COVID-19 के कारण मुंबई में गणेश चतुर्थी समारोह स्थगित

by
Advertisements

Mumbai: मुंबई से बड़ी खबर है. यहां इस बार के गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को स्‍थगित कर दिया गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति वडाला ने COVID19 महामारी के कारण अपने गणेश चतुर्थी समारोह को फरवरी 2021 तक स्थगित कर दिया है.

गणेश चतुर्थी इस साल 22 अगस्‍त दिन शनिवार को पड़ रहा है. सार्वजनिक गणेशोत्‍सव समिति वडाला ने तय किया है कि फरवरी 2021 तक यहां गणेश उत्‍सव नहीं मनाया जाएगा.

महाराष्‍ट्र में कोरोना संक्रमण की स्थिति भयावह

महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में 2436 नये मरीजों की पुष्टि हुई, 60 लोगों की मौत दर्ज की गई और 1186 लोगों को ठीक होने के बाद घर भेज दिया गया. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्‍य में कुल संक्रमितों की संख्‍या बढ़कर 52667 तक पहुंच गई है, अब तक कुल 1695 मौतें हो चुकी हैं और 15786 लोगों के स्‍वस्‍थ होने के बाद उन्‍हें घर भेज दिया गया है.

मुंबई में सोमवार को 1430 नये मामले दर्ज हुए और 38 संक्रमित लोगों की मौत हो गयी. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अनुसार मुंबई में कुल संक्रमित मरीजों की संख्‍या 31,789 तक पहुंच गयी है और अब तक 1026 की मौत हो चुकी है.

रविवार तक महाराष्ट्र में रिकॉर्ड 3041 नये मामले सामने आये थे जिसके बाद यहां संक्रमित मरीजों की संख्‍या 50 हजार के पार पहुंच गयी थी. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अनुसार 33988 मामले सक्रिय थे और कुल 1635 संक्रमितों की मौत दर्ज की गयी थी. 14600 लोगों को इलाज के बाद अस्‍पताल से छुट्टी दे दी गई थी.

गणेशोत्‍सव को इतिहास

दरअसल गणेशोत्सव मनाने की परंपरा पेशवाओं ने शुरू की थी. माना जाता है कि पेशवा सवाई माधवराव के शासन के दौरान पुणे के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था. यहीं से गणेशोत्सव की शुरुआत हुई. इसके बाद 1890 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक अक्सर सोचा करते थे कि कैसे लोगों को इकट्ठा किया जाए.

ऐसे में उनके मन में विचार आया कि लोगों को एक साथ लाने के लिए क्यों न गणेशोत्सव को ही सार्वचनिक रूप से मनाया जाए. ऐसे में महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को इतने बड़े पैमाने पर मनाने की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक के जरिए हुई.

1983 में पहली बार बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव का आयोजन किया जिसके बाद ये परंपरा पूरे महाराष्ट्र में लोकप्रिय हो गई. बाद में इसी गणेशोत्सव की मदद से आजादी की लड़ाई भी मजबूत की गई. दरअसल वीर सावरकर और कवि गोविंद की तरफ से नासिक में गणेशोत्सव मनाने के लिए एक संस्था बनाई थी जिसका नाम मित्रमेला रखा गया.
इस संस्था में लोगों मं देशभक्ति का भाव जगाने के लिए राम-रावण कथा के आधार पर देशभक्ति से भरे मराठी गीतों को काफी आकर्षक तरीके से सुनाया जाता था. जिसे लोग काफी पसंद करते थे. धीरे-धीरे ये संस्था लोगों में काफी लोकप्रिय हो गई जिसके बाद अन्य कई शहरों में भी गणेशोत्सव के जरिए आजादी का आंदोलन छे़ड़ दिया गया.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.