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हाई जीडीपी ग्रोथ के बाद भी रोजगार सृजन में झारखंड फिसड्डी, बिहार आगे

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Ranchi: राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेजी से वृद्धि करने वाले 12 राज्य इसका फायदा रोजगार सृजन में नहीं उठा सके हैं. Global analytic agency (रेटिंग्स एजेंसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार झारखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश इस मामले में सबसे पीछे रहे. अलबत्ता झारखंड का प्रदर्शन सबसे खराब रहा.

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जबकि बिहार, गुजरात और हरियाणा रोजगार सृजन के मामले में अव्वल रहे हैं. उस दौरान बिहार का सकल घरेलू राज्य उत्पाद (जीएसडीपी) 11.3 फीसदी की दर से बढ़ा.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 पर आधारित क्रिसिल की रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड समेत 12 राज्यों में जीडीपी की वृद्धि मुख्य तौर पर उन क्षेत्रों में हुई, जिनमें रोजगार के कम अवसर होते हैं.

हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि कम आय वाले राज्यों में ऊंची विकास लंबे वक्त तक बरकरार नहीं रह पाई.

क्रिसिल की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आयी है जब सेंटर फोर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने सिर्फ 2018 में ही एक करोड़ दस लाख नौकरियां समाप्त होने की बात कही है.

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किन क्षेत्रों में रोजगार नहीं

रेटिंग्स एजेंस ने यह भी कहा है कि जीडीपी में वृद्धि के बाद भी राज्यों में आर्थिक वृद्धि रोजगार सृजन के अनुकूल नहीं रही है. रिपोर्ट में कहा गया कि 11 राज्यों में विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, होटल, परिवहन और संचार सेवाओं जैसे रोजगार केंद्रित क्षेत्रों में राष्ट्रीय दर की तुलना में कम रफ्तार से वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान कम आय वाले राज्यों और अधिक आय वाले राज्यों के बीच प्रति व्यक्ति आय की खाई चौड़ी हुई है.

स्वास्थ्य, शिक्षा पर ध्यान नहीं

हांलांकि राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश पिछले तीन वर्ष में क्षमता विस्तार के अनुपात में सबसे ऊपर रहे. पर इन राज्यों में स्वास्थ्य, सिंचाई और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.

क्रिसिल की रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात और कर्नाटक महंगाई दर, वृद्धि और राजकोषीय घाटे के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले तीन शीर्ष राज्य रहे. इस मामले में केरल और पंजाब का प्रदर्शन फिसड्डी रहा.

रेटिंग्स एजेंसी ने उन 17 राज्यों की रैकिंग जारी की जो विभिन्न मापदंडों के अनुसार विश्ष श्रेणी में नहीं आते हैं. एजेंसी ने छोटा राज्य होने के कारण गोवा को इसमें शामिल नहीं किया है.

ग्लोबल स्किल समिट

गौरतलब है कि इसी महीने दस जनवरी को झारखंड में बीजेपी की सरकार ने ग्इलोबल स्सकिल समिट का आयोजन किया था. इस समिट के जरिए सरकार ने राज्य के एक लाख छह हजार युवाओं को रोजगार देने का दावा किया है. युवाओं को देश- विदेश के कई औद्योगिक घराने और बाहर की कंपनियों में काम करने के लिए नियुक्तियां पत्र भी सौंपी गई.

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हालांकि राज्यपाल ने इस समिट में इस बात पर चिंता जताई थी कि नौकरियों में कमी की वजह से युवाओं में निराशा रहता है. इसलिए बाहरी कंपनियां युवाओं को काम देने के साथ मेधा और श्रम का सही इस्तेमाल करें और सम्मानजनक पैसे दें, ताकि झारखंड के युवा काम छोड़कर वापस नहीं लौटे. अक्सर यह बातें सामने आती रही है कि बाहर काम करने गए युवा कम पैसे मिलने पर काम छोड़ कर चले आते हैं. इसके बाद संकट और बढ़ता है.

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