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दिवाली स्‍पेशल ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ का ट्रेलर जारी, आमिर बोले ‘धोखा स्वभाव है मेरा, अमिताभ का जवाब ‘और भरोसा मेरा’

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यश राज बैनर्स की दिवाली स्‍पेशल फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ का ट्रेलर यूट्यूब पर लॉन्च कर दी गई. इस फिल्‍म में पहली बार आमिर खान और अमिताभ बच्चन की जोड़ी है. फिल्म के ट्रेलर में आमिर खान का डायलॉग है ‘धोखा स्वभाव है मेरा’ जबाव में अमिताभ बच्चन कहते हैं ‘और भरोसा मेरा’. ट्रेलर के यही दो डॉयलॉग पूरी फिल्‍म को दमदार और टर्निंग प्वाइंट बनाने का दम रखते हैं. फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान दिवाली के मौके पर रिलीज होगी.

फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान का ट्रेलर देखने से आमिर खान की भूमिका आपको ‘मंगल पांडे’ के किरदार की याद दिलाती है. इस फिल्म में भी फिरंगी के किरदार में आमिर अंग्रेजों के लिए शुरू में काम करेंगे और बाद में ‘आजाद’ बने अमिताभ बच्च से संपर्क में आने के बाद अपने अनोखे अंदाज में विद्रोह कर देंगे.

फिल्म का ट्रेलर के शुरुआत में बताया गया है कि यह कहानी 1795 के उस दौर की है जब ब्रिटिश लोगों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से हमारे देश पर हुकूमत करना शुरू कर दिया था. उस समय आजाद नाम के एक ठग ब्रिटिश हुकूमत के लिए मुसीबत बन गया था. हालत यह हुई कि ब्रिटिश हुकूमत ने इस ठग से निपटने के लिए एक और ठग यानी फिरंगी मल्लाह की मदद ली. आमिर खान का किरदार इस फिल्म में ऐसा है कि वह किसकी तरफ है यह समझना मुश्किल है.

ट्रेलर में वीएफएक्स् का कमाल काफी मेजदार दिख रहा है और कई जगह आपको बड़े-बड़े जहाज और सितारों के लुक का अंदाज आपको ‘बाहुबली’ की ग्रैंड स्टााइल की याद दिला सकते हैं.

देखें फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ का ट्रेलर

मजेदार है 1795 के ठगों की कहानी

बता दें कि दरअसल यह एपिक एक्शोन-एडवेंचर फिल्मा ब्रिटिश लेखक और प्रशासक फिलिप मीडोज टेलर के 1839 के उपन्‍यास कंफेशंस ऑफ ए ठग (Confessions of a Thug) पर आधारित है. इसमें एक ऐसे ठग की कथा है जिसका गैंग 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश भारत में अंग्रेजों के लिए खासा सिरदर्द बन गया था. यह उपन्यास जब प्रकाशित हुआ तो 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में अपनी रोचक कथावस्तु के कारण यह ब्रिटेन का बेस्ट -सेलर क्राइम उपन्यास बन गया.

यह उपन्‍यास इतना मशहूर हुआ कि इसने ब्रिटेन को ठग शब्दं से परिचित कराया. यहां तक कि ब्रिटेन ने इस हिंदी शब्द को अपने अंग्रेजी शब्दकोश में शामिल किया. कहा जाता है कि महारानी विक्टोरिया ने भी इस उपन्यास को पढ़ा था. रुपयार्ड किपलिंग के चर्चित उपन्यास किम (1901) से पहले भारत के संबंध में लिखा गया यह सबसे प्रभावी उपन्यास माना जाता है.

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