कोलकाता की दुर्गापूजा, शुभ मुहूर्त, विशेष पूजा विधि और मंत्र | Durga Puja in Kolkata

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत पूरे राज्य में लोग अब ‘पूजो’ (Durga Puja in Kolkata) के मूड में नजर आने लगे हैं. बंगाली घरों में यह एक परंपरा है कि दुर्गापूजा के चार दिनों के दौरान हर रोज नया पोशाक पहनना चाहिए और इसी परंपरा के तहत नये कपड़ों के अलावा आभूषणों तथा सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी और आदान-प्रदान की शुरुआत हो चुकी है.

दुर्गापूजा के चार दिन कोलकाता की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है. बंगाली समुदाय को दुर्गापूजा के आनंदोत्सव के लिए अब चार अक्टूबर का इंतजार है.

कोलकाता में बहुत से बड़े क्लबों एवं दुर्गा पूजा समितियों ने अपने आयोजनों में कलाकारों के बुलावे की घोषणा के साथ ही खुटी पूजा का आयोजन भी किया है. 

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दुर्गा पूजा आयोजन और कोलकाता के पूजा पंडाल

माना जा रहा है कि इस साल संतोष मित्र स्कवायर दुर्गा पूजा समिति का आयोजन संबसे महंगे आयोजनों में से होगा. यहां जयपुर स्थित विश्वविख्यात शीशमहल की प्रतिक्रृति को प्रदर्शित करता पंडाल बनाया जा रहा है और इस पंडाल में करीब 10 फुट ऊंची सोने से बनी देवी दुर्गा की प्रतिमा रखी जायेगी.

durga puja pandal in kolkata

समिति के एक सदस्य का दावा है कि यहां का दुर्गापूजा शहर के सभी बड़े बजट वाले आयोजनों में सबसे महंगा होगा. सोने से बनने वाली प्रतिमा की लागत 18 करोड़ आंकी गयी है जबकि पंडाल की सजावट पर भी एक करोड़ रूपये से अधिक का खर्च आयेगा. सबसे लंबे क्राफ्ट तैयार करने के बाद प्रसिद्ध हुए कुमारतुली के शिल्पकार मिंटू पाल को दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा बनाने का काम सौंपा गया है.

इसके अलावा ठाकुरपुर एसबी पार्क , बेहाला नाटिन संघ , यूथ एसोसिएशन ऑफ मोहम्मद अली पार्क जैसे पुराने और प्रसिद्ध पूजा समितियों की ओर से दुर्गा पूजा के आयोजन की तैयारियां जोर-शोर की जा रही है.

कोलकाता में लगायें आस्‍था की डुबकी

शक्ति का रूप मानी जाने वाली मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कोलकाता में धूमधाम से हो रही है. ऐसे में अगर आप भी दुर्गा पूजा के दौरान कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सीधे पहुंच जाइए सिटी ऑफ जॉय के नाम से मशहूर कोलकाता. कोलकाता की दुर्गा पूजा देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में फेमस है और इसे देखने के लिए दूर से दूर सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं बल्कि टूरिस्ट भी पहुंचते हैं. 

Durga Puja Sindur Khela

दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता की बात ही अलग होती है. सिर्फ मां दुर्गा का आगमन ही नहीं बल्कि इससे जुड़ी कई दूसरी बातों की वजह से भी कोलकाता की दुर्गा पूजा सबसे अलग और फेमस है. लिहाजा आप बंगाली हों या नहीं इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता… कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान इन अनुभवों को एक्सपीरियंस करना न भूलें…

करें अलग-अलग पंडालों की सैर 

अब दुर्गा पूजा का मौका है और आप कोलकाता में हैं तो पंडालों में जाकर दुर्गा मां के दर्शन करना तो बनता है. कोलकाता की हर गली-मुहल्ले में आपको एक से बढ़कर एक पूजा पंडाल देखने को मिलेंगे जो अलग-अलग थीम और डिजाइन पर बने होते हैं. साथ ही पंडालों के अंदर स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा भी अलग-अलग तरह से बनी होती है. 

दुर्गा पूजा का बेहतरीन खाना 

अब पंडालों में घूम-घूम कर थक गए हों और भूख लगी है तो टेस्टी खाने के लिए आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं है. इन पंडालों के बाहर और अंदर ही आपको कई स्टॉल्स मिल जाएंगे जहां आपको एक से बढ़कर बेहतरीन खाना खाने को मिलेगा. दुर्गा पूजा को आप फेस्टिवल ऑफ फूड भी कह सकते हैं क्योंकि इस दौरान आपको सिर्फ बंगाली क्यूजिन ही नहीं बल्कि कई दूसरे प्रांतों का खाना भी टेस्ट करने का मौका मिलता है. 

कोलकाता की दुर्गा पूजा में ये भी है मशहूर

कन्या पूजन में हों शामिल

दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन या कुमारी पूजा भी होती है जिसमें 1 साल से 8 साल के बीच की बच्चियों की पूजा की जाती है. दरअसल, इन बच्चियों को देवी का रूप मानकर इन्हें मां दुर्गा की प्रतिमा के आगे बिठाया जाता है और इनकी पूजा की जाती है. कोलकाता की बात करें तो यहां अष्टमी के दिन कुमारी पूजा का आयोजन होता है और यहां के बेलूर मठ में सबसे अच्छी कुमारी पूजा देखने को मिलती है.

ड्रेसअप होकर बनें कार्निवाल का हिस्सा 

दुर्गा पूजा के दौरान सिर्फ कोलकाता में ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में डांस कॉम्पटिशन, फैन्सी ड्रेस कॉम्पटिशन, सिंगिंग कॉम्पटिशन, ड्रम बजाने का कॉम्पटिशन, बेस्ट ड्रेस्ड मेल-फीमेल जैसी कई प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. ऐसे में आपके पास दुर्गा पूजा के दौरान बेहतरीन तरीके से ड्रेस अप होकर न सिर्फ घूमने का बल्कि प्राइज जीतने का भी मौका होता है.

सिंदूर खेला में हों शामिल

दुर्गा पूजा के आखिरी दिन शादीशुदा महिलाएं दिल खोलकर सिंदूर खेलती हैं और इस परंपरा को सिंदूर खेला कहा जाता है. मां दुर्गा के विदा होने से पहले ये महिलाएं एक दूसरे को खुशी और गुडलक विश करने के मकसद से सिंदूर लगाती हैं और होली के त्योहार की तरह सिंदूर से भी खेल किया जाता है. आप चाहें तो इस ट्रडिशन का हिस्सा बन सकते हैं या फिर बेहतरीन तस्वीरें भी खींच सकते हैं.

दुर्गा पूजा 2019 की तारीख और कैलेंडर | Durga Puja 2019 Dates in Kolkata

इस साल शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू होगें. 6 अक्टूबर को दुर्गाअष्टमी यानी कि महाअष्टमी है. 7 अक्टूबर को दुर्गा नवमी यानी महानवमी है. 8 अक्टूबर को दुर्गा पूजा का दशहरा और विजयदशमी के साथ समापन होगा. (durga puja 2019 dates in kolkata)

When is Durga Puja Ashtami 2019: जानें किस दिन होगी किस देवी की पूजा

  • 29 सितंबर 2019- शैलपुत्री (इसका अर्थ है पहाड़ों की पुत्री)
  • 30 सितंबर 2019- ब्रह्मचारिणी (इसका अर्थ है ब्रह्मचारीणी)
  • 01 अक्टूबर 2019- चंद्रघंटा (इसका अर्थ है चांद की तरह चमकने वाली)
  • 02 अक्टूबर 2019- कूष्माण्डा (इसका अर्थ है पूरा जगत उनके पैर में है)
  • 03 अक्टूबर- स्कंदमाता (इसका अर्थ है कार्तिक स्वामी का माता)
  • 04 अक्टूबर- कात्यायनी (इसका अर्थ है कात्यायन आक्षम में जन्मि)
  • 05 अक्टूबर- कालरात्रि (इसका अर्थ है काल का नाश करने वाली)
  • 06 अक्टूबर- महागौरी (इसका अर्थ है सफेद रंग वाली मां)
  • 07 अक्टूबर- सिध्दिदात्री (इसका अर्थ है सर्व सध्दि देने वाली)

Durga Puja Navaratri Ashtami Navami Dussehra Vijayadashmi 2019 Calendar Dates

29 September, 2019- Navaratri begins, Kalash Sthapana, कलश स्थापना, नवरात्रि की शुरुआत

6 October- Durga Ashtmi, Maha Ashtami, Ashtami, दुर्गा अष्टमी, महाअष्टमी, अष्टमी

7 October- Durga Navami, Maha Navami, Navami, दुर्गा नवमी, महानवमी, नवमी

08 October- Dusshera, Vijaydashmi, दशहरा विजयदशमी

अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूरे विधिविधान से पूजा करनी चाहिए. इस दिन हवन का महत्त्व बताया गया है. पूजा करने के बाद ब्राह्मणों और कन्याओं को भोजन करा कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए. कई लोग इस दिन कन्यापूजन भी करते हैं. देवी पूजन, हवन, कुमारी पूजन और ब्राह्मण भोजन से दुर्गा पूजन संपन्न होता है.

कोलकाता की दुर्गा पूजा विधि और मंत्र

देवी दुर्गा पूजा विधि

नवरात्र आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित पर्व है. इस पर्व का समापन अष्टमी या नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के पश्चात होता है. अमूमन घरों में पूजा के लिए नियम बने हुए होते हैं जिसके अनुसार पूजा की जाती है लेकिन आज हम आपको बताते हैं पुराणों में वर्णित देवी दुर्गा की पूजा विधि.

पूजा के लिए आवश्यक साम्रगी

मां दुर्गा की पूजा, कलश, दूध, दही, चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध, वस्त्र, प्रसाद, पंच फल, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा, कन्याओं के लिए वस्त्र व उपहार.

षोडशोपचार पूजा विधि

मां दुर्गा की पूजा में सोलह चरण होते हैं जिस कारण इसे षोडशोपचार पूजा विधि भी कहते हैं. यह आह्वाहन से शुरु होकर क्षमापना पर समाप्त होता है. आइये चरणबद्ध तरीके से यह पूजा विधि समझें.

आह्वाहन

मां दुर्गा की पूजा से पहले सर्वप्रथम आह्वाहन किया जाता है. यह एक तरह का निमंत्रण होता है कि अमुक देव मेरे निवास पर आएं, हमने उनके लिए पूजा का प्रबंध किया है. इसे कई जगह संकल्प के नाम से भी जाना जाता है. मां दुर्गा का आह्वाहन मंत्र निम्न है: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: आवाहनं समर्पयामि॥

आसन

तत्पश्चात मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को किसी आसान पर स्थापित करें. आसन कच्चे चावल या लाल कपड़े का हो तो सर्वोत्तम है. आसान प्रदान करते समय निम्न मंत्र का जप करें: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: आसनं समर्पयामि॥

पाद्य प्रक्षालन

भारतीय परंपरा में अतिथि के आगमन पर उसके पांव धोने की परंपरा है. देवी दुर्गा का आह्वाहन और उनका आसान समर्पित करने के बाद उनके पांवों को धोने के लिए जल अर्पण किया जाता है. मां की प्रतिमा या तस्वीर के पांवों को धोने के लिए पानी देते समय निम्न मंत्र का जाप करें: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: पाद्यम समर्पयामि॥

अर्घ्य, आचमन व स्नान

तत्पश्चात माता दुर्गा को स्नान व हाथ धोने के लिए जल अर्पण किया जाता है. इस समय निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: आचमनीयं जलं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: अर्घ्यं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: स्नानीयं जल समर्पयामि॥

वस्त्र, चन्दन और रोली अर्पण

इसके बाद मां दुर्गा को वस्त्र, आभूषण, चन्दन और रौली अर्पण करने चाहिए. इस दौरान निम्न मंत्र का जप करना चाहिए: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: वस्त्रं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: आभूषणं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: चन्दनं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: रोली समर्पयामि॥

विधि

इसके बाद मां दुर्गा को काजल, सौभाग्य सूत्र, ईत्र, अक्षत (चावल) आदि समर्पित करने चाहिए. तत्पश्चात मां को पुष्प, दीप और धूप अर्पित करने चाहिए। यह सभी वस्तुएं निम्न मंत्र के साथ अर्पण करने चाहिए: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: धूपमाघ्रापयमि समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: दीपं समर्पयामि॥

पुष्प अर्पित

पुष्प अर्पित करने के बाद आरती और मां को भोग लगाना चाहिए. माता दुर्गा की पूजा में नारियल का भोग अवश्य लगाना चाहिए। नैवैद्य व नारियल अर्पित करते समय निम्न मंत्रों का जप करना चाहिए: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: नैवैद्यं समर्पयामि॥ ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: नारियलं समर्पयामि॥

आचमन

इसके बाद मां को आचमन के लिए जल अर्पित करना चाहिए. आचमन के बाद मां को पान-सुपारी चढ़ाना चाहिए. पान-सुपारी चढ़ाने के बाद मां दुर्गा को दक्षिणा देनी चाहिए.

कन्या पूजन

नारद पुराण के अनुसार मां दुर्गा की पूजा कौमारी पूजा अर्थात कन्या पूजन के बिना अधूरी होती है. कन्या पूजा में दो से दस वर्ष तक की नौ कन्याओं को घर पर बुलाकर उनकी यथाशक्ति सेवा करनी चाहिए. सबसे पहले कन्याओं का पैर शुद्ध पानी से धोकर उन्हें स्वच्छ स्थान पर आसान देना चाहिए.

हवन

इसके बाद हवन साम्रगी में अग्नि प्रज्जवलित करनी चाहिए. कन्याओं की आरती कर उन्हें श्रृंगार के सामान अर्पित करने चाहिए.

कन्या पूजन

कन्याओं की उसी तरह से पूजा करें जिस तरह से आपने देवी दुर्गा की पूजा की है. इन्हें मां दुर्गा का ही स्वरूप मानना चाहिए. इसके बाद हलवे-पुड़ी का भोग लगाना चाहिए। लड़कियों को खिलाने के बाद, उन्हें उपहार दें उपहार व दक्षिणा अवश्य प्रदान करना चाहिए.

प्रदक्षिणा

कन्या पूजन के बाद मां दुर्गा की प्रदक्षिणा करनी चाहिए. प्रदक्षिणा करने के लिए आप हाथ में पुष्प धारण कर मां दुर्गा की प्रतिमा के आगे दायं से बायं ओर घुमाएं और निम्न मंत्र का जाप करें: ऊं भूर्भुव: स्व: दुर्गादेव्यै नम: प्रदक्षिणां समर्पयामि॥

पूजा के अंत में

अब सबसे अहम भाग, पूजा के अंत में पूजा में रह गई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए दुर्गा माता से क्षमा मांगे. क्षमापन मंत्र निम्न है: अपराध शतं देवि मत्कृतं च दिने दिने। क्षम्यतां पावने देवि-देवेश नमोस्तु ते॥

देवी होंगी प्रसन्न

इस विधि द्वारा मां दुर्गा की पूजा करने से मां अत्यंत प्रसन्न होती है और जातक को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं.

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