RMC द्वारा की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ डिप्‍टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने मोर्चा खोला

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Ranchi: नगर निगम (Ranchi Municipal Corporation) अक्‍सर विवादों में रहता है. अब यहां के डिप्‍टी मेयर ने रांची नगर निगम के द्वारा की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संजीव विजयवर्गीय ने नगर निगम के उस आदेश के खिलाफ मोर्चा खोला है, जिसमें लॉज, हॉस्टल और बैंक्वेट हॉल को रजिस्‍ट्रेशन के लिए कहा गया है. अपनी बात कहने के लिए संजीव विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झारखंड सरकार के सभी प्रमुख अधिकारियों को पत्र लिखा है.

दरअसल, बिना लाइसेंस वाले लॉज, हॉस्टल और बैंक्वेट हॉल को सील करने साथ ही उन्‍हें तोड़ने का नोटिस निगम प्रशासन की ओर से जारी किया जा रहा है. इसके लिए 27 फरवरी तक का समय लॉज, हॉस्टल और बैंक्वेट हॉल के संचालकों को दिया गया है. निगम के इसी आदेश के खिलाफ रांची के उपमहापौर संजीव विजयवर्गीय ने आपत्ति जाहिर जताई है.

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डिप्‍टी मेयर ने कहा कि आए दिन नगर निगम के अधिकारी रांची की जनता को परेशान करने वाला फरमान जारी कर देते हैं. उन्हें उजाड़ने का संदेश दिया जाता है, जिससे जनता खुद को बेबस महसूस कर रही है. पिछले दिनों लॉज, हॉस्टल और बैंक्वेट हॉल को लेकर भी यह बात सामने आई है. उन्‍होंने कहा कि अधिकांश लॉज, हॉस्टल और बैंक्वेट हॉल के संचालक पहले से ही रजिस्ट्रेशन कराने के लिए परेशान हैं, लेकिन रांची नगर निगम में आने से पता चलता है कि नियमावली में जो उल्लेख है उसके तहत उनका रजिस्ट्रेशन संभव नहीं है.

जटिल नियम से बढ़ी है परेशानी

मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए संजीव विजयवर्गीय ने कहा कि इस हिसाब से संचालक अप्लाई नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि लगातार तीन से चार वर्षो से बोर्ड की बैठक में नियमावली संशोधन का प्रस्ताव पारित हो रहा है, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. डिप्‍टी मेयर ने बताया कि इसीलिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत कराया है, जिससे कि वर्तमान नियमावली में संशोधन कराने की मांग की है, ताकि सालों से रह रहे लोगों को राहत मिल सके.

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जब हो रहे थे अवैध निर्माण तब कहां थे अधिकारी

इसके साथ ही उन्होंने शहर में चल रहे अतिक्रमण अभियान को लेकर भी निगम के अधिकारियों और जिला प्रशासन के पदाधिकारियों को फटकार लगाई है. उन्होंने कहा कि जब बगैर नक्शे के अवैध निर्माण हो रहे थे, तब शहर के सौंदर्यीकरण करने का बोझ अपने कंधो पर उठाए पदादिकारी और अधिकारी कहां थे, तब लोगो को अवैध निर्माण से क्यों नही रोका गया. वहीं उन्होंने कहा कि जो भी लोग सालों से बस गए हैं उनके आशियाने को उजाड़ा न जाए. बल्कि उसे नियमित करने का उपाय सोचा जाए.

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