया था. जहाँ 323 – 3 के वोटों के मार्जिन के आधार पर बिल पास कराया गया. इसके बाद इस बिल को दुसरे दिन राज्य सभा में पेश किया गया, जहाँ काफी बहस के बाद 165 – 7 के वोट मार्जिन के साथ बिल को मंजूरी दे दी गई. इस तरह से यह बिल संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जा चूका है. अब इस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी दी जाएगी. एक बार राष्ट्रपति द्वारा इस बिल को पास कर दिया गया, उसके बाद यह कानून बन जायेगा. जिसे पूरे देश में लागू किया जायेगा.

इतिहास (History)

इस तरह के बिल के इतिहास की बात की जाये, तो सबसे पहले काका साहिब कालेलकर जी ने 29 जनवरी सन 1953 को पिछड़े वर्ग आयोग की शुरुआत की थी. जिसे काका कालेलकर कमीशन के नाम से जाना जाता था. इसके बाद 1 जनवरी 1979 में पीएम मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार द्वारा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग आयोग स्थापित किया गया था, जिसे मंडल आयोग भी कहा गया था. इसे तब भारत के सामाजिक या शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने के लिए एक जनादेश के साथ लागू किया गया था. और अब तीसरी बार भारत में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा इस तरह का बिल का लाया गया है.

मुख्य बिंदु (Importent Points)

इस बिल से जुड़ी कुछ खास बातें इस प्रकार हैं –

  • केन्द्रीय सरकार द्वारा उठाये गये इस कदम को लोगों ने ‘मोदी की सवर्ण क्रांति’ नाम दिया है.
  • इस बिल के पास होने के साथ यह ध्यान रखना आवश्यक है, कि उच्च जाति के लोगों के लिए यह आरक्षण मौजूदा 50 % आरक्षण से अलग एवं ऊपर है.
  • इस आरक्षण को सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा की गई प्रमुख मांग के चलते बनाया गया और इसे पारित किया गया है.
  • इस बिल को लागू करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया जायेगा.
  • सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री थावर चन्द्र गहलोत ने बहस के दौरान राज्यसभा को आश्वासन देते हुए कहा, कि एसटी, एससी और ओबीसी को मिले आरक्षण के संशोधन से यह बिलकुल अलग रहेगा.

लोगों की प्रतिक्रिया (People’s Reaction)

भारत में इस साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में देश में सभी राजनीतिक पार्टी जैसे कांग्रेस एवं अन्य पार्टी जनता को खुश करने में लगी हुई है, ताकि लोग उन्हें वोट करें. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस बिल को लाकर सभी को चौंका दिया है. इसके प्रति लोगों की निम्न प्रतिक्रिया है –

  • विपक्ष के ज्यादातर पार्टियों द्वारा सरकार पर तंज कसते हुए यह कहा जा रहा है, कि मोदी जी ने अपना वोट बैंक तैयार करने के लिए इस बिल को लोक सभा चुनाव के प्रचार के रूप में पेश किया है.
  • कुछ लोगों का कहना है कि यह बिल मोदी जी का मास्टर स्टॉक है, जोकि उच्च एवं निम्न जाति के बीच के अंतर को ख़त्म करेगा.
  • सरकार के इस फैसले को लोगों ने ऐतिहासिक कहा है और यह भी कहा है कि सभी जातियों और धर्मों के गरीबों को समर्थन मिलना चाहिए.

इस तरह से सवर्ण जाति के लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ा फैसला है, क्योंकि इस संवैधानिक संशोधन बिल से सवर्ण लोगों के करियर पर प्रभाव पड़ेगा. और इससे उच्च जाति के गरीब व्यक्तियों को नौकरी या शिक्षा के बेहतर अवसर प्राप्त कर समाज में अपनी स्थिति बनाये रखने में मदद मिलेगी.

 

 

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