दास्‍तान-ए-NGO: जुर्माना भरेंगे, कोर्ट जायेंगे, पर RTI से मांगी जानकारी नहीं देंगे

by

Ranchi: भारत में सरकार द्वारा चलायी जा रही विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में एनजीओ बड़ी भूमिका निभाते हैं. सरकार इसके लिए उन एनजीओ को खुलकर फंड भी मुहैया कराती है. लेकिन इन पैसों का हकीकत में किस तरह इस्‍तेमाल किया जाता इसका जवाब देना वे एनजीओ जरूरी नहीं समझते हैं. गुमला के आनंद किशोर पंडा ने झारखंड में काम करने वाली प्रदान से हिसाब पूछ लिया और आरटीआई से जानकारी मांग ली. उस एनजीएओ पर डेढ़ लाख रुपया जुर्माना हो गया, लेकिन प्रदान ने जानकारी देना मुनासिफ नहीं समझा.

सरकार के द्वारा संचालित ज्यादेत्तर विकास  योजनाओ का क्रियान्वयन देश व राज्य के गैर सरकारी संस्थाओ के द्वारा किया जाता है और भारतीय संसद द्वारा अधिनियमित सूचना का अधिकार कानून  2005 की धारा – 2 (ज) में स्पष्ट भी किया गया है कि ” प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जो भी स्वंयसेवी/गैर-सरकारी संस्थाएँ केन्द या राज्य सरकार से राशि लेकर काम करेगे ये सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एक लोक प्राधिकार की श्रेणी में आएंगें और इन्हे पब्लिक डिमाण्ड पर सूचनाएं देनी होगी ” लेकिन ये गैर-सरकारी संस्थाएँ सरकार से पब्लिक लोकधन प्राप्त करने में आगे रहते है लेकिन सूचना का अधिकार के तहत सूचनाएं मांगने पर पल्ला झाडते हैं.

आवेदक यदि सूचनाओं के लिए सूचना आयोग चला जाय तो वहॉ भी इन संस्थाओ के द्वारा  आरटीआई से बचने के लिए तरह के बहानेबाजी व हथकण्डे अपनाते हैं और आयोग के अल्टीमेटम के बाद भी सूचनाएं आपूर्ति करने में कोताही बरतते है और कहते हैं कि दण्ड भरूंगॉ लेकिन आरटीआई के तहत सूचनाएँ नही दुगॉ कुछ ऐसी ही नजारा झारखंड की एक गैर सरकारी संस्था ” प्रोफेशनल असिसटेन्स फॉर डेवलपमेन्ट एक्शन “(प्रदान) की है जिसका पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली व झारखंड के कई जिलो मे कार्यरत है तथा करोडों-अरबो रूपए केन्द्र व राज्य सरकार से राशि लेकर विकास योजनाओ का क्रियान्वयित किया जा रहा है लेकिन सूचना का अधिकार के तहत सूचनाएँ देने में यह संस्था विफल है.

यहीं कारण है कि गुमला के आरटीआई एक्टिविस्ट आनन्द किशोर पण्डा के सन् 2009 ई० के छह आरटीआई द्वितीय अपील स०- 450/09, 588/09, 589/09, 590/09, 960/09 तथा 961/09 पर संस्था के गुमला टीम लिडर -सह- जन सूचना पदाधिकारी द्वारा सूचनाएं नही देने पर झारखंड राज्य सूचना आयोग के द्वारा 1.50 लाख रूपये अर्थ दण्ड अधिरोपित कर दिया और संस्था बिल्कुल आसान से दण्ड की राशि 1.50 रू० राज्य कोष में जमा कर दिया लेकिन आवेदक आनन्द किशोर पण्डा को संस्था द्वारा  केवल दण्ड की राशि राज्य कोष में जमा कर सूचनाएँ से वंचित करने की मामला नही भाया और आवेदक के द्वारा सच्चाई व पारदर्शिता के लिए फिर से 17-09-2013 को एक साथ “प्रदान” के आठ अलग-अलग जिले के शाखा कार्यालयो क्रमश: रांची, लोहरदगा, खूंटी, हजारीबाग, दुमका, गोड्डा, देवघर व पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के टिम लिडर के पास आरटीआई के तहत  सूचना आवेदन लगाकर सूचनाएं लेने का प्रयास किया गया लेकिन आठो मामला झारखंड राज्य सूचना आयोग पहुंचने के बाद भी आज तक सूचनाएं नदारत है.

42a33c09-61ee-48b3-a96e-e4419e2a5f86.jpg

जब आयोग द्वारा  कडा एक्शन लेते हुए संस्था के जन सूचना पदाधिकारी -सह- टीम लीडर के विरुद्ध दण्ड अधिरोपित करने का नोटिस भेजा गया तो सभी के सभी जिलो के आठों टीम लीडरो द्वारा झारखंड हाईकोर्ट मे सूचना का अधिकार कानून 2005 से बचने के लिए आठ (08) अलग-अलग रिट याचिका दायर कर वह हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर सूचना आयोग की कारवाई को रूकवा दिया गया है. जिसमें अपील सं०- 292/14 मे प्रदान रांची तथा (हाईकोर्ट की याचिका सं०-W.P.(s) 5453/17) , 293/14 प्रदान,लोहरदगा (याचिका सं०-5446/17), अपील सं०-294/14प्रदान,खूंटी (याचिका सं०-5435/17) , अपील सं०-931/14 प्रदान, दुमका (याचिका सं०-5452/17), अपील सं०-932/14 प्रदान, गोड्डा  (याचिका सं०-5454/17) , अपील सं०-933/14 प्रदान देवघर ( याचिका सं०- 5444/17), अपील सं०- 1182/14 प्रदान हजारीबाग ( याचिका सं०-5445/17) , अपील स०-1360/14 प्रदान चाईबासा (याचिका सं०- 110/16) है.

आनन्द किशोर पण्डा के द्वारा आरटीआई के द्वारा आठ अलग-अलग सूचनावेदन के जरिये ” प्रदान ” संस्थाओ के विभिन्न कार्यालयो से दिनांक 17/09/2013 को निम्न सूचनाएं मांगी गई थी जिसे संस्था के कार्यालयों के टीम लीडरों के द्वारा अब तक उपलब्ध नही कराई गई :-

(1) वित्तीय वर्ष 2005-06 से वित्तीय वर्ष 2013-14 तक इन 09 वित्तीय वर्षो में सरकार से किस मद में काम करने के लिए कितनी राशि प्राप्त किया इसकी वर्षवार व मदवार व्योरा ?

(2) यदि सरकारी फण्ड प्राप्त करने के संस्था व सरकार से MOU हुई है तो इसकी सत्यापित प्रति ?

(3) संस्था कार्यालय में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारियो का ब्योरा , नाम, पदनाम, योगदान तिथी व वेतन-भत्ते का ब्योरा?

(4) संस्था के विरुद्ध या संस्था के द्वारा  आयोग, लॉवर कोर्ट, हाईकोर्ट कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट व अन्य प्राधिकार में मामले दर्ज है इसका वादी/प्रतिवादी , वाद सं- तथा case status की पूर्ण ब्योरा ? तथा इसमे हुए अब खर्चे का पूर्ण ब्योरा ?

 

(5) संस्था द्वारा पिछले 10 वर्षो में जो भी कर्मचारियों को निलम्बन या नौकरी से बर्खास्त किया गया है कारणों सहित पूर्ण ब्योरा ?

 

(6) सस्था के पास अब जितने भी आरटीआई विभिन्न आवेदको के द्वारा लगाया गया है इसकी पूर्ण ब्योरा ?

 

(7) संस्था के ….जिला कार्यालय मे आरटीआई के तहत प्रथम अपीलीय प्राधिकार कौन है ?

 

मांगी गई सूचनाओं को आज पांच वर्षो से उपर हो गया लेकिन अब तक आवेदक को जवाब नही मिला है. जिससे संस्था के विकास योजनाओ कार्यो पर प्रश्नचिन्ह उठता है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.