Durga Puja 2019: कलेक्टर ने चढ़ाई महामाया-महालया को मदिरा की धार

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Ujjain (MP): रविवार को शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर प्राचीन मान्यतानुसार इस वर्ष भी चौबीसखंबा स्थित देवी महामाया और महालया  को कलेक्टर शशांक मिश्र ने पूजन करके, मदिरा की धारा चढ़ाई.

इसके बाद ढोल ढमाकों के साथ नगर पूजा का दौर शुरू हुआ, जो कि शाम तक चला. नगर पूजा का समापन देर शाम महाकाल मंदिर के शिखर पर ध्वज अर्पित कर किया गया.

भैरव एवं हनुमान मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ाया गया वहीं देवियों को सुहागिन की श्रृंगार सामग्री, चुनरी अर्पित की गई.

नगर पूजा में तेल के डिब्बे, सिंदूर, चांदी के वर्क, कुमकुम, मेहंदी, चूडिय़ां, चूंदड़ी, सोलह श्रृंगार के सेट, चमेली के तेल की शिशी,  नारियल, चना का बाकल, कोडिय़ां, पूजा की सुपारी, सिंघाड़ा सूखा, लाल नाड़ा, लाल कपड़ा, गोटा किनारी, गुगल, अगरबत्ती, कोरे पान डण्ठलवाले, कपूर, भजिये, पूरी, दही, दूध, शकर, नीबू, काजल डिब्बी, बिंदी, तोरण, लाल कपड़े के झण्डे, जनेऊ, मिट्टी की हाण्डी, पीतल के लोटे जिनके पेंदे में छेद होती है तथा मदिरा की बोतलें लेकर दल चला.

नगर पूजा के दौरान 27 किलोमीटर तक मदिरा की धार चली. प्रशासन की ओर से कलेक्टर एसडीएम,तहसीलदार, पटवारी व कोटवारों ने पूजा की. नगर यात्रा के दौरान सबसे आगे एक कोटवार लोटे में मदिरा लेकर चला.

लोटे के पेंदे में छेद था और एक कपड़ा बंधा था,जिसमें से बूंद-बूंद मदिरा टपक रही थी. इसके साथ एक कोटवार टोकनी में बरबाकल याने भजिये-पूरी आदि लेकर चल रहा था, जोकि यात्रा के दौरान बरबाकल को सड़क पर डालता गया.

इनके पिछे कोटवारों,पटवारियों का दल चल रहा था. जिनके पास देशी एवं विदेशी मदिरा की बोतलें थी. लोटे में मदिरा समाप्त होते ही उसमें मदिरा भर दी जाती थी. यह क्रम यात्रा समापन के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के बाहर तक चला. 

नगर पूजा यात्रा के दौरान चौबीसखंबा मंदिर से अद्र्धकाल भैरव कालियादेह दरवाजा, कालिकामाता, नयापुरा स्थित खूंटपाल भैरव, चौसठयोगिनी मंदिर,लाल बई, फूल बई, शतचण्डी देवी, राम-केवट हनुमान,   नगरकोट की रानी, नाकेवाली दुर्गा मां, खूंटदेव भैरवनाथ, बिजासन मंदिर, चामुण्डा माता मंदिर, पद्मावती मंदिर, देवासगेट भैरव, इंदौरगेटवाली माता, ठोकरिया भैरव, इच्छामन भैरव, भूखीमाता, सती माता, कोयला मसानी भैरव, गणगौर माता, श्मशान भैरव, सत्ता देव, आशा माता, आज्ञावीर बेताल भैरव, गढ़कालिका, हांण्डीफोड़ भैरव की पूजा प्रमुख रूप से की गई. 

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