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गगनयान मिशन क्या है

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गगनयान मिशन क्‍या है. इस सवाल का जवाब ऑपरेशन चंद्रयान 2 के बाद हर कोई जानना चाहता है. जिस तरह से चंद्रयान 2 ऑपरेशन इसरो का बड़ा देसी प्रोजेक्‍ट रहा, ठीक उसी तरह गगनयान भी इसरो का अगला प्रोजेक्‍ट है. गगनयान मिशन की खास बात है कि यह इसरो का मानवयुक्‍त अंतरिक्ष मिशन है, जो 2022 में पूरा होगा.   

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गगनयान मिशन 2022

इसरो 2022 तक मानवयुक्‍त अंतरिक्ष ऑपरेशन गगनयान मिशन को पूरा कर लेगा. चंद्रयान 2 के बाद अब गगनयान मिशन की तैयारी तेज हो गई है. अंतरिक्ष यात्रियों के सेलेक्‍शन का फर्स्‍ट स्‍टेप को पूरा कर लिया गया है. इंडियन एयरफोर्स की ओर से कहा गया है कि चयनित पायलटों को कठिन फिजिकल टेस्‍ट, लैब टेस्‍ट, क्‍लीनिकल टेस्‍ट, रेडियोलॉजी टेस्‍ट और साइकोलॉजिकल टेस्‍ट का प्रोसेस पूरा करना पड़ा.

भारतीय वायुसेना की ओर से कहा गया कि मिशन गगनयान का टारगेट 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों के दल के साथ अंतरिक्ष यान को लॉन्‍च करना है.

इसरो के चेयरमैन के सिवन का कहना है कि इसरो तय समय पर गगनयान मिशन पूरा करने में सक्षम है. 

के सिवन ने कहा कि हम अंतरिक्ष में महिला अंतरिक्ष यात्री को भेजना चाहते हैं. मेरे विचार से हमें पुरुष और महिला दोनों को इसके लिए प्रशिक्षित करना चाहिए.

सिवन ने कहा कि प्रधानमंत्री भाइयों और बहनों की बात करते हैं. हमें उनकी भावना को आगे बढ़ाने में खुशी होगी. लेकिन यह प्रशिक्षण और अन्य पहलुओं पर निर्भर करेगा.

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गगनयान मिशन इसरो

गगनयान मिशन के लिए 10 हजार करोड़ खर्च होंगे. भारत के इस महत्‍वपूर्ण स्‍पेस प्रोग्राम गगनयान मिशन की जिम्‍मेदारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के कंधों पर है. यह भारत का पहला मानवयुक्‍त स्‍पेस प्रोग्राम है. गगनयान मिशन के तहत तीन सदस्‍यीय दल को 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष भेजा जाएगा. अंतरिक्षयान को पृथ्‍वी के निचली कक्षा में स्‍थापित किया जाएगा. 

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गगनयान मिशन घोषणा

गगनयान मिशन की घोषण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 2018 के स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर की गई थी. पीएम मोदी ने कहा था कि भारत 2022 में अपने किसी बेटे या बेटी को स्‍पेस में भेजेगा. इस घोषणा के बाद 28 दिसंबर 2018 को भारत सरकार के कैबिनेट ने गगनयान मिशन को मंजूरी दी. साथ ही कैबिनेट ने गगनयान प्रोजेक्‍ट के लिए 10 हजार करोड़ की मंजूरी दी.  

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भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

गगनयान मिशन के लिए जीएसएलवी एमके 3 का इस्‍तेमाल किया जाएगा. इसमें स्‍पेस में 3 अंतरिक्ष यात्रियों को साथ ले जाने की क्षमता तैयार किया जाएगा.  इसमें क्रू स्‍केप सिस्‍टम का टेस्‍ट पूरा कर लिया गया है. जीएसएलवी एमके  लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम और स्‍पेस सूट प्राप्‍त कर लिए गए हैं और इसका टेस्‍ट भी हो गया है. इसरो ने गगनयान मिशन के लिए अधिकतर बेसिक टेक्‍नोलॉजी का विकास और प्रदर्शन किया है.

गगनयान मिशन के फायदे की बात करें तो अंतरिक्ष में भारत की स्‍वायता की दिशा में यह गगनयान मिशन एक बड़ा कदम साबित होगा. इस प्रोग्राम से देश में साइंस और टेक्‍नोलॉजी के खेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा. गगनयान आने वाले कल की टेक्‍नोलॉजी के टेस्‍ट के लिए स्‍पेस प्रोग्राम के लिए बेहतर प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराएगा.

गगनयान मिशन से रोगजगार बढ़ेंगे. साथ ही मानव संसाधन विकास और  इकोनॉमी को ग्रोथ मिलेगा.

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