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Live in relationship का definition और भारत में कानूनी सुरक्षा

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Live in relationship विवादों से भरा, लेकिन modern life के लिए एक रचा बसा अनूठा रिश्ता है. इसमें शादी की पुरानी मान्यता को दरकिनार करते हुए जोड़े साथ रहते है. साथ ही वैसे ही अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे के लिए निभाते है जैसे वो शादी करने के बाद करते. लेकिन इसमें जो अलग है वो है किसी भी तरह के नैतिक दबाव का नहीं होना. अगर वो चाहे तो कभी भी अलग हो सकते है.

अगर इसमें से सामाजिक view और सदियों से चली आ रही कुछ धार्मिक मान्यताओं को अलग करदे तो कुछ भी गलत नहीं है. क्योंकि दो वयस्क जो अपने बारे में ठीक से भला बुरा सोच सकते है. जिनकी मानसिक स्थिति ठीक हो वो यह फैसला ले सकते है. वह तय कर सकते है कि उन्हें कैसे और किसके साथ अपनी जिन्दगी व्यतीत करनी है. फिर चाहे उस रिश्ते को कोई नाम दिया जाये या नहीं. अगर आप “लोग क्या कहेंगे” से आगे जाकर कुछ अच्छा अपने लिए करना चाहते है तो मेरे ख्याल से इसे किसी भी स्तर पर गलत नहीं कहा जाना चाहिए.

Live in relationship के लिए कानूनी सुरक्षा का प्रावधान

हालाँकि सामाजिक स्तर पर दो वयस्कों का एक साथ रहना कुछ बेवकूफ लोगो को गवारा हो. कानूनी स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने काफी समय तक चल रही इस दुविधा को इस तरह दूर किया है. कोर्ट ने कहा है कि “ यदि कोई भी जोड़ा एक लम्बे समय तक बिना शादी के साथ रहता है यानि लिव इन में रहता तो कोर्ट उसे शादीशुदा जोड़े की मान्यता दे देगा और साथी की मौत के बाद महिला की उस पुरुष कि सम्पति में भी हिस्सेदारी होगी और अगर किसी विवाद की स्थिति होती है तो महिला को अविवाहित साबित करने की जिम्मेदारी प्रतिवादी पक्ष की होगी “.

इसलिए हम कह सकते है समाज के कुछ लोग या तबका इस बात का विरोध करते हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट और कानूनी रूप से लिव इन एकदम उचित है और इसे कानूनी सुरक्षा भी प्राप्त है.

असल में विवाह न केवल भारत में बल्कि दूसरी संस्कृतियों में भी पवित्र माना गया है. इसे धार्मिक भावना से भी जोड़कर देखते हैं. जिसमे partners अपने जीवनसाथी के साथ जीवनभर के लिए loyel रहने का प्रण लेते है. इसे इतना पवित्र और खास समझे जाने के पीछे महिला की सुरक्षा निहित है. क्योंकि हम सब जानते है एक स्त्री को लेकर शुरू से मानसिकता होती है कि उसे पराये घर जाना है. जबकि जिस घर में उसे जाना है उसके लिए भी अगर ऐसा माहौल हो तो मुश्किल होती है. एक स्त्री के अस्तित्व के लिए इसलिए तो शादी के बाद कानूनी तौर पर उसे अपने पति की जायदाद में आधा हिस्सेदार माना गया है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में भी यही हित निहित है स्त्री की सामाजिक सुरक्षा जिसे लेकर लिवे इन को भी एक जायज रिश्ता माना गया है.

law के अनुसार जो भी जोड़े विवाह के लिए सक्षम है लेकिन फिर भी वो बिना विवाह के एक साथ रह रहे है तो इसे live in realatioship कहा जाता है. बस वो मानसिक तौर पर सही हो और अपना हित और अहित समझ सकते हो और कानूनन उसी तरह की सुरक्षा इसमें लागू होती है. जो विवाह के उपरांत होती है बस दोनों में से कोई भी तलाकशुदा नहीं हो और ना ही उनका पहले विवाह हुआ हो. विवाहेतर संबध जो होते है उन्हें इस श्रेणी में नहीं गिना जाता है.

live in relationship को कानूनी मान्यता के लिए जरुरी है कि वो सालों से एक साथ रह रहे हो. लिव इन में साथ रहने वाले जोड़े चूँकि law के तरह विवाहित नहीं होते है इसलिए इन पर साथ रहने का कोई बंधन नहीं होता है और इन्हें अलग होने के लिए तलाक जैसी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होता है इसलिए कुछ छोटी छोटी बातें और भी है जो विवाह को कानूनी रूप से भी live in relationship से अलग करती है.

चूँकि इस बारे में कोई ठोस law नहीं है. लेकिन आये दिन आने वाली कुछ समस्यायों को लेकर लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटाते है. कोर्ट महिला सुरक्षा और उसके अधिकारों की रक्षा करते हुए जिस तरह के फैसले लेते है उसी तरह इसकी परिभाषा भी तय कर ली गयी है. लेकिन महिला सुरक्षा के तहत आने वाले कुछ कानूनो में जिस तरह से विवाह को शामिल किया गया है.

live in relationship के तहत साथ रहने वाली महिलाओं को भी तमाम वो सुरक्षा के अधिकार दिए गये है. जैसे – घरेलू हिंसा के law मे विवाहित महिलाओं को जिस तरह की सुरक्षा प्राप्त है. ठीक उसी तरह लिव इन में रहने वाली महिलाओं के भी है.

लिव इन में रहने वाले जोड़ों से पैदा होने वाले बच्चो के अधिकारों की बात करें तो उन्हें भी कानूनी शादी से जन्म लेने वाले बच्चो जैसे अधिकार दिए गये है. जैसे पिता की सम्पति में हिस्सा, गुजारा भत्ता और कुछ अन्य प्रकार के हक का समर्थन भी कानूनी रूप से इस तरह के रिश्ते को प्राप्त है.

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