लॉकडाउन के दौरान डिजिटल क्लासेज, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वेबिनार के जरिए बढ़ रहे हैं साइबर हमले के खतरे

by

New Delhi: लंबे समय तक लॉकडाउन और घर से डिजिटल तरीके से काम करने की वजह से नेपाल ही नहीं पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल पहले से 50 फीसदी ज्यादा हो गया है. वेबिनार, वीडियो क्रांफ्रेंसिग औऱ डिजिटल क्लासेज का चलन लगातार बढ़ने से साइबर खतरे काफी बढ़ गए हैं.

नेपाल में पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए जब वीडियो कांफ्रेंसिंग और वेबिनार के दौरान स्पैमर्स ने घुसपैठ की और लोगोंके एकाउंट हैक करने की कोशिशें हुईं.

गूगल मीट एप्लिकेशन के जरिये नेपाल में पिछले दिनों हुए एक वेबिनार में स्पैमर ने घुसपैठ की लेकिन उसे बाद में हटा दिया गया.

उसी तरह 29 अप्रैल को भी एक वेबिनार इसी वजह से बीच में ही खत्म कर देना पड़ा क्योंकि यहां स्पैमर्स के एक पूरे गिरोह ने घुसपैठ की, जिनका पता लगाना मुश्किल हो गया. ऐसे हमले ज्यादातर लड़कियों या महिलाओं की ओर से आयोजित ई कार्यक्रमों में खास तौर से हो रहे हैं. इस दौरान अश्लील टिप्पणियां करना और एकाउंट के बीच में आकर कार्यक्रम को बरबाद करने की कोशिश करने जैसी हरकतें शामिल है.

जेनेसिस क्लाउड अकादमी की सीईओ अंजली फुयाल के मुताबिक उन्होंने ईमेल के जरिये ऐसे स्पैमर्स को पकड़ने की कोशिश की तो पता चला कि नेपाल में ऐसे स्पैमर्स बहुत ही सुनियोजित तरीके से गिरोह बनाकर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि स्पैमर्स ने फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर देश विदेश में होने वाले हर तरह के वेबिनार की जानकारी इकट्ठी करते हैं और जैसे ही वेबिनार शुरु होता है, वो स्पैम के जरिये उसमे व्यवधान डालने और घुसपैठ करने की कोशिशें तेज कर देते हैं.

ये पता चला है कि स्पैमर्स का यह गिरोह कॉलेज के छात्रों का है जो इस साइबर क्राइम का अंजाम नहीं जानते. तमाम आईटी कंपनियों और इससे जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे वक्त में साइबर कानूनों को सख्ती से पालन करना और दोषियों को सजा देना जरूरी है.

साइबर मामलों के जानकार सचिन ठाकुरी के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान जो लोग भी वेबिनार या वीडियो कांफ्रेंसिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें साइबर सुरक्षा के तौर तरीके भी समझना चाहिए. ये जरूरी है कि सरकार साइबर कानूनों को सख्त करे, लेकिन यूजर्स को भी इसकी सुरक्षा मानकों को समझने की जरूरत है.

सूचना और तकनीकी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी लोकराज शर्मा का कहना है कि सरकार को इसके बारे में पूरी जानकारी है. दरअसल कोरोना वायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन में इसकी सुरक्षा तौयारियों का मौका नहीं मिला, लेकिन इन घटनाओं को देखते हुए सरकार अब इसके लिए एक दीर्घकालिक योजना बनाने में लगी है.

उनके मुताबिक जूम, स्काइप और मैसेन्जर का इस्तेमाल करते हुए हमें ध्यान रखना चाहिए कि इससे हमारी तमाम सूचनाएं और डाटा कहीं भी जा सकता है जो हमारी प्राइवेसी के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.