झारखंड के इन छह जिलों के विकास के लिए हर साल केंद्र से मिलेंगे 300 करोड़ रूपये

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#Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के मुताबिक नीति आयोग ने अगले तीन साल के लिए छह ‘आकांक्षी’ जिलों को हर साल कुल 300 करोड़ रूपये की मंजूरी दी है. दरअसल, झारखंड के 19 जिले नीति आयोग के ‘आकांक्षी’ जिलों का कायाकल्प श्रेणी के तहत हैं. देश के कुल 115 जिलों में ये जिले भी शामिल हैं. ये जिले स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षण, वित्तीय समावेश, सहित अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय असंतुलन को खत्म करने के लिए छह आकांक्षी आदिवासी जिले में प्रत्येक को 50 करोड़ रूपये (कुल 300 करोड़ रूपये) मिलेगा. यह मौजूदा वित्त वर्ष से मिलेगा. उन्होंने यह बात नयी दिल्ली में नीति आयोग की बैठक को संबोधित करते हुए आज कही. दास ने हाल ही में राज्य के आकांक्षी जिलों के उपायुक्तों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बात करने को लेकर उनका आभार भी जताया.

दहाई अंक में वृद्धि दर हासिल करने के लिये और कदम उठाने की जरूरत : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के सामने अब चुनौती वृद्धि दर को दहाई अंक तक पहुंचाने की है, जिसके लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत. मोदी ने आज यहां राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की संचालन परिषद की चौथी बैठक को संबोधित करते हुए कहा, दुनिया को उम्मीद है कि भारत जल्दी ही 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था होगी.

बैठक में 23 राज्यों के मुख्यमंत्री और एक लेफ्टिनेंट गवर्नर (अंडमान निकोबार द्वीप समूह) शामिल हुए. बैठक में ओडिशा, गोवा, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा और दिल्ली के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए. बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री बाढ़ की समस्या से निपटने में व्यस्त होने के कारण नहीं आ पाये. दिल्ली के मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि निमंत्रण भेजा गया था लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे वित्त आयोग को नये सुझाव दें कि किस प्रकार से अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित किया जा सकता है और खर्चों में सुधार किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने यह सुझाव 15वें वित्त आयोग के नियम-शर्तों में संसाधनों के आवंटन 2011 की जनसंख्या को आधार बनाने को लेकर दक्षिणी राज्यों की आपत्तियों के बीच रखा. प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षमता और संसाधनों की किसी तरह की कमी नहीं है और चालू वित्त वर्ष में राज्यों को केंद्र से 11 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल की तुलना में छह लाख करोड़ रुपये अधिक है.

उन्होंने कहा कि बीते वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और ‘अब चुनौती इस वृद्धि दर को दहाई अंक में ले जाने की है.’ इस बैठक में किसानों की आय दोगुनी करने, पिछड़े जिलों का विकास, आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, पोषण मिशन और महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को हासिल करने के लिए ये कदम उठाने जरूरी हैं.

पिछड़े जिलों को प्राथमिकता के आधार पर मिलेगी मदद

उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक असंतुलन को दूर करना बहुत जरूरी है. मोदी ने जोर देकर कहा कि विकास का इंतजार कर रहे 115 पिछड़े जिलों में मानव विकास के सभी पहलुओं और मानदंडों को सुधारने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज्य अभियान इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एक नये मॉडल के रूप में उभरा है. इसका विस्तार पिछड़े जिलों के 45,000 गांवों में किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा चिह्नित 115 पिछड़े जिलों की तर्ज पर, राज्य कुल प्रखंड के 20 प्रतिशत को पिछड़े प्रखंड के रूप में चिह्नित कर सकते हैं. वे इसके लिये अपने खुद के मानकों को निर्धारित कर सकते हैं. पीएमओ के अनुसार मोदी ने मध्य प्रदेश, बिहार, सिक्किम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की एक समिति बनायी है जो मनरेगा को कृषि से जोड़ने के बारे में नीतिगत सुझाव देगी.

 

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