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झारखंड : एक लाख की आबादी में 100 मौतों का बड़ा कारण Air Pollution

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Ranchi: (Air Pollution Introduction) एयर पॉल्‍यूशन दुनिया के लिए एक बड़ी समस्‍या बन गयी है. जिस तरह से इसके (Air Pollution Effects) खतरे दिनों दिन भयावह होते जा रहे हैं, यह एक चिंता का विषय बनता जा रहा है.

भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण के खतरों पर काम किया जा रहा है. (Effects of Air pollution in Points) वहीं झारखंड के कई शहर अब इसके चपेट में आ रहे हैं. एक ब्रिटिश रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में एक हर साल एक लाख आबादी में 100 मौत वायु प्रदूषण (Effects of Air pollution on Human Health) से हो रहे हैं. इस पर काम करने वाली संस्‍था सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED)इससे निपटने के लिए एक्‍शन प्‍लान (Control of Air Pollution) तैयार करने के लिए कमर कस ली है.

सीड झारखंड में वायु प्रदूषण को नियंत्रित (Prevention of air Pollution) करने के के लिए‘टुवर्ड्स हेल्दी एयर’प्रोग्राम शुरू की है. इसके तहत संस्‍था झारखंड के पर्यावरण प्रेमियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक्‍शन प्‍लान तय कर रही है.

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रांची में आयोजित परिचर्चा में भागीदार विशेषज्ञों ने स्वस्थ समाज व बेहतर पर्यावरण के लिए ‘एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’, जन स्वास्थ्य सुरक्षा तथा प्रदूषण उत्सर्जन में कमी आदि मुद्दों से जुड़ी कई तरह की रणनीतियों (Air Pollution Solutions) पर चर्चा की.

‘क्लीन एयर एक्शन प्लान’ लागू करने की अपील

सीड द्वारा प्रेरित शहर केंद्रित इस चर्चा में वायु प्रदूषण तथा शहरी प्रशासन से जुड़े मेडिकल प्रोफेशनल्स, सिविल सोसायटी संगठन, शिक्षाविद् तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की.

इस कार्यशाला में भागीदार विशेषज्ञों तथा प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से वायु प्रदूषण से निबटने के लिए क्षेत्रीय उपागम की सिफारिश करते हुए राज्य सरकार से शहर केंद्रित स्वच्छ वायु कार्य योजना यानी ‘क्लीन एयर एक्शन प्लान’ लागू करने की अपील की.

झारखंड में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर देते हुए सीड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने कहा कि ‘‘रांची जैसे झारखंड के कई शहर खतरनाक स्तर के वायु प्रदूषण की स्थिति से जूझ रहे हैं.

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अंकिता ने कहा ‘बढ़ते वायु प्रदूषण से समाज व मानव स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं (Air Pollution Health Effects) पैदा हो रही है, ऐसे में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है. झारखंड में वायु प्रदूषण इस कदर गंभीर हो चला है कि रांची महानगर को एक गैस चेंबर में बदलने से रोकने के लिए सरकार को ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है.

सीड की ओर से अंकिता ज्‍योति ने कहा कि ‘हम सरकार से अपील करते हैं कि इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या से निबटने के लिए वह क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार और लागू कर मानaव स्वास्थ्य को बेहतर कर सकती है.

झारखंड के इस क्लीन एयर एक्शन प्लान में किसी अन्य कानूनी और प्रवर्तनीय ढांचे की तरह प्रदूषण स्रोत के अनुरूप उससे निपटने की कार्यप्रणाली व तय प्राथमिकताएं, लक्षित रेगुलेशन और वायु प्रदूषण उत्सर्जन में कमी के सततशील उपाय तथा जरूरी संस्थागत व्यवस्थाएं अवश्य होनी चाहिए, तभी सार्थक व ठोस नतीजे सामने आएंगे.’’

इस अवसर पर ऑल इंडिया इंस्टीट्युट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन के हेड डॉ नीरज अग्रवाल ने कहा कि ‘वायु प्रदूषण झारखंड में मौत तथा अपंगता के मामले में तीसरा सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है.

उन्‍होंने कहा कि मशहूर ब्रिटिश रिसर्च जर्नल ‘लैंसेट कमिशन’ के अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण साल 2016 में झारखंड की प्रति एक लाख आबादी पर करीब 100 मौतें हुईं. वायु प्रदूषण से होनेवाले मानव स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मौतें अब कोई रहस्य की बात नहीं रही, ऐसे में बेहतर हवा तथा स्वस्थ समाज के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।’

झारखंड : एक लाख की आबादी में 100 मौतों का बड़ा कारण Air Pollution

डॉ अग्रवाल ने इस बात की ओर भी संकेत दिया कि ‘अभी क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की कमी है, ऐसे में हमें वायु प्रदूषण से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर बेहतर समझ के लिए गहन अध्ययन व शोध की जरूरत है, ताकि ये नीति-निर्माण में सहायक हो सकें. यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी किसी भी नीति के निर्माण के दौरान जन स्वास्थ्य को केंद्रीय महत्व मिलना चाहिए.’

परिचर्चा के केंद्रीय बिंदु के रूप में सीड ने सरकार से एक क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार करने की अपील की, जिसमें अल्पकालिक, माध्यमिक और दीर्घकालिक आधार पर सुपरिभाषित कदमों तथा क्रियान्वयन प्रणालियों का स्पष्ट प्रावधान हो.

 

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