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चार ट्रांसजेंडरों ने सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्‍पा के दर्शन किये

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Sabarimala (Kerala): सबरीमाला में चार ट्रांसजेंडरों ने मंगलवार (18 दिसबंर) को भगवान अयप्पा के दर्शन किए.  पारंपरिक काले रंग की साड़ी पहने अनन्या, तृप्ति, रेंजुमल और अवंतिका ने इस दौरान भगवान को चढ़ाने के लिए पारंपरिक ‘इरुमुदिकेतु (भगवान का चढ़ावा)’ ले रखा था. इन चारों को पुलिस ने निलक्कल से पंबा तक सुरक्षा प्रदान की. इन लोगों को रविवार को मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिली थी. लेकिन एक दिन पहले अनुमति प्राप्त करने के बाद उन्होंने (मंगलवार को) दर्शन किए. इन सभी ने साड़ी पहनी हुई थी.

किसी ने नहीं किया विरोध

सुबह एरुमेली पहुंचने के बाद एर्नाकुलम के चारों भक्तों ने साड़ी पहनी और सुरक्षा के बीच पंबा से सुबह आठ बजे मंदिर की तरफ चढ़ाई शुरू की. सुबह 9.45 बजे यह लोग मंदिर परिसर पहुंचे और पूजा-अर्चना संपन्न की. इस दौरान किसी भी समूह द्वारा विरोध नहीं किया गया.

रविवार को इन चारों को रविवार को पुलिस ने पहाड़ी पर चढ़ाई पूरी करने से इसलिए रोक दिया था जब उन्होंने कहा था कि वे साड़ी में दर्शन करना चाहते हैं. इसके बाद उन्होंने कोट्टायम पुलिस अधीक्षक से शिकायत की और सोमवार (17 दिसंबर) को केरल उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त पुलिस महानिदेशक ए. हेमचंद्रन से भी संपर्क किया, जो तीर्थयात्रा की देखरेख करने वाली तीन सदस्यीय समिति का हिस्सा हैं.

इसके बाद एक ट्रांसजेंडर अनन्या ने मीडिया को बताया कि उन्हें अनुमति मिल गई है. ट्रांसजेंडरों को पहले भी मंदिर में जाने की अनुमति मिलती रही है और इस समूह के लोगों ने यहां पूजा-अर्चना भी की है.

ट्रांसजेंडर खुश, कहा- जीवन का मिशन पूरा हुआ

चारों ने कहा कि वे इसको लेकर अत्यंत खुश हैं कि उन्हें मंदिर में पूजा करने का मौका मिला. यह उनके जीवन का एक मिशन था जो साकार हो गया. इन चारों ने सोमवार को केरल हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के सदस्य डीजीपी ए हेमचंद्रन और पुलिस महानिरीक्षक मनोज अब्राहम से सोमवार को यहां मुलाकात की थी जिसके बाद इन्हें आगे बढ़ने की इजाजत दी गई. पुलिस ने इससे पहले उनकी यह कहकर कोई मदद करने से इनकार कर दिया था कि उन्हें इस मुद्दे पर कुछ विधिक स्पष्टीकरण लेना है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयुवर्ग के बीच की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया था, जिसके बाद से राज्य में लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी 10-50 से आयुवर्ग की कोई भी महिला विरोध-प्रदर्शनों के चलते प्रवेश नहीं कर सकी है.

 

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