विद्युत शवदाह गृह एक्टिव होता तो शव लेकर नहीं भटकना पड़ता

by

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में किसी समय में दो विद्युत शवदाह गृह बने, लेकिन इन्‍हें कभी उपयोग में नहीं लाया गया. प्रशासनिक शिथिलता की वजह से आज विद्युत शवदाहगृह के अवशेष और खंडहर ही दिखते हैं. अब झारखंड में कोरोना वायरस के संक्रमण से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है. लेकिन इनके अंतिम संस्‍कार के लिए जगह नहीं मिल रहा है.

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के गाइडलाइन में कहा गया है कि कोरोना वायरस से मरने वालों को तुरंत करीबी जगह में अंतिम संस्‍कार किया जाना चाहिए. देरी होने से संक्रमण का खतरा बढ़़ता है. रांची में कोरोना से मौत के बाद शव को 12 घंटे बाद भी दफनाया नहीं जा सका. इसे प्रशासन ने जहां भी दफनाने की कोशिश की वहां के लोगों ने लॉकडाउन तोड़कर विरोध किया.

रांची के विद्युत शवदाह गृह को फिर से शुरू करने के लिए पिछली सरकार को मुक्ति संस्‍था के अध्‍यक्ष प्रवीण लोहिया ने चिट्ठी भी लिखी थी. राज्‍यसभा सांसद महेश पोद्दार ने भी मौजूदा मुख्‍यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखा था. तब सीएम सचिवालय से राज्‍यसभा सांसद को जवाब दिया गया कि आपकी बात को संज्ञान में लेने के बाद संबंधित विभाग को उचित कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है.

Read Also  झारखंड लॉकडाउन ई-पास बनाने में प्राइवेसी सुरक्षित नहीं, तकनीकी कमियों का कोई भी कर सकता है गलत इस्‍तेमाल

संबंधित नगर विकास विभाग में सीएम की चिट्ठी के पहुंचने के बाद भी शवदाह गृह चालू करने के लिए किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

मुक्ति संस्‍था के प्रवीण लोहिया का कहना है कि विद्युत शवदाह गृह राजनीति की भेंट चढ़ गया. कुछ अपनों ने लुटा, कुछ व्यवस्था की ख़ामी. पर समाज को सुविधा न मिल सकी.

उन्‍होंने बताया कि हमने जब से मुक्ति संस्था शुरू की. आलोचना साथ साथ चली. बहरहाल आज महसूस किया जा रहा की मानव देह का किया क्या जाए. दो गज़ ज़मीन और कुछ लकड़ियों को मोहताज है. इंसानियत आज सर्मसार है कि क्या करें. अपने-अपने लाभ और लोभ में हम चिंतित हैं. पर गुनाह किसका जिसने मौत से जंग की?

मुंबई में लापरवाही बनी जानलेवा

कोरोना संक्रमण से जीते-जी ही नहीं, दुर्भाग्यवश मौत के बाद भी संकट है. ऐसे में यह भी जानना जरूरी है कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के शवों को कैसे दफन करें या उनका दाह संस्कार करें. दरअसल, यह मामला इसलिए प्रासंगिक बन गया है, क्योंकि पिछले सप्ताह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक सर्कुलर जारी किया था कि कोविड-19 संक्रमितों के शवों का नजदीकी श्मशान में बिना किसी रस्म-रिवाज या अनुष्ठान के दाह संस्कार किया जाएगा. बाद में उसमें संशोधन कर बड़े कब्रगाहों में दफनाने की भी अनुमति दी गई.

Read Also  रांची में 18 प्लस वैक्सीनेशन के लिए नहीं करना होगा इंतजार, जिला प्रशासन कर रही है खास तैयारी

क्यों आया यह आदेश : महानगरपालिका के आयुक्त कहते हैं कि यह सर्कुलर इसलिए जारी किया गया कि एक समुदाय के नेता ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कब्रगाह घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है. इस कारण आसपास के रहवासी क्षेत्र में संक्रमण फैलने का खतरा है. हिंदुजा अस्पताल में कोविड-19 संक्रमित एक जनरल सर्जन की मौत हो गई थी. उनके परिवार वालों ने शव के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 27 मार्च को निकाय कर्मियों की गैरमौजूदगी में ही उसे दफना दिया. इस घटना के बाद बीएमसी को इस बात की चिंता हुई कि क्या शव दफनाने में सतर्कता बरती गई?

क्या हुई सिफारिश : बीएमसी ने कहा कि ऐसे शवों के संस्कार बिजली या पाइप्ड प्राकृतिक गैस सुविधाओं वाले श्मशान में किए जाएं. सर्कुलर में यह भी कहा गया कि शव को प्लास्टिक में पैक करके भी दफनाने में संदूषण (कन्टैमनेशन) का खतरा रहेगा, क्योंकि प्लास्टिक में विघटन (डिकंपोजिशन) देरी से होगा. यह भी कहा गया कि अंतिम क्रिया में पांच लोग से ज्यादा नहीं होने चाहिए.

Read Also  31 वर्षीय विधायक अंबा प्रसाद पर FIR, 48 लाख अवैध निकासी का आरोप

कितनी जल्दी करें संस्कार? : मुंबई के केईएम अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ हरीश पाठक का कहना है कि शव का जल्द से जल्द संस्कार कर दिया जाना चाहिए. यदि इसे शवगृह में रखा जाता है तो इसे 4-6 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाना चाहिए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, संक्रामक शव को उचित भस्मक (इन्सिनरेटर) में जलाया जाना चाहिए, जिसके प्राथमिक चैंबर का तापमान 800 डिग्री सेल्सियस और द्वितीयक चैंबर का तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस हो. बायोमेडिकल कचड़े के निपटारे के लिए ऑटो-क्लेव मशीन का इस्तेमाल होना चाहिए.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.