बजट 2021: झारखंड के कारोबारियों में निराशा, जानें रांची के व्यवसायियों ने क्या कहा

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Ranchi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में प्रस्तुत आम बजट का प्रसारण देखने-सुनने की व्यवस्था चैंबर भवन में की गई थी. इस अवसर पर काफी संख्या में व्यापारियों-उद्यमियों एवं प्रोफेशनल्स ने बजट प्रसारण को देखा. उसके बाद उन्‍होंने आम बजट के व्यापार एवं उद्योग जगत असर पर अपने विचार रखे.

एफजेसीसीआई के अध्‍यक्ष प्रवीण जैन छाबड़ा ने कहा कि कोविड की स्थितियों से निपटने के लिए वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है. बजट में इंफ्रांस्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, कृषि, हाउसिंग पर विशेष फोकस किया गया है जो स्वागतयोग्य है. इन सभी सेक्टर्स में खर्च करने से यह तय है कि बाजार में नकदी की उपलब्धता रहेगी और इससे एमएसएमई सेक्टर को बढावा मिलेगा लेकिन एमएसएमई सेक्टर जो देष की जीडीपी में मुख्य योगदानकर्ता है, इस सेक्टर के लिए बजट भाषण में चर्चा नहीं करना चिंतनीय है. ये लांगटर्म की योजनाएं हैं, ऐसे में सरकार को तुरंत में इंसेंटिव स्कीम देकर इन सेक्टर को बूस्ट करने की जरूरत थी.

चैंबर अध्‍यक्ष ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए डायरेक्ट इंसेंटिव स्कीम के नहीं आने से उदासीनता है. बजट में जीएसटी में सरलीकरण की बात कही गई है किंतु इसका क्या प्रारूप होगा, इसका बजट में उल्लेख नहीं है. टेक्सटाइल मेगा पार्क की घोषणा की गई है यह स्वागतयोग्य है.

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उन्‍होंने कहा कि झारखण्ड में एक टेक्टसटाइल पार्क आये, इसके लिए राज्य सरकार को प्रयास करना चाहिए. बजटीय योजनाओं के अंदर में झारखण्ड में किन योजनाओं में क्या मिलेगा यह बाद का विषय है पर डायरेक्ट रूप से बजट में झारखण्ड के लिए कुछ भी घोषणा नहीं की गई है, जो चिंता का विषय है.

स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स होलीडे का पीरियड एक साल बढाने का निर्णय अच्छा कदम है. सीनियर सीटिजन को टैक्स में राहत का ऐलान और इंकम टैक्स में एसेसमेंट को रि-ओपन करने को 6 से 3 वर्ष करना स्वागतयोग्य है. लेकिन, मध्यम वर्ग को टैक्स में छूट की आशाएं थीं, जिसपर ध्यान नहीं दिया गया है जो चिंतनीय है. बजट में घोषित योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचे इसके लिए विशेष मॉनिटरिंग के उपायों पर विचार करना हितकर होगा.

सरकारी खर्च को बढाने का ऐलान स्वागतयोग्य: राहुल मारू

एफजेसीसीआई के महासचिव राहुल मारू ने कहा कि बजट में सरकार का फोकस स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिफॉर्म के जरिए अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने पर है. हेल्थ के बजट में इजाफा, कोई नया टैक्स न लगाकर इंडस्ट्री को राहत, सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स में राहत, राजकोषीय घाटे की परवाह न करते हुए सरकारी खर्च को बढाने का ऐलान स्वागतयोग्य है. इन्कम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं करना राहत का संदेश देता है क्योंकि बजट से पूर्व टैक्सपेयर्स के बीच इसकी आशंका बनी हुई थी. बजट के माध्यम से सरकार ने किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है, इससे उनके बीच व्याप्त भ्रांतियां दूर होंगी.

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कारोबारियों में निराशा: किशोर मंत्री

एफजेसीसीआई  के उपाध्‍यक्ष किशोर मंत्री ने संतुलित बजट बताया है. उन्‍होंने कहा कि झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में कोई सीधी घोषणा नहीं की गई है. ओवरऑल बिजनेस में कोई टैक्स होलिडे नहीं है, जिससे निराशा है।

सह सचिव दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि कठिन परिस्थिति में एक संतुलित बजट है. इसका लाभ शहरी से लेकर ग्रामीण स्तर तक मिलेगा. इंफरास्ट्रक्चर क्षेत्र में बढे सरकारी निवेश से अर्थव्यवस्था गतिशील होगी तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों को लाभ होगा.

पूर्व अध्‍यक्ष विनय अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी झारखण्ड को छलनेवाला बजट है. केंद्र सरकार द्वारा झारखण्ड को केवल वोट बैंक की तरह उपयोग किया जा रहा है. झारखण्ड में रेलवे और टूरिज्म के विकास के लिए कोई प्राथकिता बजट में नहीं है. बजट में हेल्थ, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर फोकस किया गया है, पर इसमें से कितना अंश झारखण्ड को मिलेगा, यह देखने की बात है.

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पूर्व अध्‍यक्ष दीपक कुमार मारू ने कहा कि पैंडमिक के कारण प्रभावित लघु व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी, लेकिन बजट में इसकी चर्चा नहीं होना चिंतनीय है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रोजगार को बढावा देने के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्क स्कीम की घोषणा उत्साहजनक है, झारखण्ड सरकार को इसका लाभ लेने के लिए प्रयास करना चाहिए. छोटी कंपनियों के लिए मेडअप सीमा 50 लाख से बढाकर 1 करोड करना तथा अफोर्डेबल हाउसिंग के लोन पर छूट की घोषणा स्वागतयोग्य है.

निवर्तमान अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा कि आपदा को अवसर में बदलनेवाला बजट है. क्योंकि कोविड के कारण 2019 में अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ी थी. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और हेल्थकेयर पर ध्यान दिया गया है, जिससे मार्केट में पैसे का फ्लो बना रहेगा. टूरिज्म और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को प्रोत्साहन के साथ ही प्रोडक्‍शन कैसे बढे, इसपर बजटीय प्रावधान किये गये हैं. एक्सपोर्ट बढाने के लिए इसके तीन स्लैब होने चाहिए थे. क्योंकि जब तक एक्सपोर्ट नहीं बढेगा, तब तक लिक्विडिटी की समस्या बनी रहेगी. सरकार की अन्प्रोडक्टिव योजनाओं को बंद करने पर भी फोकस करना चाहिए था.

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