#अन्ना_हजारे_तुम_कहाँ_हो : सोशल मीडिया पर बहस- “अन्ना हजारे” जी से ज्यादा कोई अपने “घर” पर “क्वारंटाइन” होकर दिखाएं तो बताना

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अन्‍ना हजारे को लेकर ट्वीटर पर बहस छिड़ गई है. लोग कई तरह के सवाल कर रहे हैं. #अन्नाहजारेतुमकहाँहो हैशटैग के साथ देश में 2014 में भाजपा शासन के बाद अन्‍ना हजारे के निष्क्रियता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.
आइए आपको बताते हैं ट्विटर पर कैसे-कैसे सवाल खड़ा हो रहे हैं. यूजर #अन्नाहजारेतुमकहाँहो हैशटैग के साथ क्‍या कह रहे हैं.



अन्‍ना हजारे कौन हैं

अन्ना हज़ारे भारत के उन चंद नेताओं में से एक हैं, जो हमेशा सफेद खादी के कपड़े पहनते हैं और सिर पर गाँधी टोपी पहनते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता और देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की अलख जगाने वाले अन्ना हजारे ने 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में धुआंधार तरीके से अनशन किया था और 9 अप्रैल को अपने इस अनशन का समापन किया था.

उनके इस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि कभी उनके सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के तख्तो ताज तक पहुंचने का रास्ता इसी आंदोलन से निकला था. यह दिन दुनिया की एक और बड़ी घटना का भी गवाह है.

वर्ष 2003 का वह मंजर बहुत से लोगों को याद होगा, जब इराक के तानाशाह शासक सद्दाम हुसैन के शासन का अंत हुआ था और लोगों ने बगदाद के फिरदौस चौराहे पर लगी सद्दाम की मूर्ति को गिरा डाला था. इतिहास में वह घटना भी नौ अप्रैल की तारीख में दर्ज है.

भ्रष्टाचार के विरोधी अन्‍ना हजारे

महात्मा गांधी के बाद अन्ना हजारे ने ही भूख हड़ताल और आमरण अनशन को सबसे ज़्यादा बार बतौर हथियार इस्तेमाल किया है. भ्रष्ट प्रशासन की खिलाफवर्जी हो या सूचना के अधिकार का इस्तेमाल, हजारे हमेशा आम आदमी की आवाज़ उठाने के लिए आगे आते रहे हैं.

अन्ना हजारे ने ठीक ही सोचा था कि भ्रष्टाचार देश के विकास को बाधित कर रहा है. इसके लिए उन्होंने 1991 में भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन शुरू किया. उन्होंने पाया कि महाराष्ट्र में 42 वन अधिकारी सरकार को धोखा देकर करोड़ों रुपए की चपत लगा रहे हैं.

उन्होंने इसके सबूत सरकार को सौंपे, लेकिन सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि सत्ताधारी दल का एक मंत्री उनके साथ मिला था. इससे व्यथित हजारे ने भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया गया पद्मश्री पुरस्कार और प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा दिया गया वृक्ष मित्र पुरस्कार लौटा दिया.

उन्होंने पुणे के आलंदी गांव में इसी मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल कर दी. आखिर में सरकार कुंभकर्णी नींद से जागी और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की. हजारे का यह आंदोलन काफ़ी काम आया और 6 मंत्रियों को त्याग-पत्र देना पड़ा जबकि विभिन्न सरकारी कार्यालयों में तैनात 400 अधिकारियों को वापस उनके घर भेज दिया गया.

अन्‍ना हजारे के प्रमुख आंदोलन

  1. महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन 1991.
  2. सूचना का अधिकार आंदोलन 1997-2005.
  3. महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन 2003.
  4. लोकपाल विधेयक आंदोलन 2011.
  5. प्रमुख सम्मान और पुरस्कार.
  6. पद्मभूषण पुरस्कार (1992).
  7. पद्मश्री पुरस्कार (1990).
  8. इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार (1986).
  9. महाराष्ट्र सरकार का कृषि भूषण पुरस्कार (1989).
  10. यंग इंडिया पुरस्कार.
  11. मैन ऑफ़ द ईयर अवार्ड (1988).
  12. पॉल मित्तल नेशनल अवार्ड (2000).
  13. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंटेग्रीटि अवार्ड (2003).
  14. विवेकानंद सेवा पुरुस्कार (1996).
  15. शिरोमणि अवार्ड (1997).
  16. महावीर पुरुस्कार (1997).
  17. दिवालीबेन मेहता अवार्ड (1999).
  18. केयर इन्टरनेशनल (1998).
  19. बासवश्री प्रशस्ति (2000).
  20. GIANTS INTERNATIONAL AWARD (2000).
  21. नेशनलइंटरग्रेसन अवार्ड (1999).
  22. विश्व-वात्सल्य एवं संतबल पुरस्कार.
  23. जनसेवा अवार्ड (1999).
  24. रोटरी इन्टरनेशनल मनव सेवा पुरस्कार (1998).
  25. विश्व बैंक का ‘जित गिल स्मारक पुरस्कार’ (2008).

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