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क्षेत्रीय दलों में आजसू पार्टी के प्रत्याशियों को लेकर उत्‍साह

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Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में आजसू पार्टी ने क्षेत्रीय दलों में सबसे अधिक प्रत्याशियों के साथ सेंसेक्स की तरह उछाल पाने वाली पार्टी में शुमार के साथ उभरी है. जबकि विपक्षी दल की भूमिका निभाने वाली पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा दूसरे नम्बर पर है. आजसू पार्टी ने 53 प्रत्यशी खड़ा किये है तो झामुमो ने मात्र 43 सीटों पर ही प्रत्यशी दिये हैं. बाकी सीटें कांग्रेस और राजद के लिए छोडा गया है. झारखंड विकास मोर्चा को महागबंधन का साथ नही मिलने की स्थिति में वह स्वतंत्र रुप से सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जबकि झारखंड पार्टी(एनोस) लगभग 7 सीटों पर ही प्रत्याशी खड़ा कर पायी है.

इस प्रकार क्षेत्रीयों दलों में सबसे मजबूत पार्टी के रुप में आजसू पार्टी पहली बार अकेले मजबूती के साथ उभर कर चुनावी मैदान में है.

भारतीय जनता पार्टी और आजसू पार्टी के बीच इस चुनाव में गठबंधन नहीं होना सबसे अधिक चर्चा का केन्द्र रहा है. अब जैसे-जैसे चुनावी समर गतिमान होता जा रहा है आजसू पार्टी के तेवर में उबाल आने लगा है. पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो का नाम मुख्यमंत्री के रुप में लिया जा रहा है. भाजपा के साथ रहने से आजसू पार्टी को अपने ही सहयोगी का भीतरघात झेलना पड रहा था. साथ ही पार्टी के समक्ष कार्यकर्ताओं को समेटकर रखने की चुनौती होती थी. स्वतंत्र रुप से चुनाव लडने के कारण आजसू पार्टी की पहचान मजबूत ही नहीं बल्कि अल्पसंख्यक,अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछडी जातियों के बीच विश्वास बढ़ा है. इसका फलाफल इस चुनाव में सहजता से दिखाई देने लगा है. वही दूसरी ओर राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की स्थिति सबसे दायनीय है. उसे बैशाखी के सहारे बैतरनी पार करनी पड रही है. कांग्रेस के तीन पूर्व अध्यक्ष दूसरी पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़कर राजनीतिक अस्तित्व बचाने में लगे हैं.

छात्र संगठन से कैरियर शुरु करने वाला आजसू सियासी गलियारों में भी दस्तक देते रही है. झारखंड अलग राज्य की लड़ाई लडते हुए ओडिसा सहित अखंड बिहार में दो बार एक-एक सीट पर चुनाव जीतकर अपनी उपस्थित दर्ज करा चुकी है. झारखंड के सवाल पर आजसू ने कोई सौदेबाजी नही की. पहली बार घाटशिला से विधायक के रुप में सूर्य सिंह बेसरा ने जीत हासिल की और झारखंड अलग राज्य के मुद्दे पर बिहार विधानसभा से त्याग पत्र दे दिया. इस तरह त्याग की भावना को जागृत करते हुए अलग राज्य के आन्दोलन को गति प्रदान किया. इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सुदेश कुमार महतो ने चमत्कृत रुप से 2000 में राजनीति में उदित हुए. उन्‍होने झारखंड राज्य के गठन में सबसे अहम भूमिका अदा की. 15 नवम्बर 2000 में झारखंड गठन हुआ. सुदेश महतो झारखंड के पहले पथ निर्माण मंत्री बने. इसके बाद आजसू कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आजसू एक संपूर्ण सियासी पार्टी के उभरी. एक सीट से दो और दो से पांच सीटों पर चुनाव जीतकर झारखंड की राजनीति में झंझावत पैदा कर दी. पांच सीटों के बाद जैसे भाजपा की नजर ही लग गयी और गठबंधन के कोपभाजन का शिकार स्वयं सुदेश कुमार महतो हुए.

आज पूरा झारखंड सुदेश महतो को उम्मीदों के नायक के रुप देख रहा है. भाजपा के साथ गठबंधन टूटने से आजसू पार्टी फिर से सियासी गलियारों में मजबूती के साथ धार व आकार लेने लगा है. इस चुनाव में कई चौकाने वाले परिणाम उभरकर सामने आने वाले हैं. यह परिणाम नये वर्ष में नवाचार व नये व्यवहार पैदा करेगा. पुष्‍कर महतो की रिपोर्ट.

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