फेडरेशन सरकार नहीं लेकिन हमारे बिना सरकार भी अधूरी: FJCCI

फेडरेशन सरकार नहीं लेकिन हमारे बिना सरकार भी अधूरी: FJCCI

Ranchi: झारखण्ड में जारी पावरकट की समस्या के साथ ही अंचल कार्यालय, भू-राजस्व, परिवहन, सिंगल विंडो सिस्टम, नगर विकास, नगर निगम द्वारा जारी अनियमितताओं के अलावा अन्य समस्याओं पर सरकार की उदासीनता से त्रस्त होकर फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज द्वारा राज्यस्तर पर मुहिम को गति दी है.

चैंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अक्षम पदाधिकारी, व्यापार जगत और सरकार के बीच संवादहीनता और असंवेदनषील सरकार की कार्यप्रणाली से ही आज राज्य में मंदी का दौर आरंभ हुआ है. कई विभागों द्वारा लागू की गई अव्यवहारिक कानूनों के कारण आज व्यापार जगत परेशान है.

परिवहन, भूमि राजस्व, सिंगल विंडो सहित अन्य कई विभागीय कार्य ऑनलाइन हैं लेकिन आज भी बिना पर्सनल हस्तक्षेप के विभागों में काम नहीं होता. व्यापारी, उद्यमी एवं प्रोफेषनल्स वर्ग सरकार के लिए राजस्व संग्रहकर्ता के रूप में कार्य करते हैं. लेकिन, सरकार हमारे विकास के बारे में नहीं सोचती.

चैंबर अध्‍यक्ष ने कहा कि सरकार को यह सोचना होगा कि हमारी तरक्की से ही राज्य की तरक्की संभव है. केंद्र सरकार ने बार-बार करदाताओं को सम्माजनक शब्दों से धन्यवाद दिया जाता है, ले‍किन झारखण्ड में यह स्थिति बिल्कुल विपरीत है. मौजूदा हालात में झारखण्ड सरकार के अधिकारियों की चाल से ऐसा नहीं लगता कि उनको उद्योग या व्यापार की समस्याओं से कोई सरोकार है और सरकार का उनपर कोई नियंत्रण अगर है, तो नजर नहीं आ रहा.

अफसर बात नहीं करते, मंत्री इलेक्‍शन मोड में

उन्‍होंने कहा कि मोमेंटम झारखण्ड के आयोजन की कार्यशैली से ही पता चल गया था कि अफसरों की प्राथमिकता औद्योगिकीकरण ना होकर कुछ और ही है. बडे-बडे दावों के बाद भी लगातार पुराने उद्योगों का बंद होना और कई बार चेताने के बाद भी सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों को नजरअंदाज होना जारी है. औद्योगिक क्षेत्रों की दयनीय स्थिति पर सारी वार्ताओं में उठाने के बाद भी संबंधित अधिकारीगण औपचारिक आश्‍वासन देते रहे हैं. हमने बार-बार सरकार से राजस्व संग्रह में हो रही कमी से सरकार का ध्यान दिलाया है लेकिन दुखद है कि सरकार द्वारा हमारे सुझावों पर विचार नहीं किया गया.

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फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज ने अनेकों बार, अधिकारियों और मंत्रियों का संवैधानिक तरीके से ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया पर नतीजा शून्य रहा. अफसर बात न करने के बहाने ढूंढते हैं और मंत्री इलेक्‍शन मोड में हैं. जनता जाय तो कहां जाय.

औद्योगिकीकरण के लिए उद्योग विभाग के पास कोई वीजन नहीं

उद्योग उप समिति चेयरमेन अजय भंडारी ने कहा कि विधायिकी और अधिकारियों के बीच आपसी सामंजस्य का भारी अभाव है. कार्यपालिका जब फेल हो जाती है तब विधायिका की यह जिम्मेवारी है कि चीजों को ठीक करे, लेकिन झारखण्ड में माननीय मंत्रीगण अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किये जानेवाले गलत आंकडों और रिपोर्ट पर ही विश्‍वास करते हैं. ग्राउण्ड रियालिटी से उन्हें कोई मतलब नहीं होता.

ऐसा लगता है कि राज्य में औद्योगिकीकरण के लिए उद्योग विभाग के पास कोई वीजन ही नहीं है. उद्योग विभाग हमारी समस्याएं सुनने की मंशा ही नहीं रखता है.

मोमेंटम झारखण्ड के दौरान भी चैंबर ने सरकार को चेताया था कि जिस रास्ते से आप औद्योगिकीकरण की बात करते हैं, इससे औद्योगिकीकरण नहीं होगा. लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने ना ही हमें बुलाकर बात की और ना ही हमारे किसी पत्रों का जवाब दिया.

आज स्मार्ट सिटी के कार्य में लगे अधिकांश कांट्रैक्टर राज्य से बाहर के हैं. स्थानीय उद्यमियों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता नहीं दी जाती है. यह भी कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के पांच ट्रिलियन का सपना पूरा करने के लिए राज्य सरकार को व्यापार एवं उद्योग की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना होगा.

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बिजली वितरण की व्यवस्था खराब

बिजली उप समिति चेयरमेन बिनोद तुलस्यान ने कहा कि तमाम घोषणाओं और दावों के बाद भी बिजली की उपलब्धता और दर, व्यापार को चैपट करने के लिए काफी है. मगर जिद का आलम यह है कि हजार करोड घाटा खानेवाला, भ्रष्टाचार के कंठ तक लिप्त जेबीवीएनएल को सरकार छोडने को तैयार नहीं है.

राज्य में बिजली वितरण की व्यवस्था तो खराब है ही, संचरण व्यवस्था भी ठीक नहीं है. हमने कई बार उर्जा सचिव से मिलकर दोनों विभागों के एमडी के साथ बैठक कराने का आग्रह किया. लेकिन, इस दिशा में आज तक कार्रवाई नहीं की गई. राज्य की ज्यादातर डेवलपमेंट स्कीम्स को इस तरह डिजाईन किया जाता है कि स्थानीय उद्योग और व्यापारी, उसका बहुत छोटा हिस्सा ही पा पाते हैं. हजारों करोड की सोलर पेयजल योजना और स्मार्ट सिटी इसके ज्वलंत उदाहरण हैं. यह दुर्भाग्य है कि जिस विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री के पास है उन विभागों की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है.

बस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से अरूण बुधिया ने परिवहन विभाग से बस मालिकों को हो रही समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा कि बस व्यापार में इतनी कठिनाईयां बढा दी गई हैं कि हमारे बच्चे इस व्यापार में आना नहीं चाहते हैं. परिवहन प्राधिकार की बैठकों में बिना हमसे चर्चा किये अव्यवहारिक निर्णय ले लिये जाते हैं. समय-सारणी में बदलाव के लिए 3000/-रू0 शुल्क लिये जाते हैं लेकिन बिना सुनवाई के ही इसे रिजेक्ट कर दिया जाता है.

परिवहन विभाग के नये कानून से नुकसान

चैंबर के सदस्य बिनोद नेमानी ने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा लागू नये प्रावधानों से क्रेन, पोकलेन एवं यांत्रिक खुदाई वाहन जो सामान्य रूप से जेसीबी, बोरिंग मशीन अथवा अन्य निर्माताओं द्वारा निर्मित खोदक मशीन/यान के रूप में जानी जाती हों, पर 7 वर्ष का एकमुश्‍त 12 फीसदी रोड टैक्स लेने के अव्यवहारिक कानून को लाया गया.

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इस अव्यवहारिक कानून में बदलाव के लिए चैंबर द्वारा सरकार के समक्ष विभागीय मंत्री, आयुक्त एवं सचिव के समक्ष कई बार मुद्दे उठाये गये, वार्ता कर तथ्यों के साथ सुझाव भी दिये गये. कई प्रयासों के बाद भी परिवहन व्यापार से जुडे व्यापारियों को आष्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला.

परिवहन विभाग द्वारा ऐसे-ऐसे नियम और अधिसूचनाएं लाई गई हैं जिससे वर्तमान में जो इस व्यवसाय मे जुडे हैं उनका कारोबार लगभग मृतप्राय हो गया है. नये प्रावधानों के कारण यहां पर बडे वाहनों के बिक्री भी कम हुई है जिससे सरकार का राजस्व संग्रह भी कम हुआ है. कई बार बैठक करने के बावजूद सरकार का अडियल रवैया और आश्‍वासन की पोटली थमा देना विभाग की हठधर्मिता को दर्षाता है जिससे राज्य का केवल नुकसान होगा.

औद्योगिक मंदी की स्थिति

अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने कहा कि फेडरेशन सरकार नहीं लेकिन हमारे बिना सरकार भी अधूरी है. सरकार हठधर्मिता छोडे और समस्याओं के निदान के लिए हमसे वार्ता करे. सरकार यह जरूर सोचे कि ऐसी क्या स्थितियां बनाई गईं जिससे प्रदेश के व्यापारी व उद्यमियों को एक और आंदोलन के लिए बाध्य होना पडा है. चीजों को नहीं सुधारने के कारण ही राज्य में औद्योगिक मंदी की स्थिति उत्पन्न हुई है.

प्रेस वार्ता में पूर्व अध्यक्ष विष्णु बुधिया, पवन शर्मा, सदस्य मुकेश अग्रवाल के अलावा कई सदस्य उपस्थित थे. चैंबर द्वारा राजधानी रांची में 8 होर्डिंग्स लगाये गये हैं. यही होर्डिंग्स सभी जिलों के चैंबर ऑफ कॉमर्स को भी अपने-अपने जिलों में लगाने के लिए भेजा गया है.

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